नई दिल्ली/चेन्नई। भारतीय जनता पार्टी की तमिलनाडु इकाई के पूर्व अध्यक्ष के अन्नामलाई ने पिछले कई दिनों से चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। शुक्रवार को पार्टी आलाकमान ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही पार्टी से उनका छह साल पुराना नाता खत्म हो गया है।
दो दिन पहले अन्नामलाई ने नई दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंपा था। गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से राष्ट्रीय नेतृत्व उन्हें लगातार दरकिनार कर रहा था। उन्होंने विस्तृत पत्र भी सौंपा। इसमें उन्होंने पार्टी छोड़ने के कारणों और हालिया विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार की वजहों, गठबंधन की रणनीति और अन्य कारकों का उल्लेख किया है।
इन कारणों से पार्टी का वोट शेयर 2024 के लोकसभा चुनावों में हासिल किए गए 11.1 प्रतिशत (जब पहली बार पार्टी ने दहाई का आंकड़ा छुआ था) से नीचे गिर गया। इसके बाद, उन्होंने भाजपा के चुनावी रणनीतिकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की और विस्तार से अपनी बात रखी। साथ ही उन्होंने यह साफ कर दिया कि वह पार्टी छोड़ने के अपने फैसले पर अडिग हैं।
राष्ट्रीय नेतृत्व के उन्हें मनाने के प्रयास रंग नहीं लाए और आखिरकार भाजपा ने शुक्रवार को उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया। भाजपा के संक्षिप्त बयान में कहा गया है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष के अन्नामलाई का पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। अब जबकि पूर्व आईपीएस अधिकारी औपचारिक रूप से भाजपा से बाहर हो चुके हैं, उम्मीद है कि जल्द ही अपने अगले राजनीतिक कदम की रूपरेखा साझा करेंगे।
इस बातचीत पर उनके समर्थकों की पैनी नजर रहेगी, जो उनसे राज्य का नेतृत्व करने के लिए आगे आने का आह्वान कर रहे हैं। उनके समर्थकों ने उनके गृहनगर कोयंबटूर और चेन्नई में उनके समर्थन में पोस्टर भी लगाये हैं, जिनमें उन्हें ‘अगली ताकत’ के रूप में पेश किया गया है। अभी यह साफ नहीं है कि वह किसी नये राजनीतिक दल की घोषणा करेंगे या इस दिशा में कदम उठाने के रूप में किसी आंदोलन की शुरुआत करेंगे।
अन्नामलाई 2020 में भाजपा में शामिल हुए थे और उन्हें तमिलनाडु इकाई का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था। इसके बाद 2021 में उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया और वह 2025 तक इस पद पर रहे। फिर कथित तौर पर अन्नाद्रमुक के इशारे पर उन्हें अचानक पद से हटा दिया गया। बाद में अन्नाद्रमुक के साथ भाजपा ने चुनावी गठबंधन भी किया था। अन्नामलाई की जगह अन्नाद्रमुक के पूर्व मंत्री नैनार नागेंद्रन को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था।उनके कार्यकाल के दौरान, राज्य और राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर भाजपा की मौजूदगी काफी मजबूत और मुखर होकर सामने आई थी।
करूर जिले की अरवाकुरिची सीट से 2021 का विधानसभा चुनाव हारने के बाद उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी का नेतृत्व किया। हालांकि, इन चुनावों में भी उन्हें कोयंबटूर संसदीय सीट से हार का सामना करना पड़ा, जहां उनका अच्छा-खासा जनाधार है।



