धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे और आर्थिक स्थिति पर सर्वदलीय बैठक की मांग सहित 5 मुद्दों पर इंडिया गठबंधन में बनी सहमति

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नई दिल्ली। विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन की सोमवार को यहां हुई महत्वपूर्ण बैठक में मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट तथा सीबीएसई परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तथा मौजूदा आर्थिक स्थिति, बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याओं तथा जनसरोकार के अन्य मुद्दों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की गई।

गठबंधन के नेताओं की बैठक में इस मुद्दे पर भी सहमति बनी कि गठबंधन के सभी दल हर दो महीने में मिलेंगे और परस्पर समन्वय को और मजबूत करेंगे। इस क्रम में अगली बैठक आठ अगस्त को हैदराबाद में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।

बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि गठबंधन के नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), कथित वोट चोरी और चुनावी धांधली के मुद्दे पर भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि यह पत्र शीघ्र ही मुख्य न्यायाधीश को सौंपा जाएगा।

खरगे ने कहा कि बैठक में प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग पर सर्वसम्मति बनी। गठबंधन का आरोप है कि नीट और सीबीएसई परीक्षाओं से जुड़े मामलों में लाखों छात्रों के हित प्रभावित हुए हैं। उन्होंने बताया कि संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्षी दलों के बीच समन्वय को और मजबूत किया जाएगा तथा नेता प्रतिपक्ष के कार्यालय में प्रतिदिन सुबह बैठकें आयोजित की जाएंगी। खरगे ने कहा कि बैठक में शामिल 25 दलों के नेताओं ने पांचों प्रस्तावों पर सहमति व्यक्त की।

खरगे यह भी बताया कि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे और संजय राउत तथा झारखंड मुक्ति मोर्चा के हेमंत सोरेन बैठक में वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए और उन्होंने बैठक में लिए गए सभी निर्णयों पर अपनी सहमति व्यक्त की।

खरगे की अध्यक्षता में कांस्टीट्यूशन क्लब में करीब ढाई घंटे तक चली बैठक में खरगे के अलावा कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल और जयराम रमेश, तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, कल्याण बनर्जी और डेरेक ओ’ब्रायन, राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी यादव और संजय यादव, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सुप्रिया सुले, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के जॉन ब्रिटास, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के डी राजा और पी संतोष कुमार, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव और मोहिब्बुल्लाह नदवी, जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला और शमी ओबेरॉय, भाकपा (माले) के दीपांकर भट्टाचार्य और रवि कुमार, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के सादिक थंगल और ई.टी. मोहम्मद कुनहालिकुट्टी, केरल कांग्रेस (मणि) के जोस के. मणि, एमडीएमके के वाइको, वीसीके के थोल तिरुमावलवन और रवि कुमार, आरएसपी के एन.के. प्रेमचंद्रन, केरल कांग्रेस (जोसेफ) के फ्रांसिस जॉर्ज, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के जी. देवराजन, पीडीपी की महबूबा मुफ्ती, भारत आदिवासी पार्टी के राजकुमार रोत, पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी के जयंत पाटिल, लोक दल के सुनील सिंह तथा निर्दलीय सांसद कपिल सिब्बल शामिल हुए।

इससे पहले खरगे ने बैठक की शुरुआत में दिए अपने संबोधन में कहा कि गठबंधन ने लोकसभा में परिसीमन से जुड़े विधेयकों के खिलाफ जिस एकजुटता का परिचय दिया था, अब उसी भावना के साथ केंद्र सरकार के कुशासन के खिलाफ भी सामूहिक संघर्ष को आगे बढ़ाया जाएगा। उनका कहना था कि यह गठबंधन लगभग तीन वर्ष पहले अस्तित्व में आया था और गत 17 अप्रैल को लोकसभा में सभी विपक्षी दलों ने एकजुट होकर परिसीमन के मुद्दे पर मोदी सरकार के दुर्भावनापूर्ण विधेयकों को पराजित किया था।

उन्होंने कहा कि अब इस एकता को और मजबूत करने की जरूरत है ताकि देश के सामने मौजूद राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक तथा विदेश नीति से जुड़ी चुनौतियों का डटकर सामना किया जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के कारण करोड़ों लोगों का मताधिकार छीना जा रहा है और संविधान पर लगातार हमला हो रहा है।

खरगे ने कहा कि जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को परेशान करने, डराने-धमकाने के लिए किया जा रहा है और गैर-भाजपा शासित राज्यों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, आर्थिक माहौल नकारात्मक है और नई नौकरियां पैदा करने के लिए जिस गति से निवेश आना चाहिए, वह नहीं आ रहा है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि कई क्षेत्रों में निजी एकाधिकार बढ़ रहा है और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों का भविष्य संकट में है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली के कुप्रबंधन के कारण लाखों युवाओं की आशाओं और आकांक्षाओं के साथ विश्वासघात हो रहा है तथा समाज के कमजोर वर्गों पर अत्याचार जारी हैं। उन्होंने कहा कि विदेश नीति में पारंपरिक मूल्यों से समझौता किया जा रहा है।