राजस्थान के 10 में से 9 नगर निगमों में भाजपा के महापौर, बीकानेर में कांग्रेस ने बचाया किला

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जयपुर। राजस्थान के नगर निगम चुनावों में शुक्रवार को जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम में हुए महापौर चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों की जीत के बाद प्रदेश के 10 नगर निगमों में से 9 में भाजपा के महापौर बन गए हैं। कांग्रेस को केवल बीकानेर में सफलता मिली है। इससे पहले सात नगर निगमों के महापौर चुनाव में भाजपा छह और कांग्रेस एक पद जीत चुकी थी।

शुक्रवार को जयपुर में भाजपा के सुनील कोठारी, जोधपुर में प्रसन्नचंद मेहता और कोटा में अनुसुईया गोस्वामी ने जीत दर्ज की। तीनों नगर निगमों के परिणामों की खास बात यह रही कि भाजपा प्रत्याशियों को पार्टी के निर्वाचित पार्षदों की मूल संख्या से अधिक वोट मिले। गुप्त मतदान होने के कारण अतिरिक्त मत किस पार्षद या दल से आए, इसकी व्यक्तिगत रूप से पुष्टि संभव नहीं है।

जयपुर में सुनील कोठारी को मिले 89 वोट

जयपुर नगर निगम के 150 सदस्यीय सदन में भाजपा प्रत्याशी सुनील कोठारी ने 89 वोट हासिल कर महापौर पद अपने नाम किया। कांग्रेस प्रत्याशी को 60 मत मिले, जबकि एक मत NOTA में गया। इस तरह जीत का अंतर 29 वोट रहा।

भाजपा के 78 निर्वाचित पार्षद थे, जबकि महापौर प्रत्याशी को 89 वोट मिले। यानी भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में पार्टी के मूल संख्याबल से 11 अधिक मत पड़े। इससे साफ है कि उन्हें भाजपा से बाहर के पार्षदों का भी समर्थन मिला, हालांकि गुप्त मतदान के कारण यह तय नहीं किया जा सकता कि ये मत किन पार्षदों के थे।

मतदान के दौरान निगम मुख्यालय के बाहर राजनीतिक गहमागहमी भी रही। कांग्रेस नेताओं ने अपने जनप्रतिनिधियों को निगम परिसर में प्रवेश नहीं दिए जाने को लेकर विरोध जताया। कांग्रेस विधायक रफीक खान और अमीन कागजी ने प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठाए।

जोधपुर में कांटे का मुकाबला, 6 वोट से जीते मेहता

जोधपुर नगर निगम में मुकाबला जयपुर और कोटा के मुकाबले कहीं अधिक करीबी रहा। भाजपा के प्रसन्नचंद मेहता को 53 और कांग्रेस के राजेंद्र सिंह सोलंकी को 47 वोट मिले। मेहता ने छह मतों के अंतर से महापौर का चुनाव जीता। 100 सदस्यीय निगम में बहुमत के लिए 51 मत जरूरी थे।

जोधपुर में भाजपा के 45 और कांग्रेस के 44 निर्वाचित पार्षद थे। इसके अलावा 10 निर्दलीय तथा एक आरएलपी पार्षद था। ऐसे में चुनाव की चाबी काफी हद तक निर्दलीयों और अन्य पार्षदों के हाथ में थी। भाजपा प्रत्याशी को पार्टी के मूल संख्याबल से आठ अधिक वोट मिले।

कांग्रेस ने पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह सोलंकी को मैदान में उतारा था, जबकि भाजपा ने वार्ड 82 से निर्वाचित प्रसन्नचंद मेहता पर भरोसा जताया। नतीजे में भाजपा ने बहुमत का आंकड़ा पार करते हुए महापौर पद हासिल कर लिया।

कोटा में 65-35 का फैसला, क्रॉस वोटिंग की चर्चा

कोटा में भाजपा की अनुसुईया गोस्वामी ने कांग्रेस की सुनीता सुमन को 30 मतों के बड़े अंतर से पराजित किया। अनुसुईया को 65 और सुनीता सुमन को 35 मत मिले।

कोटा नगर निगम के 100 वार्डों में भाजपा ने 57, कांग्रेस ने 39 और निर्दलीयों ने चार सीटें जीती थीं। भाजपा के अपने 57 पार्षदों के मुकाबले उसके महापौर प्रत्याशी को 65 मत मिलने और कांग्रेस प्रत्याशी का आंकड़ा उसके मूल संख्याबल से नीचे रहने के बाद क्रॉस वोटिंग की चर्चा तेज हो गई। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में भी कांग्रेस खेमे से क्रॉस वोटिंग की बात कही गई है, हालांकि गुप्त मतदान के चलते किसी व्यक्तिगत पार्षद के वोट की पुष्टि नहीं हो सकती।

पहले 7 निगमों में भाजपा ने जीते थे 6 महापौर पद

जयपुर, जोधपुर और कोटा से पहले सात नगर निगमों के महापौर पदों के नतीजे घोषित हो चुके थे। भाजपा ने अजमेर, अलवर, पाली और उदयपुर में मतदान के जरिए जीत दर्ज की, जबकि भीलवाड़ा और भरतपुर में उसके प्रत्याशी निर्विरोध महापौर बने। कांग्रेस के खाते में बीकानेर आया।

बीकानेर में कांग्रेस के अनिल कल्ला ने भाजपा प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह शेखावत को 50-30 से हराया था। 80 सदस्यीय निगम में कल्ला को 50 मत मिले। अजमेर में कांग्रेस पार्षद चुनाव में भाजपा से आगे रहने के बावजूद महापौर पद हासिल नहीं कर सकी और भाजपा की अनामिका शर्मा महापौर निर्वाचित हुईं।

पार्षद चुनाव से अलग रहा कई जगह महापौर का गणित

नगर निगम चुनावों की सबसे उल्लेखनीय राजनीतिक तस्वीर यह रही कि वार्डों में मिला संख्याबल हर जगह महापौर चुनाव के नतीजे का सीधा संकेत नहीं बना। जयपुर में भाजपा के 78 पार्षदों के मुकाबले उसके प्रत्याशी को 89, जोधपुर में 45 के मुकाबले 53 और कोटा में 57 के मुकाबले 65 मत मिले।

अजमेर में भी कांग्रेस वार्ड चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सामने आई थी, लेकिन महापौर की कुर्सी भाजपा के खाते में गई। वहीं बीकानेर ऐसा अकेला नगर निगम रहा, जहां कांग्रेस महापौर पद जीतने में सफल रही।