प्लास्टर को तरसा जेएलएन अस्पताल के आर्थोपेडिक विभाग का सेमिनार हॉल

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अजमेर।
जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय में आर्थोपेडिक विभाग मरीजों की टूटी हड्डियों का प्लास्टर कर उन्हें भले ही स्वस्थ कर देता हो, लेकिन खुद उसके ही जर्जर हो रहे सेमिनार हॉल की बिगडी दशा को संवारना उसके बस में नहीं है। सीलन के कारण हॉल की दीवारें और छत के टूटे प्लास्टर से झांकते सरिए खुद बदहाली बयां कर रहे हैं। जर्जर हॉल का प्लास्टर गिरकर किसी भी समय हादसे का कारण बन सकता है।

बुधवार को इसी सेमिनार हॉल में मीडिया का मजमा लगा। मौका था लग्जरी स्टाइल वाले पुष्कर स्थित जॉली वुड रिसॉर्ट में आगामी 9 से 11 जनवरी को जेएलएन मेडिकल कॉलेज एवं अजयमेरु आर्थोपेडिक सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में होने वाले राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय आर्थोपेडिक सम्मेलन (ROSACON 2026) की जानकारी देने का। दीगर बात है कि तीन दिन तक चलने वाले इस सम्मेलन में लाखों रुपए का बजट स्वाहा होगा। आयोजकों का दावा है कि देश-विदेश से करीब 500 से अधिक डेलीगेट्स तथा 100 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी भाग लेंगे।

सवाल यह उठना लाजमी है कि संभाग के मरीजों का भार ढो रहे जेएलएन अस्पताल की तकदीर कब बदलेगी। अस्पताल के विकास के लिए 191 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिलने से कायापलट होने और छत पर हेलीपैड बनने का सरकारी सपना कब सच होगा?

फिलहाल तो आर्थोपेडिक विभाग के हिस्से वाली अस्पताल की पुरानी इमारत अनदेखी का दंश झेल रही है। यह किसी बडे हादसे को न्योता देने के समान है। कुछ हिस्से तो इतने जोखिम भरे हैं कि वहां से गुजरने पर भी भय लगता लगता है। शुक्र है इस सबके बावजूद अपने आरामदेह निजी आवासों में फीस लेकर मरीजों को प्राइवेट डाक्टरों की तरह देखने वाले सरकारी डाक्टर मरीजों की तीमारदारी के लिए वक्त निकाल लेते हैं।

सम्मेलन में क्या खास

सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ एसके भास्कर ने बताया कि तीन दिन के दौरान आर्थोपेडिक सर्जरी की सभी उप विशेषताओं जैसे ट्रॉमा, जॉइंट रिप्लेसमेंट, स्पाइन सर्जरी, स्पोर्टस सर्जरी, स्पोर्टस इंजरी, हैड सर्जरी, पीडियाट्रिक आर्थोपेडिक्स, आन्को आर्थोपेडिक्स एवं आधुनिक रोबोटिक सर्जरी पर विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। सम्मेलन में पहली बार कैडेवरिक वर्कशॉप रोबोटिक जॉइन्ट रिप्लेसमेंट वर्कशॉप का आयोजन किया जाएगा।