सिरोही कार्यवाहक आयुक्त आचार्य की त्वरित राहत की उम्मीद पर फिर पानी

76

सबगुरु न्यूज-सिरोही। सिरोही और आबू (माउण्ट आबू) के कार्यवाहक आयुक्त के पद पर कार्यरत राजस्व अधिकारी आशुतोष आचार्य को राजस्थान हाईकोर्ट से त्वरित राहत मिलने की उम्मीद पर पानी फिर गया है। सिरोही के कांग्रेस के निवर्तमान पार्षद भरत धवल की ओर से लगाई गई रिट पिटिशन पर 9 मार्च को आदेश देते हुए राजस्थान उच्च न्यायालय ने डीएलबी और सिरोही जिला कलेक्टर के द्वारा आशुतोष आचार्य को सिरोही और आबू नगर पालिका का कार्यवाहक आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार देने के आदेश पर रोक लगा दी थी। इसके बाद आशुतोष आचार्य को सिरोही नगर परिषद में राजस्व अधिकारी के अपने मूल पद पर ही काम करना था। इस निर्णय के खिलाफ आचार्य अपील में गए थे, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली।

-लगाई थी केविएट

आशुतोष आचार्य राजस्थान हाईकोर्ट के द्वारा 9 मार्च को दिए गए निर्णय के खिलाफ अपील में गए थे। लेकिन, मूल आवेदक भरत धवल ने पहले ही इस प्रकरण में केवीएट लगाई हुई थी। आशुतोष आचार्य की अपील पर मंगलवार को सुनवाई हुई। लेकिन, केविएट के कारण मूल अपीलकर्ता भरत धवल का पक्ष भी जाना गया। ऐसे में आशुतोष आचार्य को तुरंत कोई राहत नहीं मिल पाई और चार सप्ताह बाद इस प्रकरण की सुनवाई की तिथि निर्धारित की गई। ऐसे में अब आशुतोष अचार्य चार सप्ताह तक सिरोही और आबू के आयुक्त की जगह सिरोही के राजस्व अधिकारी के पद पर ही कार्यरत रहेंगें।

– आचार्य के साथ ओटाराम देवासी भी आए निशाने पर

भरत कुमार की अपील पर 9 मार्च को आए राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश के दौरान ही सिरोही की रामझरोखा मंदिर के पट्टे को निरस्त करने की नगर परिषद सिरोही की कार्रवाई को भी राजस्थान हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया है। रामझरोखा मंदिर की जमीन को खुर्दबुर्द करने के मामले में ओटाराम देवासी और उनके पुत्र विक्रम देवासी को संयम लोढा के साथ भाजपा के नेता तेजराज सोलंकी ने भी घेरा था। इसके बाद ओटाराम देवासी ने कहा था कि उन्होंने जिला कलेक्टर को बोलकर नगर परिषद आयुक्त की जांच कमेटी बनाई है। तब नगर परिषद सिरोही के कार्यवाहक आयुक्त आशुतोष आचार्य थे।

उनके द्वारा ही दी गई जांच रिपोर्ट के आधार पर सिरोही के रामझरोखा के पट्टे निरस्त करने के निर्णय को राजस्थान हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। इस मामले की हाईकोर्ट में पैरवी नगर परिषद ने ही की थी। इस प्रकिया के दौरान सिरोही नगर परिषद के आयुक्त आशुतोष आचार्य थे। इस निर्णय की प्रतिलिपि बाहर आने के बाद संयम लोढा ने फिर ओटाराम देवासी पर आरोप लगाया था कि सरकार ने बाबू स्तर के कार्मिक को सिरोही में बैठाकर रामझरोखा मंदिर की हाईकोर्ट में चल रही कार्रवाई में नगर परिषद ने सही ढंग से पैरवी नहीं की। उनका आरोप था कि कोर्ट में इस जमीन के मदिर की जमीन होने के तथ्य नहीं रखे जिससे हिन्दुओं के प्रमुख मंदिर रामझरोखा की भूमि के पट्टे निरस्ती की कार्रवाई को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया।

-फिर नियुक्ति देवासी की आफत

भरत कुमार की अपील पर निर्णय के खिलाफ आचार्य हाईकोर्ट में गए थे। उन्हें आशा थी कि मंगलवार को सुनवाई के दौरान 9 मार्च के आदेश पर रोक लग जाएगी। सूत्रों के अनुसार आचार्य के लिए सिरोही में लाॅबिंग करने वाले नेताओं ने सर्किट हाउस में सत्ताधारी दल के नेताओं से मिलकर आबू में आयुक्त की स्थाई नियुक्ति नहीं करवाने की राहत मांगी थी। विभागीय सूत्रों की मानें तो सिरोही नगर परिषद में लगाए गए कार्यवाहक आयुक्त को भी डीडीआर से दिए जाने वाले आहरण और वितरण के अधिकार को भी रुकवाया गया था।

लेकिन, आचार्य को राहत नहीं मिलने पर अब ज्यादा देर तक यहां स्थाई नियुक्तियां रोकना और रामझरोखा के मामले में आशुतोष आचार्य के कार्यकाल में हाईकोर्ट में कमजोर पैरवी करने की बात सामने आने के बाद आचार्य की फिर से जिले में बहाली ओटाराम देवासी के खिलाफ संयम लोढा को सबसे मजबूत राजनीतिक अस्त्र देने वाला होगा। ओटाराम देवासी हिन्दुत्व के नाम पर ही सिरोही की सीट जीते हैं। ऐसे में ओटाराम देवासी के कार्यकाल में न्यायालय में मंदिर की जमीन को बचाने के लिए कथित रूप से जानबूझकर कमजोर पैरवी करने के आरोप में घिरे अधिकारी को लाभ वाले पदो पर आसीन हो जाना हिन्दू सेंटीमेंट वाले सिरोही में देवासी के खिलाफ एक नया वातावरण बनाएगा।