श्रीनगर। भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास कई पाकिस्तानी ड्रोन उड़ते देखे जाने के बाद गुरुवार रात चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाईं।
आधिकारिक सूत्रों ने शुक्रवार को बताया कि केरन सेक्टर में ड्रोन एलओसी के बहुत करीब उड़ते देखे गए, जिसके बाद भारतीय सेना ने चेतावनी के तौर पर गोलियां चलायीं। एक सूत्र ने बताया कि चेतावनी वाली गोलियों के बाद ड्रोन वापस चले गए।
गौरतलब है कि केरन सेक्टर रणनीतिक रूप से संवेदनशील है क्योंकि यह उन पारंपरिक घुसपैठ के रास्तों के करीब है जिनका इस्तेमाल आतंकवादी सालों से करते आ रहे हैं। रक्षा सूत्रों ने इस घटना पर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है।
पिछले कुछ सालों में जम्मू-कश्मीर में एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) पर ड्रोन देखे जाने की ज़्यादातर घटनाएं जम्मू सेक्टर में हुई हैं। इन ड्रोन्स को सांबा, कठुआ और जम्मू जैसे जिलों में इंटरसेप्ट किया गया है। केरन में पाकिस्तानी ड्रोन का दिखना एक नई सुरक्षा चुनौती पेश करता है।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस इलाके में ड्रोनों का इस्तेमाल न सिर्फ निगरानी के लिए, बल्कि घुसपैठ की कोशिशों में मदद करने या हथियार, संचार उपकरण और नशीले पदार्थ गिराने के लिए भी किया जा सकता है। पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के बाद से कश्मीर में एलओसी पर ज़्यादातर शांति रही है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद जम्मू-कश्मीर में एलओसी पर कोई बड़ा संघर्ष विराम उल्लंघन नहीं हुआ है। इस साल की शुरुआत में थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा था कि 2025 में 139 संघर्ष विराम उल्लंघन के मामले दर्ज किए गए, जिनमें से 124 ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुए थे।



