राहुल गांधी का पीएम मोदी पर विदेशी मदद से सत्ता में आने का आरोप, खुली बहस की दी चुनौती

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बीच विदेशी समर्थन और देश की राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है। राहुल गांधी ने सोमवार को प्रधानमंत्री पर विदेशी मदद के सहारे सत्ता में आने और अब तक पद पर बने रहने का आरोप लगाया। उन्होंने प्रधानमंत्री को इस मुद्दे पर किसी भी मंच पर और किसी भी समय खुली बहस करने की चुनौती भी दी।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री से कहा कि देश से झूठ बोलना बंद करें। उन्होंने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी विदेशी मदद से प्रधानमंत्री बने और विदेशी मदद के सहारे ही इस पद पर बने हुए हैं।

राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में देश की आर्थिक व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि देश की आर्थिक व्यवस्था पूरी तरह विदेशियों के नियंत्रण और समर्थन से संचालित हो रही है। साथ ही उन्होंने विदेशी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के प्रधानमंत्री के समर्थन में होने का आरोप लगाया।

‘किसी भी मंच पर, किसी भी समय बहस के लिए तैयार हूं’

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि वह विदेशी मदद और आर्थिक व्यवस्था से जुड़े इन मुद्दों पर खुली बहस के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि बहस के लिए कोई भी मंच और समय तय किया जा सकता है। राहुल ने यह भी दावा किया कि प्रधानमंत्री इस चुनौती को स्वीकार नहीं करेंगे, क्योंकि उन्हें राहुल गांधी के पास मौजूद जानकारी का डर है।

पीएम मोदी के बयान के बाद राहुल का पलटवार

राहुल गांधी की यह टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात दौरे के दौरान दिए गए बयान के बाद आई है। प्रधानमंत्री ने शनिवार को नर्मदा जिले के एकता नगर में राष्ट्रीय एकता दिवस के कार्यक्रम में विपक्ष पर निशाना साधा था।

पीएम मोदी ने आरोप लगाया था कि देश में कुछ ताकतें विकास की राह में बाधाएं पैदा करने और देश को बांटने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने विपक्ष को ‘विरोध पक्ष’ के बजाय ‘अवरोध पक्ष’ बताते हुए कहा था कि अफवाहों और गलत सूचनाओं के माध्यम से देश की छवि खराब करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने विदेशों में कुछ लोगों की मुलाकातों और भारत विरोधी ताकतों के कथित समर्थन को लेकर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि देश को ऐसी गतिविधियों और सोशल मीडिया के माध्यम से फैलाए जा रहे दुष्प्रचार के प्रति सतर्क रहने की जरूरत है।

राहुल गांधी के बयान को प्रधानमंत्री के आरोपों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। इस घटनाक्रम से विदेशी समर्थन, सोशल मीडिया की भूमिका और विपक्ष की राजनीतिक जिम्मेदारी जैसे मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

राहुल गांधी ने विदेशी मदद के संबंध में अपने आरोपों के समर्थन में इस पोस्ट में कोई विशिष्ट विदेशी संस्था या प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया। वहीं प्रधानमंत्री ने भी अपने संबोधन में कथित विदेशी संपर्कों को लेकर सवाल उठाए थे। फिलहाल दोनों नेताओं के बयानों के बीच खुली बहस की चुनौती राजनीतिक चर्चा का केंद्र बनी हुई है।