काठमांडू। नेपाल की राजधानी काठमांडू के पूर्व मेयर और रैपर से राजनेता बने बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्रता पार्टी बड़ा बहुमत हासिल कर नेपाल की सत्ता पर काबिज़ होने जा रही है। इस चुनाव में शाह ने अपने निकटतम विरोधी उम्मीदवार और पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली को मतगणना में बहुत ज्यादा पीछे छोड़ दिया है जबकि एक दूसरे पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड ने जीत हासिल कर ली है।
शाह ने झापा-5 सीट पर ओली को चुनौती दी और अपने फैसले को सही साबित कर दिखाया। इस सीट पर कुल 1,06,372 वोट डाले गए और वोटों की गिनती चल रही है। गणितीय तरीके से यह कहा जा सकता है कि इस चुनाव में वह जीत हासिल कर चुके हैं। इसका कारण यह है कि 20,000 से भी कम की गिनती बाकी है। बालेन इस समय 43,000 वोटों से आगे चल रहे हैं और गणना के लिए बचे हुए वोटों को देखते हुए उनकी हार असंभव है। उनके विरुद्ध खड़े नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री ओली को सिर्फ 16,350 वोट मिले हैं और उनकी हार तय हो गई है।
पूरे देश में आरएसपी के पक्ष में चल रही तेज लहर के बावजूद पूर्व प्रधानमंत्री दहल 10,240 मतों के साथ रुकुम पूर्व-1 सीट जीतने में सफल रहे हैं। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार आरएसपी ने 60 से अधिक सीटों पर जीत हासिल कर ली है। दूसरी ओर, नेपाली कांग्रेस ने जहां सिर्फ नौ पर जीत हासिल की है। ओली की पार्टी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) 3, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी 2 सीटें जीत चुकी हैं। इन आंकड़ों के आने के बाद शाह का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है।
जेनरेशन-ज़ेड के आंदोलन से पहले नेपाल की सत्ता पर काबिज़ रही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को मौजूदा आम चुनाव में करारी शिकस्त मिली है। पार्टी के उपाध्यक्ष बिष्णु पौडेल, गोकर्ण बिस्टा, महासचिव शंकर पोखरेल, सचिव महेश बसनेत, भानुभक्त ढकाल और राजन भट्टराई को हार का सामना करना पड़ा है।
नेपाल की संसद (प्रतिनिधि सभा) की कुल 275 सीटों के लिए पांच मार्च को मतदान संपन्न हुआ था। इनमें से 165 सीटों पर प्रत्यक्ष मतदान के जरिए और शेष 110 सीटों पर आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के माध्यम से चुनाव कराए गए। निर्वाचन आयोग के अनुसार इस बार लगभग 60 प्रतिशत मतदान हुआ है।
उल्लेखनीय है कि सितंबर 2025 में हुए व्यापक भ्रष्टाचार विरोधी छात्र आंदोलनों के बाद ओली सरकार गिर गई थी और संसद भंग कर दी गई थी। इसके बाद गठित अंतरिम सरकार की देखरेख में ये चुनाव संपन्न हुए। निर्वाचन आयोग का लक्ष्य 9 मार्च तक मतगणना पूरी कर अंतिम परिणाम घोषित करने का है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेपाल के युवा मतदाताओं ने पारंपरिक नेतृत्व को नकारते हुए एक नए और आधुनिक राजनीतिक दृष्टिकोण को चुना है। शाह अगर सत्ता संभालते हैं तो न केवल नेपाल की आंतरिक राजनीति बल्कि भारत के साथ उसके द्विपक्षीय संबंधों के लिए भी एक नए युग की शुरुआत हो सकती है।



