बहुचर्चित अंकिता भंडारी प्रकरण की जांच सीबीआई से कराने का फैसला

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देहरादून। उत्तराखंड के पौड़ी जिले मे एक रिसॉर्ट की कर्मचारी अंकिता भंडारी की मौत और दोषियों को आजीवन कारावास की सजा घोषित होने के बाद मामले में किसी वीआईपी के शामिल होने से संबंधित दावों तथा लगातार चल रहे प्रदर्शनों के मद्देनजर शुक्रवार को राज्य सरकार ने इस प्रकरण की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने का फैसला किया और कहा कि इसके लिए संस्तुति की जा रही है।

प्रकरण की सीबीआई जांच कराने की मांग को लेकर पिछले कुछ दिनों से राज्य के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किये जा रहे थे। विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने इस मांग को लेकर 11 जनवरी को उत्तराखंड बन्द का आह्वान किया था।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को कहा कि इस मामले में सरकार का उद्देश्य शुरू से अंत तक निष्पक्ष, पारदर्शी और संवेदनशील तरीके से न्याय सुनिश्चित करना रहा है और आगे भी रहेगा। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी के साथ हुई अत्यंत दुखद एवं हृदय विदारक घटना की जानकारी मिलते ही राज्य सरकार ने बिना किसी विलंब के पूर्ण संवेदनशीलता और निष्पक्षता के साथ कार्रवाई की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल एक महिला भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रकरण से जुड़े सभी अभियुक्तों को शीघ्र गिरफ्तार किया गया तथा राज्य सरकार की ओर से प्रभावी एवं सशक्त पैरवी सुनिश्चित की गयी, जिसका परिणाम यह रहा कि विवेचना और सुनवाई के दौरान किसी भी अभियुक्त को जमानत नहीं मिल सकी। उन्होंने बताया कि एसआईटी ने गहन विवेचना के पश्चात, अभियुक्तों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की और निचली अदालत द्वारा सुनवाई पूर्ण होने पर अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

धामी ने कहा कि यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि राज्य सरकार ने आरंभ से लेकर अंत तक निष्पक्षता, पारदर्शिता और दृढ़ता के साथ न्याय सुनिश्चित किया है। साथ ही, हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही कुछ ऑडियो क्लिप्स के संबंध में भी अलग–अलग प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं और जांच चल रही है।मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की मंशा पूरी तरह स्पष्ट है और किसी भी तथ्य या साक्ष्य की अनदेखी नहीं की जाएगी।

उन्होंने कहा कि अंकिता केवल एक पीड़िता नहीं थी, बल्कि वह हमारी भी बहन और बेटी थी। उन्होंने जानकारी दी कि हाल ही में उन्होंने स्वयं अंकिता के माता–पिता से बात की है और उन्होंने मामले की सीबीआई जांच कराए जाने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अंकिता के माता–पिता के इस अनुरोध और उनकी भावनाओं का पूर्ण सम्मान करते हुए राज्य सरकार ने इस प्रकरण की सीबीआई से जांच कराने का फैसला लिया है और इसकी संस्तुति की जा रही है।

धामी ने आराेप लगाया कि पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए कुछ लोगों ने भ्रम पैदा करने का प्रयास किया सरकार का दायित्व है कि देवतुल्य जनता की भावना का प्रयास किया जाय। इस मामले में सबसे अधिक पीड़ित अंकिता के माता-पिता है और इस संदर्भ में उनका पक्ष जानने के लिए उनसे बात की गई।

आरोप है कि रिसॉर्ट में अंकित भंडारी पर ‘विशेष सेवा’ देने के लिए दवाब डाला गया था और इससे मना करने पर उसकी हत्या कर दी गई थी। निचली अदालत ने इस मामले में रिसॉर्ट के मालिक समेत तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई थी। हाल ही में एक ऑडियो क्लिप में इस प्रकरण में किसी वीआईपी के भी शामिल होने की बात कही गई है। जिसके बाद मामले की जांच सीबीआई से कराने को लेकर धरना प्रदर्शन का सिलसिला शुरू हुआ।