मंत्रिमंडल ने मोदी के प्रधामंत्री पद पर सर्वाधिक अवधि तक सेवा देने के रिकॉर्ड को बताया ऐतिहासिक, विशेष प्रस्ताव पारित

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नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में सर्वाधिक अवधि तक निरंतर सेवा देने के ऐतिहासिक अवसर पर बुधवार को विशेष प्रस्ताव पारित किया।

सूचना प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यहां मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रीमंडल की बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इस आशय के एक प्रस्ताव में कहा है गया कि आज 10 जून 2026 को भारतीय लोकतंत्र की यात्रा में एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायी पड़ाव के रूप में अंकित हुआ है, जब नरेंद्र मोदी निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में सर्वाधिक अवधि तक निरंतर देश की सेवा करने वाले प्रधानमंत्री बन गए हैं। उन्होंने निर्वाचित प्रधानमंत्री के तौर पर 4,399 दिनों की निरंतर सेवा का कीर्तिमान स्थापित किया है, जो स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार हुआ है। इससे पूर्व जवाहरलाल नेहरू ने 1952 से 1964 तक 4,398 दिन तक इस पद को सुशोभित किया था।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मंत्रिमंडल की बैठक में प्रस्ताव पारित होने के बाद प्रधानमंत्री ने मंत्रिमंपरिषद के सहयोगियों से कहा कि सेवा की भावना जन आकांक्षाओं को समझकर उस पर काम करें। नागरिकों की सेवा पूरे उत्साह से करें और जमीन से जुड़कर तथा जमीनी हकीकत के अनुसार सेवा करें और सेवा भावना को बनाएं।

उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल ने इस अवसर पर प्रधानमंत्री को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं अर्पित कीं। प्रस्ताव में कहा गया है कि यह अवसर भारत की लोकतांत्रिक चेतना, जनविश्वास और जनभागीदारी की शक्ति का प्रतीक है। जब कोई जनप्रतिनिधि राष्ट्र प्रथम के संकल्प के साथ कार्य करता है, सत्य, निष्ठा, परिश्रम, ईमानदारी और जीवन की शुचिता को अपना मार्गदर्शक बनाता है और निरंतर जनता की सेवा में समर्पित रहता है, तब जनता-जनार्दन उसे अभूतपूर्व समर्थन के रूप में आशीर्वाद प्रदान करती है।

प्रस्ताव में आगे कहा गया है कि 10 जून 2026 की यह ऐतिहासिक उपलब्धि कुछ और बड़े पड़ावों के साथ आई है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में एनडीए सरकार के भी 12 वर्ष पूर्ण हुए हैं। हेड ऑफ द गवर्नमेंट के रूप में प्रधानमंत्री 25 वर्ष से निरंतर सेवा का भी ऐतिहासिक पड़ाव पार करने वाले हैं।

वैष्णव ने कहा कि यह भी उल्लेखनीय है कि छह दशक बाद देश ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार एनडीए सरकार को जनादेश दिया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि नेतृत्व ऐसे कुशल हाथों में है जिनके पास संवेदनशीलता, संयम, नीयत और निर्णायक क्षमता है। प्रधानमंत्री का जीवन सेवा, साहस और राष्ट्र निर्माण की सतत साधना का प्रतीक बताया गया।

संगठन कार्यकर्ता और मुख्यमंत्री के रूप में उनके अनुभव से नीतियां अधिक संवेदनशील, व्यावहारिक और परिणामकारी बनीं। वर्ष 2014 में शपथ के समय प्रधानमंत्री द्वारा स्वयं को प्रधान सेवक बताने तथा संविधान को पवित्र ग्रंथ मानने का उल्लेख किया गया। सबका साथ, सबका विकास को सरकार का ध्येय बताते हुए बीते 12 वर्षों की नीतियों को इसी संकल्प की अभिव्यक्ति कहा गया।

केंद्रीय मंत्री के अनुसार प्रस्ताव में गरीब कल्याण पर बल देते हुए कहा गया कि पहली बार बड़े स्तर पर पक्के घर, बिजली, गैस कनेक्शन, शौचालय और पेयजल जैसी सुविधाएं पहुंचीं। करोड़ों जन-धन खाते खुले और सरकारी सहायता सीधे लाभार्थियों तक पहुंची, 80 करोड़ से अधिक नागरिकों को मुफ्त राशन और 60 करोड़ से अधिक लोगों को पांच लाख रुपए तक मुफ्त इलाज की सुविधा मिली। इसके परिणामस्वरूप 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी से बाहर आए।

युवा शक्ति को सबसे बड़ी पूंजी बताते हुए कौशल विकास, स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इकॉनमी, खेल, उद्यमिता और फिटनेस को बढ़ावा देने का उल्लेख किया गया। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बना। विमेन लेड डवलपमेंट के तहत महिलाओं को केंद्र में रखते हुए शौचालय, धुआं मुक्त रसोई, गर्भवती सहायता, मुद्रा योजना, पीएम आवास में महिला स्वामित्व और लखपति दीदी अभियान का उल्लेख किया गया। संसद एवं विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण को भी महत्वपूर्ण बताया गया।

किसानों को लेकर पीएम किसान सम्मान निधि, सिंचाई परियोजनाएं, MSP वृद्धि, सरकारी खरीद, पशुपालकों और मछुआरों को किसान क्रेडिट कार्ड जैसी सुविधाओं का विस्तार बताया गया। कृषि निर्यात 5 लाख करोड़ रुपए पार करने का उल्लेख किया गया।

वैष्णव ने कहा कि प्रस्ताव में राष्ट्र प्रथम के भाव से लिए गए निर्णयों में अनुच्छेद 370 का निरस्तीकरण, जीएसटी, ओआरओपी, सीडीएस गठन, तीन तलाक कानून, एनिमी प्रॉपर्टी एक्ट, सीएए, भारतीय न्याय संहिता, श्रम कानून सुधार और वक्फ संशोधन जैसे कदम शामिल बताए गए है। राष्ट्रीय सुरक्षा में सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए सीमापार आतंकवाद पर कठोर कार्रवाई का जिक्र किया गया। सिंधु जल समझौते को निलंबित करने का भी उल्लेख किया गया। नक्सलवाद में कमी, उत्तर-पूर्व में शांति समझौते और बांग्लादेश सीमा विवाद समाधान का भी उल्लेख किया गया।

उन्होंने कहा कि प्रस्ताव में आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया के तहत रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, फार्मा, सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी, स्पेस और एआई क्षेत्र में प्रगति का उल्लेख करने के साथ ही वैश्विक भूमिका में जी-20 अध्यक्षता, योग दिवस की वैश्विक मान्यता, अंतरराष्ट्रीय सोलर अलायंस, सीडीआरआई और ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस का उल्लेख है।

जलवायु और पर्यावरण के क्षेत्र में मिशन लाइफ, कैच द रेन, अमृत सरोवर और एक पेड़ मां के नाम जैसी योजनाओं को जनभागीदारी आधारित बताया गया। विकास और विरासत को साथ लेकर चलने की नीति के तहत नया संसद भवन, कर्तव्य पथ और अन्य परियोजनाओं को नए भारत के प्रतीक बताया गया। स्वच्छ भारत, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसे अभियानों में जनभागीदारी को परिवर्तन का आधार बताया गया। प्रस्ताव में कहा गया कि राजनीतिक स्थिरता ने भारत के विकास को गति दी है और देश दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना है।

वैष्णव ने कहा कि प्रस्ताव के अंत में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री के उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की कामना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ता रहेगा।