जयपुर। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के क्षेत्र संघचालक डॉ. रमेशचंद्र अग्रवाल ने कहा है कि पिछले वर्ष में संघ के संगठनात्मक कार्य का उल्लेखनीय विस्तार हुआ और उसकी शाखाएं लगभग छह हजार की वृद्धि के साथ बढ़कर 88 हजार से अधिक हो गई है तथा स्थानों की संख्या भी 55 हजार से अधिक हो गई है।
डॉ अग्रवाल संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की 13 से 15 मार्च तक हरियाणा के समालखा में सम्पन्न हुई बैठक में हुई चर्चा के बारे में सोमवार को यहां सेवा सदन में पत्रकारों बताते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही साप्ताहिक मिलन और मंडलियों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि संघ का कार्य अब अंडमान, अरुणाचल प्रदेश, लेह तथा दुर्गम जनजातीय क्षेत्रों तक पहुंच चुका है जहां नियमित रूप से शाखाएं संचालित हो रही हैं।
उन्होंने बताया कि देश के दूरस्थ क्षेत्रों में भी संघ कार्य के प्रति उत्साह दिखाई दे रहा है। अंडमान के नौ प्रमुख द्वीपों से 13 हजार से अधिक लोग सरसंघचालक की उपस्थिति में आयोजित हिंदू सम्मेलन में सम्मिलित हुए। इसी प्रकार अरुणाचल प्रदेश में आयोजित 21 स्वधर्म सम्मेलनों में 37 हजार से अधिक लोगों ने सहभागिता की।
राजस्थान में भी संगठनात्मक कार्य का निरंतर विस्तार हो रहा है। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 7910 स्थानों पर संगठनात्मक कार्य संचालित हो रहा है। प्रदेश में कुल 12109 शाखाएं तथा 5950 मिलन संचालित हो रहे हैं।
समाज के व्यापक संपर्क के लिए प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए। अब तक कुल 7175 सम्मेलन आयोजित हुए, जिनमें 27918 गांवों की भागीदारी रही। इन सम्मेलनों में लगभग 35 लाख तीन हजार 278 पुरुष और 41 लाख 26 हजार 687 महिलाएं शामिल हुईं। इस प्रकार कुल मिलाकर 76 लाख 30 हजार 965 लोगों की सहभागिता रही।
उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच बढ़ाने, संवाद स्थापित करने और सामाजिक सहभागिता को सुदृढ़ करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संगठन विस्तार के साथ संघ समाज में गुणवत्ता संवर्धन के लिए भी कार्य कर रहा है।
पंच परिवर्तन के माध्यम से समाज को सकारात्मक परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जा रहा है। भारतीयता अथवा हिंदुत्व केवल एक विचार नहीं बल्कि जीवन शैली है, जिसके माध्यम से समाज में श्रेष्ठ मूल्यों का विस्तार होना चाहिए। इसी उद्देश्य से समाज की सज्जन शक्ति को संगठित कर राष्ट्रहित में सक्रिय करना आवश्यक है।
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि समाज में महापुरुषों के कार्यों को जाति और पंथ के भेद से ऊपर उठकर स्वीकार करना चाहिए। इसी भावना से संघ के स्वयंसेवकों ने नवम गुरु श्री तेग बहादुर जी के बलिदान के 350वें वर्ष के अवसर पर देशभर में दो हजार से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए, जिनमें सात लाख से अधिक लोग सहभागी बने।
इसी प्रकार राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ भी उत्साहपूर्वक मनाई गई। आगामी वर्ष में संत शिरोमणि रविदास जी के 650वें प्राकट्य वर्ष पर भी विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि आगामी वर्ष में संघ के नियमित प्रशिक्षण वर्गों के अंतर्गत 11 क्षेत्रों के वर्गों तथा नागपुर के एक वर्ग सहित कुल 96 प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किए जाएंगे।



