कोलकाता DGP शांतनु सिन्हा के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी

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कोलकाता। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कोलकाता पुलिस के अधिकारी शांतनु सिन्हा विश्वास के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई दो जांचों के सिलसिले में केंद्रीय एजेंसी के भेजे गए कई समन के बावजूद उनके पेश न होने के बाद की गई है।

ईडी सूत्रों के अनुसार यह निर्णय उन आशंकाओं के बीच लिया गया कि अधिकारी पूछताछ से बचने के लिए देश छोड़ने की कोशिश कर सकते हैं। पिछले कुछ हफ्तों में उन्हें भेजे गए समन का बार-बार पालन न करने के बाद यह लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया।

पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण के मतदान से एक दिन पहले 28 अप्रैल को ईडी ने वर्तमान में कोलकाता पुलिस के उपायुक्त के रूप में कार्यरत विश्वास को साल्ट लेक स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स कार्यालय में तलब किया था।

रिपोर्टों के मुताबिक यह समन दक्षिण कोलकाता के बालीगंज निवासी विश्वजीत पोद्दार से जुड़े एक मामले से संबंधित था। पोद्दार पर जमीन कब्जाने, रंगदारी और शस्त्र अधिनियम के उल्लंघन सहित कई आरोप हैं।

केंद्रीय एजेंसी इस मामले में बेहाला स्थित व्यवसायी जॉय कामदार को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। जांचकर्ताओं को कामदार और पोद्दार के बीच वित्तीय अनियमितताओं और संभावित संबंधों का संदेह है। इस कारण अपराध की आय की व्यापक जांच शुरू की गयी है।

पिछले महीने ईडी अधिकारियों ने कोलकाता के फर्न रोड स्थित विश्वास के आवास पर दिन भर तलाशी अभियान चलाया था। सुबह शुरू हुई यह कार्रवाई अगले दिन तड़के करीब दो बजे तक चली।

गौरतलब है कि तलाशी के दौरान विश्वास सार्वजनिक रूप से कहीं नजर नहीं आये थे। छापेमारी के बाद ईडी ने विश्वास के साथ-साथ उनके दो बेटों सांतन विश्वास और मनीष विश्वास को नए समन जारी कर सीजीओ कॉम्प्लेक्स में पेश होने को कहा था, हालांकि उनमें से कोई भी एजेंसी के सामने पेश नहीं हुआ।

इसके अलावा कालीघाट थाने के पूर्व प्रभारी रहे विश्वास को अप्रैल में बालू तस्करी के एक मामले में भी तलब किया गया था, जिसकी जांच ईडी कर रही है। उस मामले में भी वे व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं हुए और उनके वकील ने पूर्व व्यस्तताओं का हवाला देते हुए उनकी ओर से समय मांगा था।

ईडी अवैध रेत खनन कार्यों से जुड़े वित्तीय गबन के आरोपों के साथ-साथ जबरन वसूली और जमीन से संबंधित अपराधों में शामिल संदिग्ध आपराधिक नेटवर्कों की जांच कर रही है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि इन मामलों में विश्वास की भूमिका की जांच की जा रही है और जांच को आगे बढ़ाने के लिए उनसे पूछताछ बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।