चुनाव आयोग को मोदी सरकार ने दी पूर्ण स्वायत्तता, कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा का पलटवार

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पीयूष गोयल बोले—‘वोट चोरी’ के आरोप बेबुनियाद; चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया और कांग्रेस के पुराने कार्यकाल पर उठाए सवाल
नई दिल्ली। चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस और विपक्ष के आरोपों पर पलटवार किया है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने चुनाव आयोग को स्वतंत्र रूप से काम करने की स्वायत्तता दी है। उन्होंने कांग्रेस के शासनकाल का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि पहले चुनाव आयोग के अधिकारियों को राजनीतिक लाभ दिए जाने के उदाहरण सामने आए थे।

भाजपा मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में गोयल के साथ केंद्रीय मंत्री एवं जनता दल (यू) के नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह भी मौजूद रहे। गोयल ने कांग्रेस के चुनाव आयोग से मिलीभगत और ‘वोट चोरी’ संबंधी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष को अपने पुराने रिकॉर्ड पर भी विचार करना चाहिए।

राहुल गांधी पर साधा निशाना

पीयूष गोयल ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी की लगातार चुनावी हार के पीछे उनका नेतृत्व भी एक कारण है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है, लेकिन अपने शासनकाल में आयोग के साथ उसके व्यवहार पर चर्चा नहीं करती।

गोयल ने एसआईआर की प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए दावा किया कि कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने भी इस प्रक्रिया के सकारात्मक प्रभावों की बात कही है। उन्होंने शशि थरूर, रमेश चेन्नीथला और केरल के मुख्यमंत्री के बयानों का हवाला दिया। साथ ही, पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी की ओर से चुनाव आयोग के कामकाज की प्रशंसा किए जाने का भी उल्लेख किया।

भाजपा नेता ने कहा कि एक ओर कांग्रेस के कुछ नेता चुनाव प्रक्रिया की प्रशंसा करते हैं, वहीं दूसरी ओर पार्टी नेतृत्व चुनाव आयोग पर ‘वोट चोरी’ जैसे आरोप लगाता है।

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया का किया उल्लेख

गोयल ने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2023 में बनाए गए कानूनी प्रावधान के तहत चयन समिति में प्रधानमंत्री के साथ लोकसभा में विपक्ष के नेता को भी शामिल किया गया। उनके अनुसार, यह व्यवस्था नियुक्ति प्रक्रिया में विपक्ष की भागीदारी सुनिश्चित करती है।

उन्होंने कांग्रेस के शासनकाल में चुनाव आयोग के अधिकारियों की नियुक्तियों और बाद में उन्हें मिले पदों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि अतीत में राजनीतिक लाभ पहुंचाने के उदाहरण रहे हैं। गोयल ने कहा कि मोदी सरकार में आयोग के अधिकारियों को स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर दिया गया है।

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों के उदाहरण दिए

भाजपा नेता ने अपने आरोपों के समर्थन में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों और चुनाव अधिकारियों से जुड़े कुछ मामलों का जिक्र किया। उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन के चुनावी राजनीति में उतरने, एमएस गिल को पद्म विभूषण दिए जाने और कुछ पूर्व चुनाव अधिकारियों को बाद में राजनीतिक या प्रशासनिक जिम्मेदारियां मिलने के उदाहरण पेश किए।

गोयल ने इन घटनाओं को कांग्रेस के शासनकाल में चुनाव आयोग के अधिकारियों के साथ कथित राजनीतिक व्यवहार से जोड़ते हुए सवाल उठाए। उन्होंने केरल के पूर्व मुख्य चुनाव अधिकारी टीकाराम मीणा और रतन यू केलकर के मामलों का भी उल्लेख किया।

हालांकि, नियुक्तियों, सम्मान और बाद की राजनीतिक भूमिकाओं को लेकर भाजपा की ओर से लगाए गए आरोपों को स्वतंत्र तथ्यों और संबंधित व्यक्तियों के पक्ष के साथ अलग से परखा जाना जरूरी है। किसी अधिकारी को बाद में कोई पद मिलने मात्र से यह अपने आप साबित नहीं होता कि पहले उसके कामकाज में राजनीतिक पक्षपात हुआ था।

चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर बहस जारी

चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया देश की चुनावी व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। भाजपा ने जहां मोदी सरकार के कार्यकाल में आयोग को स्वायत्तता मिलने का दावा किया है, वहीं कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।