मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े फेरबदल के संकेत मिल रहे हैं और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा-एसपी) के 10 में से 9 विधायकों ने पार्टी के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल की ओर से आहूत बैठक में भारतीय जनता पार्टी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल होने की इच्छा जताई है।
विधायकों ने स्पष्ट किया कि अपने-अपने क्षेत्रों में रुके हुए विकास कार्यों के लिए सरकारी धन प्राप्त करने और आगामी 2029 के विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज करने के लिए सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा बनना बेहद जरूरी हो गया है। वर्तमान में 288 सदस्यों वाली महाराष्ट्र विधानसभा में राकांपा (एसपी) के पास 10 विधायक हैं।
सूत्रों के अनुसार पाटिल खुद भी राजग में शामिल होने को पार्टी के अस्तित्व के लिए सबसे बेहतर विकल्प मान रहे हैं। उन्होंने विधायकों को आश्वस्त किया है कि वे उनकी इस मांग और भावनाओं से पार्टी अध्यक्ष शरद पवार को अवगत कराएंगे।
बैठक में विधायकों को यह भी बताया गया कि पार्टी की भाजपा के साथ पर्दे के पीछे बातचीत चल रही है और इसके नतीजे के आधार पर जल्द ही कोई अंतिम फैसला लिया जा सकता है। यदि यह सहमति बनती है, तो राकांपा (एसपी) केंद्र और महाराष्ट्र दोनों सरकारों में शामिल हो सकती है।
विधायक रोहित पवार हालांकि इस बैठक से दूर रहे, क्योंकि वे भाजपा या राजग के साथ जाने के सख्त खिलाफ हैं। इस मुद्दे पर पाटिल की शरद पवार से मुलाकात के बाद विधायकों और सांसदों की संयुक्त बैठक बुलाई जाएगी। इसके बाद पार्टी के आधिकारिक रुख का एलान होगा।
इस बीच राकांपा (एसपी) के आधिकारिक प्रवक्ता महेश तापसे ने इन अटकलों को काल्पनिक और निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष एवं सांसद सुप्रिया सुले पहले ही ऐसी किसी भी संभावना को खारिज कर चुकी हैं।
महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के सहयोगी दल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) हालांकि इस घटनाक्रम और पर्दे के पीछे की वार्ताओं से भली-भांति वाकिफ हैं। कांग्रेस नेता विजय वडेटीवार ने कहा कि पार्टी को तय करना होगा कि वे सत्ता और पैसे के पीछे जाना चाहते हैं या छत्रपति शिवाजी महाराज, डॉ. बीआर अंबेडकर और महात्मा फुले की विचारधारा की रक्षा करना चाहते हैं।
शिवसेना (यूबीटी) के मुख्य प्रवक्ता एवं सांसद संजय राउत ने शरद पवार के हाल ही में विधान भवन में मुख्यमंत्री/उपमुख्यमंत्री के कार्यालय में जाकर मुलाकात करने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की थी। राउत ने कहा है कि ऐसे कदमों से एमवीए सहयोगियों को ठेस पहुंचती है और पार्टी की साख कमजोर होती है।



