अजमेर वार्ड 76 में भाजपा-कांग्रेस के लिए निर्दलीय मुकेश सिंह राठौड़ बड़ी चुनौती

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अजमेर। नगर निगम चुनाव में पंचशील नगर सीमा में आने वाला वार्ड 76 का मुकाबला अब दिलचस्प होता नजर आ रहा है। भाजपा के सतीश बंसल फिलहाल चुनावी समीकरण में मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहे हैं, लेकिन निर्दलीय प्रत्याशी मुकेश सिंह राठौड़ ने मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की संभावनाएं बढ़ा दी हैं। कांग्रेस प्रत्याशी इन्द्र शर्मा भी मैदान में हैं, जबकि अन्य निर्दलीय प्रत्याशियों का प्रभाव फिलहाल सीमित माना जा रहा है।

राजनीतिक आकलन के अनुसार भाजपा को वार्ड में संगठन और परंपरागत वोट बैंक का लाभ मिल सकता है। दूसरी ओर मुकेश राठौड़ के पक्ष में उनकी स्थानीय पहचान, व्यक्तिगत संपर्क और गणेश गुवाड़ी में मजबूत पकड़ बड़ा फेक्टर बन सकती है। ऐसे में चुनाव केवल भाजपा बनाम कांग्रेस तक सीमित रहने के बजाय भाजपा बनाम निर्दलीय के बीच सीधा मुकाबला भी बन सकता है।

गणेश गुवाड़ी बन सकती है मुकेश की सबसे बड़ी ताकत

वार्ड 76 में पंचशील के ए, बी और सी ब्लॉक, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी तथा गणेश गुवाड़ी जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इनमें गणेश गुवाड़ी मुकेश सिंह राठौड़ के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र साबित हो सकती है।

यदि स्थानीय निवासी होने के कारण मुकेश को गणेश गुवाड़ी में 70 से 80 प्रतिशत तक व्यक्तिगत समर्थन मिलता है तो उन्हें यहां से अच्छी शुरुआती बढ़त मिल सकती है। इसके बाद उनकी असली चुनौती पंचशील की अन्य कॉलोनियों में होगी, जहां भाजपा का परंपरागत समर्थन मजबूत माना जाता है।

हालांकि स्थानीय निकाय चुनाव में पार्टी के परंपरागत वोट और उम्मीदवार के व्यक्तिगत प्रभाव को अलग-अलग देखना जरूरी होता है। भाजपा समर्थक मतदाता होने का अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक मतदाता हर परिस्थिति में भाजपा प्रत्याशी को ही वोट देगा। उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि, स्थानीय संपर्क और वार्ड में उपलब्धता भी मतदान को प्रभावित कर सकती है।

भाजपा के वोट बैंक में सेंध बन सकती है निर्णायक

मुकेश राठौड़ के लिए चुनाव का सबसे बड़ा सवाल यही है कि वे गणेश गुवाड़ी के बाहर कितना समर्थन हासिल कर पाते हैं। यदि वे पंचशील की कॉलोनियों में भाजपा के परंपरागत वोट में 10 से 20 प्रतिशत तक सेंध लगाने में सफल होते हैं तो मुकाबला काफी करीबी हो सकता है।

खास तौर पर भाजपा के ऐसे मतदाता जो स्थानीय स्तर पर किसी उम्मीदवार से असंतुष्ट हैं या टिकट वितरण से नाराज हैं, उनका रुख मुकेश के पक्ष में जाता है तो निर्दलीय प्रत्याशी को अप्रत्याशित मजबूती मिल सकती है। इसके अलावा कांग्रेस के कमजोर पड़ने की स्थिति में भाजपा विरोधी वोटों का एक हिस्सा भी मुकेश की ओर जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

2021 का परिणाम भाजपा के पक्ष में रहा था

वार्ड के पिछले चुनावी आंकड़े भाजपा की मजबूती की ओर इशारा करते हैं। वर्ष 2021 में भाजपा के अतिश माथुर को 1,447 वोट, जबकि कांग्रेस के समीर भटनागर को 587 वोट मिले थे। भाजपा ने करीब 860 वोट के अंतर से जीत दर्ज की थी। पिछला परिणाम बताता है कि वार्ड में भाजपा का पारंपरिक संगठनात्मक आधार मजबूत रहा है। हालांकि 2026 का चुनाव पिछले चुनाव से अलग परिस्थितियों में हो रहा है। इस बार भाजपा और कांग्रेस दोनों के सामने टिकट को लेकर असंतोष तथा निर्दलीय प्रत्याशियों की चुनौती भी चर्चा में है।

मुकेश राठौड़ के सामने सबसे बड़ी चुनौती

मुकेश सिंह राठौड़ को यदि जीत की स्थिति में पहुंचना है तो केवल गणेश गुवाड़ी में मजबूत प्रदर्शन पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें पंचशील के ए, बी और सी ब्लॉक सहित अन्य इलाकों में भी व्यक्तिगत संपर्क के आधार पर पर्याप्त वोट हासिल करने होंगे।

यदि गणेश गुवाड़ी से उन्हें बड़ी बढ़त मिलती है और पंचशील में भाजपा के वोट का एक हिस्सा उनके पक्ष में आता है, तो वे भाजपा को कड़ी टक्कर देने के साथ जीत की स्थिति भी बना सकते हैं।

इसके विपरीत यदि भाजपा संगठन पूरी तरह एकजुट रहता है, सतीश बंसल को पार्टी का अधिकांश पारंपरिक वोट मिलता है और भाजपा समर्थक कॉलोनियों में मतदान का प्रभावी प्रबंधन होता है, तो मुकेश के लिए भाजपा को पीछे छोड़ना मुश्किल होगा।

मुकाबला भाजपा बनाम मुकेश राठौड़ की ओर?

वर्तमान परिस्थितियों का राजनीतिक आकलन किया जाए तो सतीश बंसल अभी भी सबसे मजबूत दावेदार दिखाई देते हैं, लेकिन मुकेश सिंह राठौड़ को केवल वोट काटने वाला निर्दलीय मानना भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए जोखिम भरा हो सकता है।

मुकेश की स्थानीय पहचान, गणेश गुवाड़ी में संभावित मजबूत पकड़ और भाजपा के असंतुष्ट मतदाताओं में सेंध लगाने की क्षमता उन्हें वार्ड 76 में सबसे गंभीर निर्दलीय चुनौती बनाती है।

फिलहाल संभावित मुकाबले में भाजपा आगे दिखाई देती है, मुकेश राठौड़ मजबूत चुनौती की स्थिति में हैं और कांग्रेस तीसरे स्थान के लिए संघर्ष करती नजर आ रही है। चुनावी माहौल, प्रत्याशियों का व्यक्तिगत संपर्क और मतदान के अंतिम दिनों में होने वाला ध्रुवीकरण इस समीकरण को बदल सकता है। फिलहाल वार्ड 76 में इसलिए असली सवाल यह नहीं है कि भाजपा का वोट बैंक कितना बड़ा है, बल्कि यह है कि उस वोट बैंक में मुकेश राठौड़ कितनी सेंध लगा पाते हैं। यही सेंध चुनाव का परिणाम तय करने में निर्णायक साबित हो सकती है।