
सबगुरु न्यूज-सिरोही। सुबह हो गई। मुर्गों ने बांग दे दी। सूरज की पहली किरण बादलों की चीरकर बाहर आ गई, लेकिन, भाजपा की सिरोही और शिवगंज नगर निकाय क्षेत्र के वार्ड प्रत्याशियों की आधिकारिक सूचि बाहर नहीं आई। पार्टी सूत्रों की मानें तो भाजपा ऐसा करके आज शाम पांच बजे तक का समय निकालना चाहती है। लेकिन, क्या ये समय निकालकर वो कांग्रेस की आंखों में धूल झोंकने में कामयाब हो जाएगी। यदि हो जाती है ठीक है अन्यथा उसकी ये कवायद फेल होने से कोई रोक नहीं सकता।
-फिर निर्वाचन विभाग खोल दी है पोल
पार्टी सूत्रों के अनुसार भाजपा के अपनी सूची छिपाने की एक वजह बगावत के अलावा ये भी है कि वो अपने प्रत्याशियों को कांग्रेस की आपत्ति से बचाकर आवेदनों को निरस्त होने से बचाना चाहती है।लेकिन, क्या वाकई ऐसा कर पाएगी। जिस तरह निर्वाचन आयोग की वेबसाइट ने ये पोल खोल दी कि मंत्री ओटाराम देवासी अपनी विधानसभा और जिलाध्यक्ष रक्षा भंडारी अपने गृहक्षेत्र में वार्ड संख्या 25 में भाजपा का प्रत्याशी का आवेदन नहीं भरवा पाए वैसे ही ये वेबसाइट ये भी पोल खोल दी है कि सिरोही और शिवगंज में किसने किस वार्ड से भाजपा से नामांकन भरा है।
-इसलिए आज का दिन टालने की कोशिश
निर्वाचन आयोग के शिड्यूल के अनुसार आज नामांकन पत्रों की जांच होगी और आपत्तियां भी दर्ज होंगी। निर्वाचन आयोग के द्वारा स्पष्ट प्रावधान किया गया है कि किस कारण से किसी का नामांकन खारिज किया जा सकता है। ऐसे में भाजपा की कोशिश ये है कि यदि सूची जारी ही नहीं की जाएगी तो कांग्रेस को ये पता नहीं चलेगा कि किसे टिकिट दिया है। ऐसे में उसके प्रत्याशियों के खिलाफ आज लगने वाली आपत्तियों को टाला जा सकेगा। लेकिन, भाजपा ने जिन्हें टिकिट दिया था उन्हें एक दिन सोमवार को सुबह ही फोन करके आवेदन करने को कह दिया था। जिन्हें नहीं मिला था अनके पास फोन नहीं आया था। ऐसे में भाजपा की आधिकारिक सूची बाहर नहीं आने के बावजूद अधिकांश वार्डों में ये स्पष्ट हो चुका है कि किसे टिकिट मिला है। निर्वाचन विभाग की वेबसाइट पर ऐसे लोगों का नाम टेली करते ही अधिकृत प्रत्याशियों की सूची बाहर होगी।
आपराधिक रिकाॅर्ड से ज्यादा भाजपा को सबसे ज्यादा जिस प्रमुख वजह से अपने प्रत्याशियों के आवेदन निरस्त होने की आशंका है वो कारण है ठेके। भाजपा के सत्ता में आने के बाद सिरोही और शिवगंज के निकायों में भाजपा के नेताओं ने खुदके या अपने रिश्तेदार की फर्मों के नाम पर ठेके लेने शुरू कर दिए थे। प्रशासक काल में तो ये और भी ज्यादा बाढ़ आ गई थी।
सिरोही में ये चर्चा आम है कि सभापति और पालिकाध्यक्ष की दौड में शामिल अधिकांश प्रत्याशियों का मूल उद्देश्य नगर पालिका के ठेकों में हिस्सेदारी बढाना भी है। इसे लेकर सिरोही में एक नेता के लिए ये एक मजाक बहुत प्रसिद्ध हो चुका है कि उन्होंने अपनी लाॅबिंग से सभापति पद पर काबिज होकर आठ बीघा के परिसर में आठ हजार स्क्वायर फीट का मकान, उसमें फिंगर प्रिंट और आई रेटिना से खुलने वाले दरवाजे और न जाने क्या क्या ख्वाब देख डाले हैं।
– पहले भी था ये नियम
राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 के अध्याय 2 की धारा 24 में सदस्यों डिस क्वालीफाई होने के नियम दिए गए हैं। सिरके उपनियम 15 में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि कोई आवेदक आवेदित नगर पालिका के द्वारा जारी किसी कार्य में कुछ आपूर्ति करता है या संबंधित नगर पालिका की किसी संविदा में खुद, या उसके परिवार के किसी सदस्य या उसके भागीदार, नियोजक या कर्मचारी के। माध्यम से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कोई हिस्सा या हित रखता है तो ऐसा व्यक्ति नगर पालिका के पार्षद पद के लिए अयोग्य होगा। सूत्रों की मानें तो सिरोही और शिवगंज में भाजपा के उन संभावित प्रत्याशियों की सूचियां तैयार कर ली गई हैं जिन्होंने खुद या खुदके रिश्तेदारों के नाम से नगर पालिका में ठेके लिए हैं। इस प्रमुख आधार पर निर्वाचन आयोग की वेबसाइट में शामिल नामों में से कई नामों के खिलाफ आपत्तियां दर्ज किए जाने की संभावनाएं हैं। लेकिन, ये स्थिति सिर्फ भाजपा की हो ऐसा नहीं है। पूरे जिले में हर नगर पालिका में ऐसे भाजपा के अलावा कांग्रेस और निर्दलीय आवेदकों की संख्या काफी है जो सीधे तौर पर खुद या अपने परिवार या भागीदार फर्मों के साथ संबंधित स्थानीय निकाय में ठेके लेने में शामिल हैं।


