‘चलो दिल्ली-लोकतंत्र के लिए मार्च’ के जरिए शक्ति प्रदर्शन की तैयारी, राहुल गांधी ने विपक्षी दलों और नागरिक संगठनों से एकजुट होने की अपील की
नई दिल्ली। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से मुलाकात का अनुरोध स्वीकार नहीं किए जाने के बाद कांग्रेस ने अपनी रणनीति में बदलाव के संकेत दिए हैं। पार्टी सोमवार को एक बार फिर मुलाकात के लिए अनुरोध कर सकती है। इसी बीच कांग्रेस ने लोकतंत्र और संविधान के मुद्दे पर दिल्ली में बड़े विरोध प्रदर्शन की तैयारी की है। पार्टी ने इसे ‘चलो दिल्ली—लोकतंत्र के लिए मार्च’ नाम दिया है। राहुल गांधी ने विपक्षी दलों, युवाओं और नागरिक संगठनों से इस मार्च में शामिल होने की अपील की है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कांग्रेस नेताओं की ओर से सोमवार को मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात के लिए दोबारा समय मांगे जाने की संभावना है। हालांकि, इस संबंध में पार्टी की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। कांग्रेस की इस पहल और प्रस्तावित मार्च को लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
सीजेआई ने याचिका दायर करने की दी सलाह
राहुल गांधी की ओर से मुलाकात का अनुरोध किए जाने पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कथित तौर पर स्पष्ट किया कि इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर कोई आदेश जारी नहीं किया जा सकता। उन्होंने संबंधित पक्ष को न्यायिक प्रक्रिया के तहत याचिका दायर करने की सलाह दी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले में मंगलवार को सुनवाई की संभावना जताई गई है।
सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि यदि किसी नागरिक के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो उच्चतम न्यायालय उसके संरक्षण के लिए उपलब्ध है। साथ ही, न्यायालय के प्रशासनिक अधिकारों की सीमाओं का उल्लेख करते हुए कहा गया कि प्रशासनिक स्तर पर कार्यपालिका के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।
बाराखंभा रोड से मार्च शुरू करने की तैयारी
कांग्रेस ने सोमवार को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के लिए दिल्ली में जुटने की अपील की है। पार्टी के कार्यक्रम के अनुसार, प्रदर्शनकारी दोपहर 1:30 बजे कनॉट प्लेस-बाराखंभा रोड चौराहे पर एकत्र होंगे। यहां से उच्चतम न्यायालय की ओर मार्च करने की योजना है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि इस मार्च को केवल किसी राजनीतिक दल के कार्यक्रम के रूप में नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान के समर्थन में सामूहिक पहल के तौर पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने अलग-अलग राजनीतिक दलों के साथ युवाओं, नागरिक संगठनों और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखने वाले लोगों से इसमें भाग लेने का आह्वान किया है।
विपक्षी एकजुटता दिखाने पर जोर
राहुल गांधी ने अपील की कि मार्च में शामिल होने वाले लोग राजनीतिक मतभेदों, जाति, समुदाय, लिंग और राज्यों के आधार पर बने विभाजनों से ऊपर उठकर एकजुट हों। उनके मुताबिक, संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था के पक्ष में आवाज उठाने के लिए सभी संबंधित पक्षों को साथ आना चाहिए।
कांग्रेस की इस अपील को विपक्षी एकजुटता प्रदर्शित करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। पार्टी की योजना के तहत विभिन्न विपक्षी दलों और नागरिक संगठनों की भागीदारी जुटाने पर जोर दिया जा रहा है।
मुलाकात और मार्च पर टिकी निगाहें
मुख्य न्यायाधीश से दोबारा मुलाकात का अनुरोध किए जाने की संभावित तैयारी और सुप्रीम कोर्ट तक मार्च के ऐलान ने इस घटनाक्रम को महत्वपूर्ण बना दिया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर रहेंगी कि कांग्रेस की ओर से मुलाकात के लिए औपचारिक अनुरोध किया जाता है या नहीं और प्रस्तावित मार्च में कितनी भागीदारी रहती है।



