कोलकाता। पश्चिम बंगाल में आरजी कर दुष्कर्म एवं हत्या मामले की जांच में एक चौंकाने वाले घटनाक्रम में पीड़िता के पिता ने सियालदह की अदालत में एक पत्र देकर आरोप लगाया है कि फोरेंसिक जांच के दौरान उनकी बेटी के विसरा सैंपल से छेड़छाड़ की गई थी।
आरोपों के अनुसार सीबीआई और राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला को भेजे जाने से पहले बेलगाछिया स्थित फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में सैंपल से छेड़छाड़ की गई थी। पत्र में यह भी दावा किया गया कि इस कथित छेड़छाड़ में प्रयोगशाला के तीन अधिकारी शामिल थे।
हालांकि पीड़िता के परिवार ने पत्र भेजने वाले की पहचान का खुलासा नहीं किया है लेकिन पत्र लिखने वाले व्यक्ति ने खुद को बेलगाछिया फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला का पूर्व कर्मचारी बताया है। भेजने वाले ने यह भी आरोप लगाया है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री या तृणमूल कांग्रेस के निर्देशों पर यह छेड़छाड़ की गई थी।
खबरों के अनुसार इस चिट्ठी में उन तीन अधिकारियों का नाम भी बताया गया है जिन पर इस कथित घटना में शामिल होने का आरोप है हालांकि उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। इसमें यह भी दावा किया गया है कि तृणमूल सरकार के कार्यकाल के दौरान, भाजपा और माकपा कार्यकर्ताओं से जुड़े सैकड़ों विसरा सैंपल के साथ भी इन्हीं अधिकारियों ने इसी तरह की छेड़छाड़ की थी।
भेजने वाले ने यह भी आरोप लगाया है कि फोरेंसिक जांच में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की मांग की।
पीड़ित परिवार ने आज सियालदह की अदालत से संपर्क किया और उसे बताया कि उन्हें वही पत्र दो बार मिला है, पहली बार 16 मई को और दूसरी बार 23 मई को। उन्होंने आरोपों की पुष्टि एवं दावों की जांच की मांग की है।
पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया कि मई में पहला पत्र मिलने के तुरंत बाद ही उन्होंने सीबीआई को इसकी जानकारी दी थी लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि हमें मई में एक चिट्ठी मिली और हमने तुरंत सीबीआई को इसकी जानकारी दी।
सात दिन बाद हमें वही चिट्ठी दोबारा मिली। इसमें कहा गया है कि विसरा रिपोर्ट के साथ छेड़छाड़ हुई थी और इसमें यह भी बताया गया है कि कथित रूप से किसने और किसके कहने पर ऐसा किया। हमने सीबीआई को सूचित कर दिया है और अदालत का दरवाज़ा खटखटाया है। हमें उम्मीद है कि एजेंसी आवश्यक कदम उठाएगी। पीड़िता के पिता ने सवाल किया कि सरकार बदलने के बाद भी स्वास्थ्य सचिव नारायण स्वरूप निगम अपने पद पर कैसे बने हुए हैं।



