चेन्नई। तमिलनाडु में कथित सरकारी नौकरी घोटाले की जांच के तहत सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (DVAC) ने गुरुवार को द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री केएन नेहरू से जुड़े ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। अधिकारियों ने राज्यभर में करीब 25 स्थानों पर कार्रवाई की। मामला नगर प्रशासन एवं जलापूर्ति विभाग में सरकारी पदों पर भर्ती के बदले कथित तौर पर रिश्वत लिए जाने से जुड़ा है। जांच में कथित अनियमितताओं की राशि करीब 634 करोड़ रुपये बताई गई है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तलाशी अभियान में तिरुचिरापल्ली के थिलाईनगर स्थित नेहरू के आवास और चेन्नई के आरए पुरम क्षेत्र में उनके भाई केएन रविचंद्रन के ठिकाने भी शामिल हैं। DVAC की कई टीमें दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही हैं, ताकि कथित लेनदेन और भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं से जुड़े तथ्यों का पता लगाया जा सके।
2,538 पदों पर भर्ती में अनियमितता के आरोप
यह मामला नगर प्रशासन एवं जलापूर्ति विभाग में पिछली द्रमुक सरकार के कार्यकाल के दौरान हुई भर्तियों से संबंधित है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से साझा की गई सामग्री के आधार पर आरोप लगाया गया कि सहायक अभियंता, कनिष्ठ अभियंता, नगर नियोजन अधिकारी समेत विभिन्न पदों पर नियुक्तियों के लिए अभ्यर्थियों से कथित रूप से रिश्वत वसूली गई।
रिपोर्टों में लगभग 2,538 नियुक्तियों के संबंध में 634 करोड़ रुपये की कथित रिश्वत का उल्लेख है। जांच एजेंसियां इस आरोप से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की कड़ियों की पड़ताल कर रही हैं। हालांकि, यह राशि जांच में लगाए गए आरोपों से संबंधित है, इसे किसी न्यायिक रूप से सिद्ध अपराध का निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
मद्रास हाईकोर्ट के आदेश के बाद तेज हुई जांच
इस मामले में मद्रास हाईकोर्ट ने 26 अक्टूबर को केएन नेहरू की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी थी। नेहरू ने पहले अदालत के उस आदेश पर पुनर्विचार की मांग की थी, जिसमें मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्राथमिकी दर्ज करने और जांच के निर्देश को किसी व्यक्ति का दोष सिद्ध होना नहीं माना जा सकता।
इसके बाद DVAC ने तलाशी अभियान शुरू किया। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार नेहरू ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) भी दायर की है।
तलाशी पर राजनीतिक विवाद भी
कार्रवाई के बीच द्रमुक अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने छापेमारी को राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की सत्तारूढ़ सरकार विपक्षी नेताओं को निशाना बना रही है। यह स्टालिन का राजनीतिक आरोप है; जांच एजेंसी की कार्रवाई के पीछे की मंशा पर स्वतंत्र निष्कर्ष सामने नहीं आया है।



