चंद्रयान-3 बढ़ा चांद की ओर, उठाएगा रहस्यों का पट

श्री हरिकोटा (आंध्रप्रदेश)। चांद पर रहस्यों के घूंघट को हटाने के भारत के प्रयास के तहत भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने शुक्रवार को अपना नया उपग्रह चंद्रयान-3 धरती के उस कक्षा में पहुंचाने की बड़ी सफलता हासिल कर ली, जहां से इस यान ने खोजी उपकरणों के साथ चंद्रमा की ओर अपनी यात्रा शुरू कर दी है।

चंद्रमा पर खोजी यंत्र उतारने के प्रयास में सफल होने पर भारत अमरीका, रूस और चीन के बाद इस तरह की उपलब्धि हासिल करने वाला चौथा देश होगा। इसरो के रॉकेट से चंद्रयान-3 को धरती से ऊपर 179 किलोमीटर ऊंची कक्षा में छोड़ा गया। इस पर लगे लैंडर और रोवर को (चांद की सतह पर उतरने वाले यंत्र और उसमें से निकल कर सतह पर चलकर उसका निरीक्षण करने वाली मशीन) तीन लाख किलोमीटर की यात्रा कर 23-24 अगस्त के बीच चांद पर उतारे जाने की संभावना है।

इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने चंद्रयान-3 को धरती की अंतरणकारी कक्षा में स्थापित करने के अभियान की सफलता की घोषणा की। इस अंडाकार भू-अंतरणकारी कक्षा में चक्कर लगाते हुए यह यान धरती से 170 किलोमीटर से लेकर 36500 किलोमीटर की दूरी पर परिक्रमा करते हुए चांद की कक्षा में प्रवेश करेगा और क्रमश: उसकी निकटवर्ती कक्षाओं की ओर बढ़ेगा। सोमनाथ यह घोषणा करते हुए इतने आह्लादित थे कि उन्हें शब्द नहीं सूझ रहे थे। उन्होंने बस इतना कहा कि मैं मिशन के सभी अधिकारियों को इस सफलता के लिए धन्यवाद करता हूं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्र सरकार के कई मंत्रियों ने इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसरो के वैज्ञानिकों और तकनीशियनों को बधाई दी है। राष्ट्रपति ने चंद्रयान-3 के सफल प्रक्षेपण को अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में एक और उपलब्धि बताया है। उन्होंने इस अभियान में लगी इसरो की टीम और इस काम में निरन्तर लगे सभी लोगों को बधाई दी है और कहा है कि यह अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रगति करने की देश की अडिग प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मोदी ने कहा कि चंद्रयान-3 ने भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक नया अध्याय जोड़ा है। उन्होंने कहा कि यह सफलता हर भारतवासी के सपनों और आकांक्षाओं को नयी ऊंचाइयों पर ले जाने वाली है। यह ऐतिहासिक उपलब्धि हमारे वैज्ञानिकों के अनथक समर्पण की कथा है। उन्होंने कहा कि मैं उनके उत्साह और उनकी प्रतिभा को प्रणाम करता हूं।

प्रक्षेपण के समय इसरो की टीम के अलावा केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ जितेन्द्र सिंह भी सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र में मौजूद थे। उन्होंने इसे भारत के लिए गौरव का क्षण बताया और इसके लिए इसरो की टीम को धन्यवाद दिया।

श्री हरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र पर इसरो के सबसे बड़े और 642 टन भार के साथ 43.5 मीटर लंबे एलवीएम-3 रॉकेट ने कल से शुरू हुई उल्टी गिनती पूरी होते ही अपराह्न दो बजकर 35 मिनट 17 सेकंड पर प्रक्षेपण स्थल पर धुएं के बादल को छोड़ता हुआ पूर्ण संतुलन के साथ अंतरिक्ष की ओर उड़ान भरी। इस पर करीब 3900 किलोग्राम का चंद्रयान-3 अपने सभी माड्यूल के साथ मिशन पर रवाना किया गया।

इसरो अध्यक्ष ने पहले कहा था कि यदि 23 या 24 अगस्त को योजना के अनुसार चन्द्रयान की लैंडिंग नहीं होती है, तो इसरो सितंबर में लैंडिंग का प्रयास करने के लिए एक और महीने तक इंतजार करेगा। इससे पहले चंद्रयान-2 का लैंडर चांद की सतह पर उतरते हुए नियंत्रण से बाहर होकर क्षतिग्रस्त हो गया था। ऐसी स्थिति से बचने के लिए चंद्रयान-3 में अनेक महत्वपूर्ण सुधार किये गये हैं और इसकी डिजाइन में सावधानियां बरती गई हैं।

चंद्रयान-3: इसरो परिवार की 73 दिनों की तपस्या का फल मिला

वरिष्ठ वैज्ञानिक और भारत के तीसरे चंद्रमा खोजी मिशन चंद्रयान-3 के मिशन निदेशक एस.मोहन कुमार ने शुक्रवार को सटीक कक्षा में अंतरिक्ष यान का सफल प्रक्षेपण को इसरो परिवार की 73 दिनों की तपस्या का इनाम बताया है।

इसरो के सबसे भारी और हेवी लिफ्ट रॉकेट एलवीएम3-एम4 द्वारा दूसरे लॉन्च पैड से शानदार उड़ान भरने के बाद अंतरिक्ष यान को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित करके चंद्रमा की ओर चंद्रयान -3 की 42-दिवसीय यात्रा शुरू करने के बाद मिशन नियंत्रण केंद्र में अपने संबोधन में कुमार ने कहा कि यह इसरो परिवार के लिए 73 दिन की तपस्या फल है।

उन्होंने कहा कि अंततः इसे सटीक कक्षा में अंतरिक्ष यान के सफल प्रक्षेपण से पुरस्कृत किया गया है। विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के निदेशक एस.उन्नीकृष्णन ने कहा कि यह एलवीएम3 रॉकेट का सातवां सफल मिशन है। एलवीएम3 को इसरो का ‘फैट बॉय’ प्रक्षेपण वाहन कहा जाता है।

उन्होंने कहा कि रॉकेट को पहले मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन गगनयान के लिए आदर्श वाहन बनाने के लिए इसमें कई बदलाव किए गए हैं। कई वैज्ञानिकों ने कहा कि ‘फैट बॉय’ ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि यह भविष्य के प्रक्षेपण मिशनों के लिए सबसे भरोसेमंद भारी वाहन है।