बॉम्बे हाई कोर्ट ने गढ़चिरौली दुष्कर्म-हत्या मामले में मौत की सजा को उम्रकैद में बदला

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नागपुर। महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में महिला से दुष्कर्म और उसके तीन वर्षीय बेटे की हत्या के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने दोषी संजू विश्वनाथ सरकार की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया है। अदालत ने माना कि अपराध बेहद गंभीर है, लेकिन मृत्युदंड देने के लिए निर्धारित कानूनी कसौटी के अनुसार यह मामला ‘दुर्लभतम में दुर्लभ’ श्रेणी में नहीं आता।

न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी-फाल्के और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की खंडपीठ ने 28 अक्टूबर को यह फैसला सुनाया। अहेरी की अतिरिक्त सत्र अदालत ने 24 दिसंबर 2025 को संजू सरकार को बच्चे की हत्या के मामले में मृत्युदंड दिया था। हाई कोर्ट ने मृत्युदंड को उम्रकैद में बदलते हुए अन्य अपराधों में सुनाई गई सजाओं को बरकरार रखा।

2017 में हुई थी वारदात

यह मामला 19 जून 2017 की रात गढ़चिरौली जिले की मुलचेरा तहसील के कंचनपुर गांव का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना के समय महिला का पति काम के सिलसिले में बाहर गया हुआ था और वह अपने तीन वर्षीय बेटे के साथ घर पर थी। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाला संजू सरकार घर में घुसा और महिला के साथ दुष्कर्म किया।

मामले के अभियोजन विवरण के मुताबिक, घटना के दौरान बच्चा जाग गया और रोने लगा। आरोपी ने उसे चुप कराने के लिए उसका मुंह दबाया, जिससे उसकी मौत हो गई। बच्चे को बचाने की कोशिश करने वाली महिला पर भी हमला किया गया। महिला गंभीर रूप से घायल हुई, लेकिन उसकी जान बच गई। अगले दिन घटना का पता चलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और आरोपी को गिरफ्तार किया।

निचली अदालत ने सुनाई थी फांसी

अहेरी की अतिरिक्त सत्र अदालत ने सुनवाई के बाद संजू सरकार को हत्या के लिए मृत्युदंड सुनाया था। दुष्कर्म और महिला की हत्या के प्रयास सहित अन्य अपराधों में भी उसे सजा दी गई थी। मृत्युदंड की पुष्टि के लिए मामला हाई कोर्ट पहुंचा, जबकि दोषी ने भी फैसले को चुनौती दी थी।

हाई कोर्ट ने हत्या के मामले में मृत्युदंड के स्थान पर आजीवन कारावास और 5,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास व 2,000 रुपये जुर्माना, हत्या के प्रयास के मामले में 10 वर्ष के कठोर कारावास व 2,000 रुपये जुर्माना तथा घर में अवैध प्रवेश के मामले में 10 वर्ष के कठोर कारावास व 1,000 रुपये जुर्माने की सजा बरकरार रखी गई।

अदालत के फैसले से दोषी को मृत्युदंड के बजाय उम्रकैद भुगतनी होगी। हालांकि, दुष्कर्म, बच्चे की हत्या और महिला पर हमले से जुड़े अपराधों में उसकी दोषसिद्धि तथा अन्य सजाएं बरकरार हैं।