कर्नाटक में विधायक की भतीजी अंकिता पर सरकारी वेतन लेते हुए PG करने का आरोप, जांच के बाद सेवा से हटाया गया

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बेंगलूरु। कर्नाटक के बागलकोट जिले में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा एक मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। नम्मा क्लिनिक में मेडिकल ऑफिसर के पद पर कार्यरत डॉ. अंकिता आर यारगल पर आरोप है कि वह ड्यूटी से अनुपस्थित रहने के दौरान एक निजी मेडिकल कॉलेज में पोस्ट-ग्रेजुएट मेडिकल कोर्स कर रही थीं और इस अवधि में उन्हें करीब 75 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन मिलता रहा।

डॉ. अंकिता बागलकोट के कांग्रेस विधायक उमेश मेटी की भतीजी बताई गई हैं। मामले में बागलकोट जिला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गजानन बाले ने जांच शुरू की है। अधिकारियों के मुताबिक डॉ. अंकिता को जांच के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था, लेकिन वह शुरुआती सुनवाई में नहीं पहुंचीं। इसके बाद उन्हें नोटिस जारी कर 18 सितंबर को सुबह 10 बजे जिला पंचायत कार्यालय के कमरा नंबर 11 में होने वाली अगली जांच में उपस्थित होने को कहा गया है।

नम्मा क्लिनिक में अनुपस्थिति का आरोप

रिपोर्टों के अनुसार डॉ. अंकिता यारगल की नियुक्ति बागलकोट के वांबे कॉलोनी स्थित नम्मा क्लिनिक में मेडिकल ऑफिसर के तौर पर हुई थी। आरोप है कि मार्च 2026 में उन्होंने एक निजी मेडिकल कॉलेज में एमडी पैथोलॉजी पाठ्यक्रम में दाखिला लिया, लेकिन इसके बावजूद मेडिकल ऑफिसर के पद से इस्तीफा नहीं दिया।

स्थानीय शिकायतों के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने क्लिनिक का निरीक्षण किया। रिपोर्टों में दावा किया गया कि मरीजों ने डॉक्टर के नियमित रूप से उपलब्ध नहीं रहने की शिकायत की थी और कई मौकों पर नर्सों द्वारा मरीजों को संभालने की बात सामने आई।

वेतन और दोहरी भूमिका पर उठे सवाल

मामले में मुख्य सवाल यह है कि पूर्णकालिक पोस्ट-ग्रेजुएट मेडिकल कोर्स के दौरान सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में मेडिकल ऑफिसर के पद पर उनकी उपस्थिति और वेतन भुगतान किस आधार पर जारी रहा। अधिकारियों ने इसे कथित अनधिकृत दोहरी भूमिका और ड्यूटी में लापरवाही से जोड़कर जांच शुरू की है।

जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर वेतन या मानदेय की वसूली सहित अन्य विभागीय कार्रवाई की संभावना भी जताई गई है। कुछ रिपोर्टों में मामले को मेडिकल प्रोफेशन से जुड़े आचार नियमों के संदर्भ में भी जांचे जाने की बात कही गई है।

पिता ने कहा- मेरे कार्यकाल में वेतन जारी नहीं किया

डॉ. अंकिता के पिता डॉ. राजकुमार यारगल बागलकोट के जिला स्वास्थ्य अधिकारी हैं। उन्होंने मीडिया से कहा कि उनकी बेटी की नियुक्ति उनके कार्यकाल से पहले हुई थी और उनके कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने उसका वेतन जारी नहीं किया। उन्होंने यह भी बताया कि अंकिता को पद से हटाने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके बाद सामने आई रिपोर्टों के अनुसार डॉ. अंकिता को नम्मा क्लिनिक की मेडिकल ऑफिसर की सेवा से तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। साथ ही सरकारी नुकसान होने की स्थिति में संबंधित राशि की वसूली की चेतावनी भी दी गई है।

विधायक का नाम आने से मामला चर्चा में

मामले में कांग्रेस विधायक उमेश मेटी की रिश्तेदार का नाम सामने आने के कारण यह राजनीतिक रूप से भी चर्चा में है। हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार विधायक या डॉ. अंकिता की ओर से आरोपों पर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले आरोपों को अंतिम निष्कर्ष के रूप में देखना उचित नहीं होगा।

फिलहाल जिला प्रशासन की जांच और 18 सितंबर को प्रस्तावित सुनवाई पर सबकी नजर है। जांच में यह स्पष्ट होगा कि ड्यूटी, उपस्थिति, वेतन भुगतान और पोस्ट-ग्रेजुएट अध्ययन के बीच नियमों का उल्लंघन हुआ था या नहीं।