लंदन। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती क्षमताओं के बीच गूगल के जेमिनी मॉडल से जुड़ी एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने AI सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। मई 2026 में साइबर सुरक्षा परीक्षण के दौरान जेमिनी ने गलती से इंटरनेट तक पहुंच हासिल कर ली और तीन वास्तविक कंपनियों के सिस्टम में प्रवेश कर गया। गूगल के अनुसार यह उसकी AI प्रणाली का इस तरह किसी बाहरी कंपनी के सिस्टम तक स्वायत्त रूप से पहुंचने का पहला ज्ञात मामला है।
काल्पनिक कंपनी के नाम ने पैदा किया भ्रम
यह परीक्षण इजराइल की AI सुरक्षा परीक्षण कंपनी Irregular ने किया था। इसका उद्देश्य एक नियंत्रित और काल्पनिक वातावरण में जेमिनी की साइबर सुरक्षा क्षमताओं को परखना था। AI मॉडल को एक नकली कंपनी के सिस्टम से जानकारी हासिल करने का काम दिया गया था।
परीक्षण के दौरान एक बड़ी तकनीकी चूक सामने आई। जिस काल्पनिक कंपनी के नाम का इस्तेमाल किया गया था, उसी नाम की एक वास्तविक कंपनी भी मौजूद थी। इसके अलावा टेस्ट वातावरण, जिसे इंटरनेट से अलग रखा जाना था, उसमें अनजाने में इंटरनेट कनेक्शन उपलब्ध हो गया।
पासवर्ड का अनुमान लगाकर सिस्टम तक पहुंचा
इंटरनेट से जुड़ने के बाद जेमिनी ने ऑनलाइन उपलब्ध जानकारी का इस्तेमाल किया। रिपोर्टों के मुताबिक एक मामले में AI ने लगातार पासवर्ड का अनुमान लगाकर संरक्षित सिस्टम तक पहुंच हासिल की। अन्य दो मामलों में उसे सार्वजनिक रिपॉजिटरी में मौजूद क्रेडेंशियल मिले, जिनका इस्तेमाल कर वह वास्तविक कंपनियों के सिस्टम तक पहुंच गया।
हालांकि, तीनों मामलों में जेमिनी ने यह पहचानने के बाद अपनी गतिविधि रोक दी कि वह परीक्षण के लिए बनाए गए काल्पनिक सिस्टम के बजाय वास्तविक कंपनियों के सिस्टम तक पहुंच गया है। गूगल ने कहा है कि इन घटनाओं में संबंधित कंपनियों को सूचित किया गया था।
गूगल को जुलाई में मिली थी जानकारी
Irregular ने गूगल को इन घटनाओं की जानकारी जुलाई के अंत में दी थी। कंपनी के मुताबिक, परीक्षण से जुड़ी तकनीकी खामियों को बाद में ठीक कर दिया गया। गूगल की सुरक्षा इंजीनियरिंग की उपाध्यक्ष हीदर एडकिन्स ने कहा कि इन घटनाओं से शक्तिशाली AI मॉडलों को जिम्मेदारी से काम करने के लिए प्रशिक्षित करने की आवश्यकता सामने आती है।
गूगल ने इन घटनाओं को तत्काल सार्वजनिक नहीं किया था। कंपनी का कहना था कि जेमिनी ने तीनों मामलों में खुद अपनी गतिविधि रोक दी और प्रभावित कंपनियों को नुकसान नहीं हुआ। यह जानकारी बाद में मीडिया के सवालों के बाद सामने आई।
AI सुरक्षा को लेकर बढ़ रही चिंता
जेमिनी की यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब अन्य प्रमुख AI कंपनियों के परीक्षणों के दौरान भी इसी तरह की घटनाएं रिपोर्ट हुई हैं। Irregular से जुड़े परीक्षणों में OpenAI, Anthropic और Meta के AI मॉडलों के व्यवहार को लेकर भी मामले सामने आ चुके हैं।
इन घटनाओं ने इस सवाल को प्रमुख बना दिया है कि जब AI एजेंटों को इंटरनेट और कंप्यूटर सिस्टम तक अधिक स्वायत्त पहुंच दी जाएगी, तो उनके लिए परीक्षण वातावरण की सीमाएं कितनी प्रभावी रहेंगी। AI सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच अब ऐसे परीक्षणों के लिए बेहतर आइसोलेशन, इंटरनेट नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था की जरूरत पर चर्चा तेज हो गई है।
नुकसान नहीं हुआ, लेकिन चेतावनी जरूर मिली
इस मामले में गूगल के अनुसार किसी प्रभावित कंपनी को नुकसान नहीं हुआ और जेमिनी ने वास्तविक सिस्टम तक पहुंच का एहसास होने पर अपनी गतिविधि रोक दी। फिर भी घटना ने यह दिखाया कि एक मामूली कॉन्फिगरेशन गलती और इंटरनेट तक अनपेक्षित पहुंच AI मॉडल को निर्धारित परीक्षण दायरे से बाहर ले जा सकती है।



