टोक्यो। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जापान यात्रा के आज दूसरे दिन शनिवार को प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा के साथ बुलेट ट्रेन में यात्रा की।
मोदी ने जापान में बुलेट ट्रेन की सवारी की तस्वीर भी सोशल मीडिया पर पोस्ट की है। जापान के प्रधानमंत्री इशिबा ने मोदी के साथ तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ सेंडई की ओर जा रहा हूं। कल रात से ही सिलसिला जारी है और मैं आपके साथ कार में रहूंगा।
मोदी जापानी प्रधानमंत्री इशिबा बुलेट ट्रेन से सफर करते दिखे। प्रधानमंत्री मोदी और जापानी प्रधानमंत्री दोनों ने बुलेट ट्रेन से जापान के सेंडाई शहर तक की सवारी की। इस दौरान उन्होंने पूर्वी जापान रेलवे कंपनी में प्रशिक्षण ले रहे भारतीय ट्रेन ड्राइवरों से मुलाकात की।
बुलेट ट्रेन की यात्रा के बाद प्रधानमंत्री ने सेंडई में एक सेमीकंडक्टर फैक्ट्री का दौरा किया। इस दौरे के दौरान भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच औद्योगिक और अंतरिक्ष सहयोग पर महत्वपूर्ण सहमति बनी है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री की जापान यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार और आयात शुल्क नीतियों के चलते भारत-अमेरिका संबंधों में कमी आयी है। जापान की यात्रा के बाद मोदी चीन के तियानजिन शहर जाएंगे, जहां वह 31 अगस्त और एक सितंबर को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वार्षिक सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।
मोदी ने इशिबा को भेंट किया कीमती पत्थर का बाउल,उनकी पत्नी को पश्मीना शॉल
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जापान यात्रा के दौरान जापानी प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा और उनकी पत्नी को शानदार उपहार भेंट किए जिनमें इशिबा के लिए कीमती पत्थर से बना बाउल का सेट और उनकी पत्नी के लिए पश्मीना शॉल शामिल हैं। चांदी की चॉपस्टिक्स से सजे विंटेज कीमती पत्थर के बाउल भारतीय कलात्मकता और जापानी पाक कला की परंपरा का अनूठा मिश्रण हैं।
चार छोटे बाउल और चांदी की चॉपस्टिक्स के साथ भूरे रंग के मूनस्टोन से बने बड़े बाउल से सुसज्जित यह सेट जापान के डोनबुरी और सोबा अनुष्ठानों से प्रेरित है। आंध्र प्रदेश से प्राप्त यह मूनस्टोन बेहद चमकीना और प्रेम, संतुलन तथा सुरक्षा का प्रतीक है। बाउल का आधार मकराना संगमरमर है जिसमें राजस्थान की पारंपरिक शैली में अर्ध-कीमती पत्थर जड़े हैं।
प्रधानमंत्री की ओर से इशिबा की पत्नी को लद्दाख की चांगथांगी बकरी के महीन ऊन से बना पश्मीना शॉल भेंट किया गया है। इसे हल्का, मुलायम और गर्म होने के कारण दुनिया भर में सराहा जाता है। कश्मीरी कारीगरों द्वारा हाथ से बुनी गई यह शॉल सदियों पुरानी परंपरा को संजोए हुए है जिसे कभी राजघरानों में की शान माना जाता था। इस शॉल का आधार हाथीदांत का है और इसमें गुलाबी और लाल रंग के नाज़ुक पुष्प और पैस्ले डिज़ाइन हैं जो पारंपरिक कश्मीरी डिज़ाइन और शिल्प कौशल को दर्शाते हैं।
यह हाथ से पेंट किए गए कागज की लुगदी के डिब्बे में आता है जिस पर पुष्प और पक्षी की आकृतियां सजी हैं। जिससे इसकी सुंदरता और बढ़ जाती है। शॉल और बॉक्स मिलकर कश्मीर की कलात्मकता और विरासत का प्रतीक हैं।