राजगढ़ धाम में शारदीय नवरात्रि महोत्सव का समापन, अखंड ज्योति के दर्शन को उमड़े हजारों श्रद्धालु

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भैरव बाबा और मां कालिका के जयकारों से गूंजा धाम

अजमेर। श्री मसाणिया भैरव धाम राजगढ़ में आयोजित शारदीय नवरात्रि मेला महोत्सव-2026 का समापन धार्मिक अनुष्ठानों, भजन संध्या और अखंड ज्योति की विशेष पूजा-अर्चना के साथ हुआ। समापन अवसर पर देश के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु धाम पहुंचे और बाबा भैरव तथा मां कालिका के दर्शन कर मनोकामनाएं मांगीं। मंदिर परिसर में दिनभर भक्तों की आवाजाही बनी रही। जयकारों और भक्ति संगीत के बीच पूरे धाम में उत्सवी माहौल देखने को मिला।

धाम के प्रवक्ता अविनाश सेन के अनुसार, समापन समारोह में मुख्य उपासक चम्पालाल महाराज ने सर्वधर्म मनोकामनापूर्ण स्तम्भ की पूजा-अर्चना की और बाबा भैरव व मां कालिका की आरती की। इसके बाद उन्होंने परिवार सहित माता रानी की पूजा कर प्रसाद का भोग लगाया। मंदिर परिसर को रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया था। गुलाबी और दूधिया रोशनी से जगमगाते धाम में श्रद्धालुओं ने दर्शन और पूजा-अर्चना की।

नौ दिनों तक प्रज्ज्वलित रही अखंड ज्योति का विधिवत समापन

नवरात्रि महोत्सव के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल अखंड ज्योति का मुख्य उपासक चम्पालाल महाराज ने प्रातःकाल विधिवत समापन किया। धाम की परंपरा के अनुसार यह ज्योति लगातार नौ दिनों तक 24 घंटे प्रज्ज्वलित रही। समापन के बाद श्रद्धालुओं को ज्योति स्थल की विशेष भभूत यानी चिमटी वितरित की गई।

धाम में अखंड ज्योति के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। भक्तों ने ज्योति के दर्शन के बाद सर्वधर्म मनोकामनापूर्ण स्तम्भ की परिक्रमा की और बाबा भैरव के समक्ष अपनी मनोकामनाएं रखीं। श्रद्धालुओं में ज्योति की परंपरा और उससे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं को लेकर विशेष आस्था दिखाई दी।

धाम से जुड़ी मान्यता के अनुसार अखंड ज्योति में प्रयुक्त पात्र में नारियल की चिटक, तेल और हवन सामग्री डालने के बावजूद वह खाली बना रहता है। श्रद्धालु इसे ज्योति की विशेषता और आस्था का प्रतीक मानते हैं। हालांकि, यह धार्मिक मान्यता है।

चम्पालाल महाराज ने नशामुक्ति और रक्तदान का दिया संदेश

समापन समारोह में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए चम्पालाल महाराज ने कहा कि सच्ची आस्था के साथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं को आत्मिक संतोष मिलता है। उन्होंने कहा कि सत्य को परेशान किया जा सकता है, लेकिन पराजित नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, ईश्वर अपने भक्तों का कल्याण करते हैं और लोगों को जरूरतमंदों की सहायता के लिए आगे आना चाहिए।

महाराज ने श्रद्धालुओं से नशे से दूर रहने और समाज में नशामुक्ति के प्रति जागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने अधिक से अधिक रक्तदान करने की अपील करते हुए कहा कि रक्तदान किसी जरूरतमंद व्यक्ति को जीवनदान देने का माध्यम बन सकता है।

पूर्व विधायक सोना देवी बावरी ने किए दर्शन

समापन कार्यक्रम में रायसिंहनगर की पूर्व विधायक सोना देवी बावरी भी मौजूद रहीं। उन्होंने बाबा भैरव और मां कालिका के दर्शन किए तथा अखंड ज्योति स्थल पर पूजा-अर्चना कर चम्पालाल महाराज से आशीर्वाद लिया।

इस अवसर पर राजगढ़ के ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने मुख्य उपासक चम्पालाल महाराज का साफा बांधकर और शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया। स्वागत करने वालों में कैलाश सेन, श्याम सेन, कालूराम शर्मा, गंगाराम, रामसिंह, गणपत सिंह, रतन सिंह, सोहनी देवी, रतन माली, सम्पत माली, कालू प्रजापत, लोकेश माली और अमृतलाल सहित अनेक ग्रामीण शामिल रहे।

नवमी की रात निकला ध्वज जुलूस, भक्ति गीतों पर झूमे श्रद्धालु

महोत्सव के समापन से पहले नवमी की रात नाहरपुरा और राजगढ़ के ग्रामीणों की ओर से बाबा भैरवनाथ तथा मां कालिका के ध्वज चढ़ाए गए। ध्वज जुलूस राजगढ़ के सदर बाजार से शुरू हुआ। ढोल-नगाड़ों के साथ निकले जुलूस में ग्रामीण नाचते-गाते हुए शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने चक्की वाले बाबा के मंदिर में धोक लगाई और इसके बाद जुलूस मुख्य मंदिर स्थित सर्वधर्म मनोकामनापूर्ण स्तम्भ के पास अखंड ज्योति स्थल तक पहुंचा।

जुलूस के दौरान धार्मिक उत्साह और सामूहिक भागीदारी देखने को मिली। गांवों से आए श्रद्धालुओं ने पारंपरिक तरीके से ध्वज अर्पित कर बाबा भैरव और मां कालिका के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।

भजन संध्या में देर रात तक गूंजे माता के भजन

नवमी की रात आयोजित भजन संध्या में राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों से आए भजन कलाकारों ने प्रस्तुतियां दीं। बालोतरा के मुकेश सेन, डेगाना के बाल भजन गायक दिनेश सेन, सीकर के वीरेन सेन तथा अजमेर की ज्योति सैनी और ममता सोनी ने भजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्तिरस में सराबोर किया।

कलाकारों ने ‘अंगना पधारो महाराणी म्हारी कालका भवानी’, ‘राजगढ़ भैरूजी थारो देवरो रे’, ‘हेला पे हेलो देऊ म्हारी मां’, ‘भैरू जी नाना रे नाना’, ‘दरबार है निराला काली के लाल का’ और ‘अब तो आजा रे भैरू जी’ सहित अनेक भजन प्रस्तुत किए। भजनों की धुन पर श्रद्धालु देर रात तक झूमते रहे। भजन संध्या में डॉ. चरण सिंह, डॉ. बीएम जैथवाल और डॉ. रश्मि सिन्हा सहित अन्य लोग भी शामिल हुए।

व्यवस्थाओं में जुटे रहे कार्यकर्ता

दस दिवसीय मेला महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही और धार्मिक कार्यक्रमों के संचालन के लिए व्यवस्थापक ओमप्रकाश सैन, राहुल सैन, रमेश चन्द सेन, अविनाश सैन, मुकेश सेन, सागर सेन, युवराज, वैभव, ताराचन्द, कपिल, यश मारोठी, भव्य, वेदांश, बुलबुल, मिताली, वंशिका, पदम जैन, कन्हैयालाल, देवानन्द, नवल किशोर, प्रकाश रांका, बीएल गोदारा, मणीराम काजल, टीएस राणावत, राजकुमार त्रिपाठी, केसी जैन, कैलाश सेन, मनोहर लालवानी, राजू चावड़ा, कमल शर्मा, दीपक बसीटा, उज्ज्वल राठौड़ सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने सहयोग किया।