
सबगुरु न्यूज-सिरोही। सिरोही नगर परिषद में भाजपा की जबरदस्त हार के बाद हड़कंप मचा हुआ है। बुधवार रात को भाजपा नगर मंडल के व्हाट्स एप समूह से मंडल पदाधिकारी के द्वारा चार भाजपा पार्षदों को बाहर कर देने और इनके प्रति कथित अनर्गल बयानबाजी नाराज होकर भाजपा के पार्षद प्रवीण राठौड़ ने भाजपा के सभी पदों से त्यागपत्र देने के वीडियो जारी किया है।
लेकिन, इस सबके बीच अब ये चर्चा भी उठने लगी है कि आखिर ओटाराम देवासी के ख़िलाफ़ कथित साजिश करते उप सभापति का नामांकन नहीं करवाने के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ संगठन के द्वारा क्या कार्रवाई की जाएगी? और सवाल ये भी उठ रहा है कि रामझरोखा मंदिर की जमीन हड़पने पर चुप्पी साधे धार्मिक राजनीति करने वाली भाजपा को सिरोही के इष्ट सारणेश्वर के सामने किया जो संकल्प और इस संगठन को जिंदा रखने वाले मूल संगठन आरएसएस के संस्कार पर भी विश्वास नहीं रहा है।
– क्रॉस वोटिंग से जोड़कर देख रहे हैं
सिरोही नगर मंडल के भाजपा समूह से जुड़े इन तीन पार्षदों और पार्षद पति के निष्कासन के पीछे सिरोही नगर परिषद के सभापति के चुनाव में क्रॉस वोटिंग को प्रमुख वजह माना जा रहा है। सिरोही शहर ने भाजपा को पूरी तरह से नकार दिया तो भाजपा के मुट्ठी भर पार्षदों में ओटाराम देवासी और रक्षा भंडारी द्वारा तय किए गए सभापति प्रत्याशी को। भाजपा के दस पार्षद जीते थे। लेकिन भाजपा की सभापति प्रत्याशी को सिर्फ पांच ही वोट मिले और उसकी जमानत जब्त हो गई। वहीं दूसरा झटका उप सभापति चुनाव में लगा जिसमें ओटाराम देवासी शिवगंज में ही फंसे रहे और इधर जिलाध्यक्ष, जिला महामंत्री और नगर मंडल अध्यक्ष उपसभापति का कैंडिडेट तक नहीं खड़ा कर पाए।
– इन चार का डिजिटल निष्कासन
बुधवार को सिरोही नगर भाजपा मंडल के समूह भाजपा पार्षद प्रवीण राठौड़, गीता पुरोहित, गौरव प्रजापत और भाजपा पार्षद के प्यार धनपत सिंह को रिमूव कर दिया गया। इस डिजिटल निष्कासन के रूप में देखा जा रहा है। इस निष्कासन के बाद प्रवीण राठौड़ ने भाजपा के सभी पदों से अपना त्याग पत्र देने का वीडियो जारी किया। उनका आरोप था कि समूह से निष्कासन के बाद हम लोगों पर अनर्गल आरोप लगाए जाने लगे थे। ये उनकी निष्ठा पर सवाल है और इससे आहत होकर उन्होंने भाजपा के सभी पदों से त्याग पत्र दे दिया है।
जिन पार्षदों का समूह से निष्कासन किया गया उनमें से एक उन पांच पार्षदों में शामिल थे जिन्होंने सारणेश्वर मंदिर में जल संकल्प लिया था। वहीं दूसरी पार्षद सिरोही में आरएसएस से जुड़े प्रमुख पदाधिकारी की पत्नी हैं। ऐसे में अब सवाल ये उठ रहा है कि सिरोही रामझरोखा मंदिर और श्मशान की भूमि के खुर्द-बुर्द होने पर चुप्पी साधने वाला सिरोही भाजपा नेतृत्व इतना नास्तिक हो चुका है कि अब उसे सिरोही के इष्ट के न्याय और आरएसएस के संस्कार पर भी विश्वास नहीं रहा है। दरअसल, इस निष्कासन को आरएसएस से जुड़े दो प्रमुख नेताओं के गुटों के बीच चल रही कथित खींचतान के रूप में भी देखा जा रहा है जिनके बीच लंबे समय से खींचतान चल रही है। सभापति पद पर खड़ी प्रत्याशी एक गुट से तो निष्कासित पार्षद दूसरे गुट से जुड़ा माना जाता है। यूं अभी तक संगठन ने इन चारों के पार्टी से निष्कासन की अधिकारिक घोषणा नहीं की है लेकिन, इस डिजिटल निष्कासन को उसी रूप में देखा जा रहा है।


