गलत कामों को बंद करने की ठान चुका हूं, विरोध के बावजूद पीछे नहीं हटूंगा : मोदी

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इंडिया मोबाइल कांग्रेस में प्रधानमंत्री बोले- डीबीटी से करीब 5 लाख करोड़ रुपये गलत हाथों में जाने से बचे

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि सरकार ने तकनीक और डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल से सरकारी योजनाओं में होने वाले वित्तीय रिसाव को रोकने की दिशा में बड़ा बदलाव किया है। उन्होंने दावा किया कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए करीब 50 लाख करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों तक पहुंचे हैं और इससे लगभग 5 लाख करोड़ रुपये गलत हाथों में जाने से बचाए गए हैं।

प्रधानमंत्री ने यह बात नई दिल्ली के यशोभूमि में इंडिया मोबाइल कांग्रेस के 10वें संस्करण के उद्घाटन के दौरान कही। उन्होंने कहा कि सरकार ने ऐसी व्यवस्थाओं को खत्म करने का संकल्प लिया है, जिनमें सरकारी धन के गलत इस्तेमाल या लीकेज की गुंजाइश रहती थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि विरोध करने वाले कितना भी शोर करें, वह इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों से पीछे नहीं हटेंगे।

‘जिनकी मुफ्त की कमाई बंद हुई, वे मोदी को क्यों पसंद करेंगे’

अपने संबोधन में मोदी ने कहा कि डिजिटल व्यवस्था लागू होने से उन लोगों के लिए मुश्किलें पैदा हुई हैं, जो पुरानी व्यवस्था में सरकारी धन के रिसाव से लाभ उठाते थे। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों की ‘मुफ्त की कमाई’ बंद हुई है, इसलिए उनका विरोध स्वाभाविक है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका उद्देश्य ऐसे सभी गलत तरीकों को रोकना है और इसके लिए उन्होंने दृढ़ संकल्प लिया है। उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि पुरानी व्यवस्था कायम रहती तो करीब 5 लाख करोड़ रुपये लीकेज में चले जाते और ऐसे लोगों की जेब में पहुंच सकते थे। उनके अनुसार अब यह राशि वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंच रही है और बची हुई राशि का इस्तेमाल दूसरे जरूरी कार्यों में किया जा रहा है।

मोबाइल बना सुशासन का माध्यम

मोदी ने कहा कि पिछले एक दशक में देश के दूरसंचार क्षेत्र में हुए बदलावों का सीधा फायदा आम नागरिकों को मिला है। मोबाइल फोन अब केवल बातचीत या संदेश भेजने का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह सुशासन और सरकारी सेवाओं तक पहुंच का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है।

उन्होंने कहा कि आज सरकार की सैकड़ों सेवाएं मोबाइल फोन के जरिए उपलब्ध हैं। पहले बैंक, अस्पताल और सरकारी कार्यालयों तक पहुंचने के लिए लोगों को शहरों या जिला मुख्यालयों तक जाना पड़ता था, जिसमें समय और पैसा दोनों खर्च होते थे। डिजिटल गवर्नेंस ने इस व्यवस्था को काफी हद तक बदल दिया है।

पीएम किसान योजना का भी किया उल्लेख

प्रधानमंत्री ने पीएम किसान सम्मान निधि का उदाहरण देते हुए कहा कि योजना के तहत अब तक 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक राशि किसानों के बैंक खातों में पहुंचाई जा चुकी है। उनके मुताबिक लाभार्थी के मोबाइल फोन पर राशि जमा होने का संदेश भी पहुंचता है।

मोदी ने कहा कि डिजिटल माध्यमों ने उन छोटे किसानों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में मदद की है, जो पहले ऐसी योजनाओं की पहुंच से बाहर रह जाते थे।

डिजिटल डिवाइड कम करने पर जोर

प्रधानमंत्री ने कहा कि करीब एक दशक पहले भारत के सामने डिजिटल डिवाइड बड़ी चुनौती थी। आधुनिक तकनीक तक पहुंच सीमित वर्ग तक थी, लेकिन डिजिटल इंडिया अभियान के जरिए मोबाइल फोन को केंद्र में रखकर तकनीक के लोकतंत्रीकरण की दिशा में काम किया गया।

उन्होंने कहा कि दूरसंचार क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ भारत में मोबाइल फोन और टेलीकॉम हार्डवेयर के निर्माण को भी बढ़ावा दिया गया। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री ने बताया कि देश में अब 5.5 लाख 5G बेस स्टेशन हैं और 2022 की तुलना में मोबाइल इंटरनेट की गति करीब 10 गुना बढ़ी है।

फोन और नेटवर्क की सुरक्षा भी प्राथमिकता

मोदी ने तेजी से बढ़ते डिजिटल इस्तेमाल के साथ साइबर और नेटवर्क सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि दूरसंचार और डिजिटल तकनीक के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए फोन और नेटवर्क की सुरक्षा मजबूत करना जरूरी है।

उन्होंने डीपफेक तकनीक को भी एक बड़ी चुनौती बताते हुए इससे निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर साझा ढांचा तैयार करने की जरूरत बताई। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं रहना चाहता, बल्कि देश को ऐसे मुकाम तक ले जाना है जहां उत्पाद, डिजाइन, तकनीक और बौद्धिक संपदा का निर्माण भी भारत में हो।

5जी से आगे की तकनीकी यात्रा पर जोर

इंडिया मोबाइल कांग्रेस के मंच से प्रधानमंत्री ने भारत की दूरसंचार यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि 2022 में इसी मंच से 5जी की शुरुआत हुई थी। इसके बाद देश ने 5जी रोलआउट से आगे बढ़कर इसकी पहुंच को व्यापक बनाया और अब देश के प्रत्येक जिले तक 5जी पहुंचने की बात सामने रखी गई है।

इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 का आयोजन ‘Scale Without Boundaries’ थीम के तहत किया जा रहा है। इसमें दूरसंचार क्षेत्र के प्रतिनिधियों, तकनीकी विशेषज्ञों, स्टार्टअप, निवेशकों और वैश्विक उद्योग जगत के प्रतिनिधियों की भागीदारी है।

प्रधानमंत्री के संबोधन में डिजिटल तकनीक के जरिए सरकारी सेवाओं की पहुंच बढ़ाने, वित्तीय रिसाव रोकने, दूरसंचार बुनियादी ढांचे के विस्तार और भारत में तकनीकी निर्माण को बढ़ावा देने पर विशेष जोर रहा।