छत्तीसगढ़ के जशपुर में 13 साल की बच्ची से 9 लोगों ने किया गैंगरेप

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जशपुर। छत्तीसगढ़ जशपुर जिले के नारायणपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत एक 13 वर्षीय नाबालिग बालिका के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले में पुलिस ने 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

यह घटना 17 फरवरी की शाम की बताई जा रही है, जिसका खुलासा दो दिन बाद पीड़िता द्वारा की गई शिकायत के आधार पर हुआ। मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक द्वारा गठित विशेष टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सूचना मिलने के कुछ ही घंटों के भीतर सभी आरोपियों को हिरासत में ले लिया।

पुलिस ने शनिवार को बताया कि 17 फरवरी की शाम को पीड़ित 13 वर्षीय बालिका अपनी 35 वर्षीय चाची (बुआ) के साथ नारायणपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में रिश्तेदारी से अपने गृह ग्राम लौट रही थी। रास्ते में एक चौक के पास पहले से मौजूद 9 युवकों ने दोनों महिलाओं को रोक लिया और उनके साथ अभद्रता एवं छेड़छाड़ शुरू कर दी। अचानक हुए इस हमले से भयभीत होकर पीड़िता की चाची किसी तरह वहां से भाग निकलीं और घर पहुंचकर परिजनों को घटना की जानकारी दी।

सूचना मिलने पर पीड़िता के परिजन तत्काल घटनास्थल की ओर दौड़े। परिजनों को आता देख आरोपी वहां से फरार हो गए। हालांकि, इस दौरान आरोपी पीड़ित नाबालिग बालिका को भी कुछ दूरी पर ले गए थे। परिजनों ने जब पीड़िता को खोजा तो वह घटनास्थल से कुछ दूरी पर मिली। शाम के अंधेरे और हड़बड़ी में परिवार वाले वहीं से बालिका को लेकर घर लौट आए।

दो दिन बाद 19 फरवरी को जब पीड़िता ने अपनी तबीयत खराब होने की बात कही, तो परिजनों ने उससे घटना के संबंध में विस्तार से पूछा। तब पीड़िता ने बताया कि छेड़छाड़ की घटना के दौरान एक आरोपी ने उसे जबरन खेत की ओर ले जाकर, मना करने के बावजूद जमीन पर पटक दिया और उसके साथ दुष्कर्म किया। उसने यह भी बताया कि उक्त घटना के समय अन्य आरोपी वहीं आस-पास खड़े थे और घटना को अंजाम दे रहे थे।

इस बीच, गांव में घटना की भनक लगने पर आरोपियों ने पीड़िता के परिजनों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। आरोप है कि उन्होंने परिजनों को रुपयों का लालच देकर मामला दबाने का प्रयास किया और पुलिस में शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी भी दी। हालांकि, परिजनों ने हिम्मत दिखाते हुए 20 फरवरी को नारायणपुर थाने में इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई।

प्रार्थी की रिपोर्ट पर पुलिस ने तत्काल भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं 137(2), 87, 96, 64, 65(1), 70(1), 70(2), 127(2), 351(2) के साथ ही पॉक्सो एक्ट की धारा 5 और 6 के तहत मामला दर्ज कर लिया। पीड़िता को तत्काल मेडिकल जांच के लिए भेजा गया। मामला नाबालिग बालिका के साथ दुष्कर्म का होने के कारण पुलिस अधीक्षक ने इसकी गंभीरता को देखते हुए आरोपियों की धर-पकड़ के लिए चार विशेष टीमों का गठन किया।

टीमों ने तकनीकी और मुखबिर तंत्र की मदद से सभी 9 आरोपियों की लोकेशन का पता लगाया। घटना के बाद से फरार चल रहे इन आरोपियों को अलग-अलग स्थानों से दबोच लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों में मुख्य आरोपी 23 वर्षीय नीरज लकड़ा, 28 वर्षीय समीर मिंज, 40 वर्षीय तेलेस्फोर मिंज, 38 वर्षीय आनंद मिंज, 29 वर्षीय रितेश कुमार टोप्पो, 30 वर्षीय सुनीत तिर्की, 25 वर्षीय अविनाश तिर्की और 24 वर्षीय सत्या मिंज शामिल हैं। इसके अलावा एक 17 वर्षीय बालक को भी हिरासत में लिया गया है, जो विधि से संघर्षरत बालक की श्रेणी में आता है।

पुलिस पूछताछ में सभी आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। बालिग आरोपियों को गिरफ्तार कर आज (21 फरवरी) को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है, जबकि नाबालिग आरोपी को बाल संप्रेषण गृह भेजा जा रहा है।

इस पूरी कार्रवाई में निरीक्षक राकेश कुमार यादव, सहायक उप निरीक्षक उमेश प्रभाकर, नरेश मिंज, अनिल कामरे, प्रधान आरक्षक छविकांत पैंकरा, अनानियुस टोप्पो, उमेश मिंज, दामिनी टोप्पो एवं आरक्षक जितेन्द्र गुप्ता, नंदलाल यादव, अशोक कंसारी, अमित तिर्की, विमल टोप्पो व उमेश भारद्वाज की भूमिका उल्लेखनीय रही। पुलिस अधीक्षक डॉ लाल उमेद सिंह ने बताया कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों को लेकर पुलिस बेहद संवेदनशील है और ऐसे मामलों में शामिल किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।