मुंबई मेयर चुनाव : भाजपा और शिंदे सेना की दावेदारी में फंसा पेंच

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मुंबई। मुंबई में सत्ता पक्ष के भीतर मेयर पद को लेकर रस्साकशी शुरू हो गई है क्योंकि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपनी पार्टी के लिए ढाई साल के कार्यकाल की मांग की है।

शिंदे गुट की शिवसेना की प्रवक्ता शीतल म्हात्रे का तर्क है कि बालासाहेब ठाकरे के जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में यह पद उनकी पार्टी को मिलना चाहिए। वहीं भाजपा सबसे बड़ा दल होने के नाते इस महत्वपूर्ण पद को अपने पास रखने की इच्छुक है।

नए मेयर का चुनाव अब 26 जनवरी के बाद होने की संभावना है क्योंकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस वर्तमान में दावोस के निवेश शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने गए हैं। उनके 25 जनवरी को लौटने के बाद ही नगर विकास विभाग मेयर पद के लिए आरक्षण की लॉटरी निकालेगा और चुनाव का औपचारिक कार्यक्रम घोषित किया जाएगा।

बीएमसी चुनाव में भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी है जबकि एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 29 सीटें जीती हैं जिससे महायुति गठबंधन ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है।

मुंबई के मेयर का चयन एक विशेष रोटेशनल लॉटरी सिस्टम के जरिए होता है जिसमें अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए पद आरक्षित किए जाते हैं। इस बार मेयर पद के लिए भाजपा की ओर से मकरंद नार्वेकर, योगिता कोली और नवनाथ बन जैसे नामों की चर्चा है।

जबकि शिंदे सेना की ओर से अंकित प्रभु का नाम आगे चल रहा है। अंतिम फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि लॉटरी में मेयर पद किस वर्ग के लिए आरक्षित होता है और दोनों दलों के बीच क्या समझौता होता है।

विपक्षी खेमे में उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने 65 सीटें हासिल कर खुद को मजबूत स्थिति में रखा है लेकिन बहुमत से दूर होने के कारण उनकी भूमिका सीमित नजर आ रही है। फिलहाल सभी की नजरें 26 जनवरी के बाद होने वाली गतिविधियों पर टिकी हैं जब बीएमसी कमिश्नर मतदान की तारीख और श्रेणी की घोषणा करेंगे। मुंबई का अगला मेयर कौन होगा यह राजनीतिक तालमेल और आरक्षण की लॉटरी के संयोजन से तय होगा।