छत्तीसगढ़ के कांकेर में ईसाई बने लोगों ने स्वेच्छा से हिन्दू धर्म में वापसी की

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कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से धर्मांतरण के मुद्दे पर एक बड़ी घटना सामने आई है। जिले के पीढ़ापाल सहित आसपास के गांवों के 25 से अधिक परिवारों के 200 से अधिक लोगों ने रविवार को एक सामूहिक समारोह में अपने मूल हिंदू धर्म में वापसी की है।

यह कदम सर्व आदिवासी समाज और सर्व समाज के नेतृत्व में चल रहे सामाजिक संवाद और पुनर्मिलन प्रयासों का नतीजा बताया जा रहा है।
इस अवसर पर पीढ़ापाल गांव में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां 25 परिवारों के गांवों के समाज प्रमुख, गायता, पटेल और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित थे। पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए मंदिर में पूजा-अर्चना की गई और गंगाजल छिड़काव के साथ विधिवत रूप से इन लोगों को मूल धर्म में वापस स्वीकार किया गया।

सर्व समाज के सदस्य ईश्वर कावड़े ने बताया कि यह स्वैच्छिक निर्णय सतत संवाद का परिणाम है। क्षेत्र के लगभग 90 परिवार पहले मिशनरीज के प्रभाव में आकर ईसाई धर्म अपना चुके थे। समाज में इनके साथ एक दूरी बन गई थी, जिसे पाटने का प्रयास किया गया। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि अभी तीन-चार परिवार शेष हैं, जो जल्द ही मूल धर्म में लौटने की इच्छा जता चुके हैं।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार धर्म परिवर्तन के बाद इन परिवारों का सार्वजनिक समारोहों और पारंपरिक रीति-रिवाजों में बहिष्कार किया जाता था, जिससे एक सामाजिक दूरी पैदा हो गई थी। समाज के प्रमुखों ने इन परिवारों से लगातार संपर्क बनाए रखा और उन्हें वापस लाने का प्रयास जारी रखा।

इस पूरे घटनाक्रम पर प्रशासन की नजर भी बनी हुई है, हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। क्षेत्र में इस वापसी को लेकर खुशी का माहौल है और इसे सामाजिक समरसता की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। समाज के वरिष्ठजनों का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह स्वैच्छिक रही और इसमें किसी प्रकार का दबाव नहीं था।