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पीपली से होगा कैंसर का इलाज

भोजन को मसालेदार बनाने के लिए मशहूर भारतीय पीपली का उपयोग जल्द ही कैंसर के इलाज की प्रभावी दवा तैयार करने में किया जा सकता है।
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जैव रसायन विज्ञान जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार भारतीय पीपली में एक ऐसा रसायन पाया जाता है जो आपके शरीर को उस एंजाइम को उत्पादित करने से रोकता है, जो सामान्यत: बड़ी संख्या में ट्यूमर में पाया जाता है।
यूटी दक्षिण-पश्चिम मेडिकल सेंटर के वैज्ञानिकों ने एक भारतीय मसाले (पीपली) के पौधे में कैंसर रोधी गुण का पता लगाया है। पीपली में पाया जाने वाला यह रसायन पिपरलोंगुमाइन (पीएल) कई प्रकार के कैंसर जैसे प्रोस्टेट, स्तन, फेफड़े, लिंफोमा, ल्यूकेमिया और प्राथमिक मस्तिष्क ट्यूमर और अमाशय के कैंसर में लाभकारी है ।
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जैव रसायन और विकिरण कैंसर के सहायक प्रोफेसर डाक्टर केनिथ वेस्टओवर ने कहा, ‘हम आशान्वित हैं कि हमारी संरचना अतिरिक्त दवा के विकास में मददगार होगी और इसका उपयोग विभिन्न प्रकार के कैंसर के उपचार के लिए किया जा सकेगा।’
क्या आप हैं आरामतलब जिंदगी की शौकीन ? तो आप पर नजरें गड़ाए बैठा है बुढ़ापा

लास ऐंजिलिस, अधेड़ उम्र की महिलाओं को अगर आराम तलबी पसंद है तो उन्हें सावधान हो जाना चाहिए क्योंकि ऐसी महिलाओं को बुढ़ापा बहुत तेजी से अपनी चपेट में लेता है । ऐसी महिलाएं जो दिन में दस घंटे से अधिक समय तक कम शारीरिक मेहनत वाला कामकाज करती हैं उनकी कोशिकाएं जैविक रूप से आठ साल अधिक बूढ़ी हो जाती हैं ।
अमेरिका में यूनिवर्सिटी आफ कैलिफोर्निया के सेन डियागो स्कूल आफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने अपने एक शोध में पाया कि ऐसी महिलाएं जो प्रति दिन 40 मिनट से कम समय तक हल्की से भारी शारीरिक मेहनत का काम करती हैं उनके शरीर में टेलोमीरिज छोटे होते हैं । टेलोमीरिज गुणसूत्रों को विनष्ट होने से बचाने वाले डीएनए स्ट्रेंड्स के अंतिम हिस्सों पर लगे छोटे छोटे कैप होते हैं । और उम्र बढऩे के साथ ये तेजी से और छोटे होते जाते हैं ।
जैसे जैसे उम्र बढ़ती जाती है ये टेलोमीरिज प्राकृतिक रूप से छोटे और नाजुक होते जाते हैं लेकिन स्वास्थ्य और जीवनशैली जैसे कि मोटापा तथा धूम्रपान से यह प्रक्रिया और तेज हो जाती है । टेलोमीरिज के छोटे होने का संबंध हृद्य संबंधी बीमारियों और कई प्रकार के प्रमुख कैंसरों से होता है ।
यूसी सेन डियागो की शोध टीम के प्रमुख लेखक अलादीन शादाब कहते हैं , ‘‘ हमारे शोध में यह पता चला है कि अगर आरामतलब जीवनशैली है तो कोशिकाएं तेजी से बूढ़ी होती हैं । वास्तविक उम्र हमेशा जैविक उम्र के बराबर नहीं होती है।’’
शोधकर्ताओं का मानना है कि उन्होंने पहली बार इस बात का पता लगाया है कि किस प्रकार आरामतलब जीवनशैली और कसरत मिलकर बढ़ती उम्र को प्रभावित कर सकते हैं ।
इस शोध में 64 से 95 साल की उम्र की करीब 1500 महिलाओं ने भाग लिया।
शादाब ने बताया, ‘‘ हमने पाया कि जो महिलाएं अधिक समय तक बैठी रहती हैं लेकिन यदि वे प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट तक कसरत करती हैं तो उनके टेलोमीरिज छोटे नहीं पाए गए । ’’
वह कहते हैं, ‘‘ कसरत के फायदों के बारे में उसी समय बताया जाना चाहिए जब हम युवा होते हैं और शारीरिक गतिविधियां हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा होनी चाहिए , यहां तक कि 80 साल की उम्र में भी ।’’
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