फर्जी मतदान, हिंसा और गड़बड़ियों ने उत्तरी बंगाल के चुनावों को दागदार बनाया

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सिलीगुड़ी। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के दौरान उत्तर बंगाल के कई हिस्सों में फर्जी मतदान, हिंसा और गड़बड़ियों की रिपोर्टें सामने आई हैं, जिसने मतदान प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कूचबिहार, मालदा, उत्तर दिनाजपुर और दार्जिलिंग जैसे क्षेत्रों में मतदान के दौरान हिंसा और मतदाताओं को डराने-धमकाने की भी घटनाएं दर्ज हुई हैं।

चुनाव आयोग द्वारा की गई व्यवस्थाओं, जिसमें केंद्रीय बलों की तैनाती और सीसीटीवी निगरानी के बावजूद फर्जी वोटिंग, हिंसा, मतदाताओं को वोट देने से रोकने और तकनीकी गड़बड़ियों के आरोपों ने जमीनी स्तर पर कहीं अधिक जटिल तस्वीर पेश की। कई निर्वाचन क्षेत्रों में फर्जी वोटिंग की घटनाओं को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आईं हैं।

सिलीगुड़ी में बूथ नंबर 235 के तहत एक मतदान केंद्र पर पहली बार वोट देने आई एक महिला मतदाता को लंबी कतार में खड़े रहने के बाद पता चला कि उसका वोट पहले ही डाला जा चुका है। इसी इलाके में एक अन्य युवा मतदाता ने भी इसी तरह की शिकायत की। सिलीगुड़ी से ऐसी तीन घटनाएं सामने आईं, जहां असली मतदाताओं ने पाया कि किसी और ने उनके नाम पर वोट डाल दिया था।

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उम्मीदवार गौतम देब ने इस पर आपत्ति जताई और इन मामलों में ‘टेंडर्ड वोट’ (विशेष वोट) डालने की व्यवस्था की। फांसीदेवा से भी इसी तरह की एक शिकायत आई है जहां एक मतदाता ने आरोप लगाया कि उसके बूथ पर पहुंचने से पहले ही उसका वोट किसी और ने डाल दिया था।

मालदा जिले में पोस्टल बैलेट (डाक मतपत्र) के दुरुपयोग के कई मामले सामने आए। हबीबपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत बुलबुलचंडी में बूथ नंबर 231 पर एक बुजुर्ग मतदाता प्रकाश प्रसाद को बताया गया कि उनके नाम पर पहले ही एक पोस्टल बैलेट जारी किया जा चुका है और उसका इस्तेमाल भी हो चुका है, जिससे उन्हें वोट डालने से रोक दिया गया। उन्होंने इस बात पर गंभीर सवाल उठाए कि बैलेट कैसे जारी हुआ और वोट किसने डाला।

गजोल (बूथ नंबर 229) के अंतर्गत नयापारा से सामने आए एक अन्य मामले में रिक्ता मंडल यह जानकर हैरान रह गईं कि उनका वोट पोस्टल बैलेट के जरिए डाला जा चुका है, जिससे उन्हें मतदान केंद्र पर वोट डालने के अधिकार से वंचित कर दिया गया। कई इलाकों से हिंसा और डराने-धमकाने की घटनाएं भी सामने आईं, जिससे मतदाताओं की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गईं।

कुमारगंज (दक्षिण दिनाजपुर) में भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु सरकार पर पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में सत्ताधारी टीएमसी के समर्थकों द्वारा हमला किया गया। सिताई में भाजपा के एक पोलिंग एजेंट को चाकू मारने के आरोपों से इलाके में तनाव फैल गया।

मालदा की चंचल विधानसभा सीट पर एक और हमले की खबर आई, जहां धूम सदागी पानपारा इलाके में बूथ नंबर 221 पर भाजपा के एक चुनाव एजेंट पर हमला किया गया। उनका इलाज अभी चंचल सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में चल रहा है। भाजपा नेताओं ने इसके लिए तृणमूल समर्थकों को दोषी ठहराया, हालांकि सत्ताधारी पार्टी ने इन आरोपों से इनकार किया है।

माथाभंगा में भारतीय जनता पार्टी उम्मीदवार निशीथ प्रोमाणिक से जुड़े पोलिंग बूथों के पास तनाव बढ़ गया। आरोप लगे कि वोटरों के बीच पैसे बांटे जा रहे थे, जिसका भाजपा ने खंडन किया। दोनों खेमों के समर्थकों के बीच तीखी बहस के कारण घोक्साडांगा एक तनावपूर्ण इलाका बन गया, जहां जय बांग्ला और जय श्री राम जैसे विरोधी नारे गूंज रहे थे।

विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान नाम हटाए जाने की वजह से बड़ी संख्या में वोटरों के वोट न डाल पाने के कारण मालदा के सुजापुर के कई इलाकों में विरोध-प्रदर्शन हुए। मालतीपुर विधानसभा सीट के तहत खानपुर (बूथ नंबर 117) में जिन वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से गायब थे, उन्होंने गांव की सड़कों पर प्रदर्शन किया। सुजापुर में भी कुछ ऐसी ही स्थिति देखने को मिली।

तृणमूल की उम्मीदवार सबीना यास्मीन ने भाजपा और चुनाव आयोग की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में वोटरों को उनके मताधिकार से वंचित किया गया है। बहरामपुर में कांग्रेस उम्मीदवार अधीर रंजन चौधरी ने आरोप लगाया कि एक ही बूथ पर ईवीएम में कई बार खराबी आई, जिससे मतदान में देरी हुई और मतदाताओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

मालदा के मोथाबाड़ी में ईवीएम में आई खराबी के कारण मतदाताओं के बीच अशांति और विरोध-प्रदर्शन देखने को मिला। मतदान के दिन स्वास्थ्य से जुड़ी कई आपातकालीन स्थितियां भी देखने को मिलीं। अकांडा (गाजोल) में बूथ नंबर 137 पर एक मतदान अधिकारी जयश्री कर्माकर अत्यधिक गर्मी के कारण बीमार पड़ गईं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।

मालतीपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत क्षेमपुर पंचायत में बूथ नंबर 152 पर वोट डालते समय दिल का दौरा पड़ने से 50 वर्षीय महिला मतदाता प्रोमिला बागदी की मृत्यु हो गई। इस घटना से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।