आबूरोड जैसे ही सिरोही के प्रकरण में दस लोगों के खिलाफ चार्जशीट पेश 

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सिरोही नगर पालिका में नियम विरुद्ध नौकरी देने के मामले में एसीबी ने दर्ज की एफआईआर।

सबगुरु न्यूज-सिरोही। जून के महीने में आबूरोड में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल हुई थी। इस हड़ताल में के दौरान फर्जी नियुक्ति का मामला भी उठा था। इसी तरह का एक मामला 12 साल पहले सिरोही नगर पालिका में हुआ था। इस प्रकरण का खुलासा होने पर कांग्रेस नेता संयम लोढ़ा जोरशोर से उठाया था। विधानसभा में भी ये प्रकरण छाया था। ये प्रकरण एसीबी में भी दर्ज हुआ था। इसमें अब एसीबी ने तत्कालीन आयुक्त समेत दस आरोपितो के खिलाफ शनिवार को चार्जशीट पेश की है।

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो जालोर के एएसपी मांगीलाल राठौङ ने बताया कि वर्ष 2014 मे नगर परिषद सिरोही के तत्कालीन आयुक्त लालसिंह राणावत ने स्वायत्त शासन विभाग द्वारा जारी निर्देशों/नियमों के विरुद्ध नगर परिषद सिरोही मे विभिन्न पदों यथा वाहन चालक, जेसीबी ऑपरेटर, बागवान, सफाई निरीक्षक इत्यादि पर के पदों पर नियुक्ति दे दी थी। नियम विरुद गलत तरीके से नियुक्ति देकर पद का दुरुपयोग करते हुए राजकोष को अनुचित आर्थिक हानि पहूंचाने उस समय एसीबी ने प्राथमिक जांच के बाद सत्यापन पर प्रकरण दर्ज किया था।

इस एफआईआर पर विस्तृत जांच करने पर आरोप प्रमाणित पाए गए। इस मामले में अब चार्जशीट पेश की गई। जिसमें सेवा निवृत हो चुके तत्कालीन आयुक्त लालसिंह राणावत की समेत दिनेश कुमार, जयन्तीलाल, लादाराम, जवानाराम, प्रवीण कुमार दूलानी, ईश्वरलाल, भलाराम, भंवरसिंह तथा श्रीमति शारदा के विरुद्ध पाली में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मामलात के विशिष्ट न्यायालय में चार्जशीट पेश की गई।

– आबूरोड में भी इसी तरह के प्रकरण का आरोप

आबूरोड नगरपालिका में भी इसी तरह के प्रकरण का आरोप तत्कालीन अधिशासी अधिकारी और नगर पालिका अध्यक्ष पर लगे हैं। यहां पर कांग्रेस ने पिंडवाड़ा के एक व्यक्ति को नगर पालिका के वर्तमान बोर्ड के डिजॉल्व होने से पहले पिंडवाड़ा निवासी संविदा कार्मिक को सितंबर 2025 में नियम विरुद्ध स्थाई करने का आरोप लगाया है। इस प्रकरण में ये भी आरोप लगाया गया है कि अनियमित रूप से नियुक्त इस कार्मिक को प्रशासक की नियुक्ति की बाद भी ट्रेजरी से भुगतान की प्रक्रिया भी अपनाई गई।

इस प्रकरण में आरटीआई में पत्रावली में मांगने पर ये जवाब मिला कि ये पत्रावली नगर पालिका के किसी भी सेक्शन में नहीं है। लेकिन, जैसा कि कांग्रेस आरोप लग रही है कि इस कार्मिक की तनख्वाह का भुगतान भी ट्रेजरी से हुआ है तो ट्रेजरी से हुए भुगतान के दस्तावेज भी इस आरोप की वास्तविकता को उजागर कर सकते हैं।

दरअसल, पिछले करीब पांच छह सालों से नगर पालिकाओं में एक पैटर्न देखने को मिला है। वो ये कि जब भी इन नगरपालिकाओं में आयुक्त या अधिशाषी अधिकारी की नियुक्ति की जाती है तो वो अपने साथ एक कार्मिक और ठेकेदारों की फौज भी लेकर आता है। फिर ये ही टीम मिलकर नगर निकायों में सारे टेंडर्स और अन्य कामों में एकाधिकार कर लेते हैं। आबूरोड में भी जिस कार्मिक की नियुक्ति के आरोप लग रहे हैं वो भी अधिशाषी अधिकारी के इसी तरह के पैटर्न का हिस्सा बताया जाता है।