अगरतला। त्रिपुरा के खोवाई जिले के रामचंद्रघाट इलाके में भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के नेता रूपक घोष के घर पर हुए कथित हमले के बाद क्षेत्र में राजनीतिक तौर पर माहौल अशांत हो गया है।
रूपक घोष और उनकी बुजुर्ग मां मीना घोष, गुरुवार को हुई इस घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए। रूपक घोष का इलाज फिलहाल अगरतला सरकारी मेडिकल कॉलेज में चल रहा है, जबकि उनकी मां को खोवाई अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
त्रिपुरा में इस हमले के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा ने सरकार में अपनी सहयोगी पार्टी ‘टीआईपीआरए मोथा’ के समर्थकों पर इस हिंसा का आरोप लगाया है। हालांकि, मोथा पार्टी के विधायक रंजीत देबबर्मा ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है और इसे अपनी पार्टी को बदनाम करने की साजिश बताया है।
भाजपा सूत्रों के मुताबिक कुछ अराजक तत्वों ने रामचंद्रघाट में श्री रूपक घोष के घर को निशाना बनाया, जिससे वहां काफी मारपीट हुई। पुलिस मामले की जांच कर रही है और घटना की सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है।
भाजपा ने खोवाई थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। पार्टी के स्थानीय नेता मनोज देब ने आरोप लगाया कि यह हमला आठ मार्च को होने वाली भाजपा की मोटरसाइकिल रैली को रोकने के लिए किया गया है। इस रैली की घोषणा मंत्री बिकास देबबर्मा ने पहले ही कर दी थी और इसमें भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव भट्टाचार्य ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और पुलिस मामले की जांच कर न्याय सुनिश्चित करेगी।
इस बीच मोथा विधायक रंजीत देबबर्मा ने हिंसा की निंदा तो की, लेकिन भाजपा के आरोपों को गलत बताया। उन्होंने दावा किया कि श्री रूपक घोष के घर पर होली के जश्न के दौरान विवाद हुआ था, जहां स्थानीय आदिवासी युवाओं को बुलाया गया था।
उनके मुताबिक, कुछ युवाओं के खिलाफ जातिसूचक और अपमानजनक टिप्पणी किए जाने के बाद झगड़ा बढ़ गया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि इस घटना में शामिल लोगों को टीआईपीआरए मोथा का समर्थक कैसे बताया जा रहा है, जबकि वहां पार्टी का कोई झंडा या निशान नहीं था। विधायक ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। शांति बनाए रखने के लिए इलाके में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।



