नौसर माता मंदिर परिसर में होगा ऐतिहासिक आयोजन
अजमेर। पुष्कर घाटी स्थित प्राचीन नौसर माता मंदिर में राजराजेश्वरी महालक्ष्मी यज्ञ के लिए शुक्रवार सुबह यज्ञ स्थल का भूमिपूजन महाध्वज पताका फहराई गई।परिवार में सुख शांति और संपन्नता के लिए 24 अप्रेल से होने वाले तीन दिवसीय यज्ञ के लिए अब मंडप निर्माण का काम विधिवत प्रारंभ होगा।
शुक्रवार सुबह 9 बजे नौसर माता मंदिर परिसर में नौसर माता मंदिर पीठाधीश्वर श्रीरामा कृष्ण देव के सान्निध्य में विधिविधान से भूमि पूजन और महाध्वज पताका फहराने के साथ ही राजराजेश्वरी महालक्ष्मी यज्ञ की तैयारियों ने गति पकड ली।
पंडित राजेश कुमार शास्त्री के आार्यत्व में पंडित राहुल गौड़ शास्त्री, पंडित आकाश पांडे, पंडित पुरुषोत्तम पाराशर, मोनू शास्त्री समेत अन्य विद्वान पंडितों ने
गणपति पूजन,षोड्श मातृका पूजन, नव ग्रह पूजन, हवन के साथ भूमि शोधन, भूमि पूजन तथा धवज पूजन हुआ। मुख्य जजमान सचिन माहेश्वरी, पुष्पेन्द्र सिंह की मौजूदगी में आरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया।
भूमि पूजन सम्पन्न होने के साथ ही मंदिर परिसर में मंडप और यज्ञशालाओं का निर्माण आरंभ हो जाएगा। यज्ञ से एक दिन पहले 23 अप्रैल शाम 4 बजे कलश यात्रा निकाली जाएगी। इस 21 कुंडीय यज्ञ महोत्सव में 42 युगल दंपती भाग लेंगे।
क्या है श्री राज राजेश्वरी महालक्ष्मी यज्ञ
श्री राज राजेश्वरी महालक्ष्मी यज्ञ एक पवित्र अग्नि अनुष्ठान है जो मुख्य रूप से मां लक्ष्मी को समर्पित है। यह यज्ञ धन समृद्धि, सौभाग्य और ऊर्जा की आराध्य मां लक्ष्मी का आह्वान करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए किया जा रहा है। राज राजेश्वरी महालक्ष्मी यज्ञ उन लोगों के लिए भी विशेष रूप से आवश्यक है जो कर्ज या वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं। मां लक्ष्मी के आशीर्वाद से आर्थिक बाधाएं दूर होंगी और व्यक्ति को ऋण से मुक्ति मिलेगी।
यज्ञ की अग्नि और मंत्रों की शक्ति का संगम
यज्ञ की अग्नि और मंत्रों की शक्ति व्यापार से नकारात्मक ऊर्जा, दरिद्रता और दुर्भाग्य को दूर करती है तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है, जिससे सुख शांति और सौभाग्य आता है। यज्ञ के जरिए भक्तगण अपनी मनोकामनाएं पूर्ण कर सकते हैं। पुराणों में इस बात का उल्लेख मिलता है कि राज राजेश्वरी मां लक्ष्मी समुद्र मंथन के समय प्रकट हुई थीं, उनके आगमन से देवताओं के कष्ट दूर हुए और स्वर्ण में फिर से समृद्धि स्थापित हुई। इसी परंपरा के अनुरूप इस यज्ञ में भाग लेकर भक्त अपने जीवन से कष्टों और दरिद्रता को दूर कर सकते हैं।


