सुखेंदु शेखर रॉय ने फ़ेसबुक पोस्ट में तृणमूल नेतृत्व पर किया ज़ोरदार हमला

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कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के पूर्व राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर रॉय ने एक फ़ेसबुक पोस्ट के ज़रिए तृणमूल के एक सांसद के कथित व्यवहार और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर ज़ोरदार हमला किया।

उन्होंने उस वरिष्ठ सांसद को कामुक सांसद कहा और तृणमूल के शीर्ष नेतृत्व पर पर निशाना साधने के लिए बैंडिट क्वीन और अरण्यदेव का भतीजा जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। रॉय ने हाल ही में तृणमूल कांग्रेस पार्टी और संसद के उच्च सदन राज्यसभा दोनों से इस्तीफ़ा दिया है। उन्होंने पश्चिम बंगाल में चुनावी हार के बाद पार्टी में जारी उथल-पुथल के बीच ये कड़े शब्द कहे। रॉय ने बिना सीधे नाम लिए दमदम के सांसद सौगत रॉय को कामुक सांसद बताया और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर भी तीखा हमला किया। उन्होंने बैंडिट क्वीन और अरण्यदेव का भतीजा जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जिससे ज़बरदस्त राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।

माइकल मधुसूदन दत्त की रचना मेघनाद वध काव्य की एक मशहूर पंक्ति से अपनी पोस्ट की शुरुआत करते हुए शेखर रॉय ने लिखा कि मेरा खूबसूरत शहर कभी फूलों की मालाओं से सजे और दीपों की कतारों से जगमगाते किसी थिएटर जैसा हुआ करता था। लेकिन एक-एक करके फूल मुरझा गए हैं और रोशनी बुझ गई है।

उन्होंने कहा कि सत्ताधारी पार्टी एक राजनीतिक तूफ़ान की चपेट में आ गई है और अब उसे जनता को नज़रअंदाज़ करने का नतीजा भुगतना पड़ रहा है। लैटिन कहावत वॉक्स पॉपुली, वॉक्स देई (जनता की आवाज़ ही ईश्वर की आवाज़ है) का ज़िक्र करते हुए रॉय ने तर्क दिया कि सत्ता में आने के बाद शासक अक्सर आम नागरिकों को भूल जाते हैं और झूठे वादों और निजी फ़ायदे में ही उलझे रहते हैं।

उन्होंने कहा कि आख़िरकार लोगों को एहसास होता है कि उन्हें धोखा दिया गया है, और इसके बाद जनता का विद्रोह शुरू हो जाता है। आरजी कर अस्पताल बलात्कार और हत्या मामले का ज़िक्र करते हुए रॉय ने लिखा कि लोग अब विरोध पर उतर आए हैं और दोषियों के लिए न्याय और मौत की सज़ा की मांग कर रहे हैं। पोस्ट के सबसे विवादित हिस्सों में से एक में रॉय ने आरोप लगाया कि जब अभया के माता-पिता अधिकारियों से अपनी बेटी का चेहरा आखिरी बार देखने की इजाज़त के लिए घंटों गुहार लगा रहे थे, तब एक अय्याश सांसद अस्पताल में प्रिंसिपल की कुर्सी पर बैठकर अपने साथियों के साथ फिश फ्राई खा रहा था।

शेखर रॉय ने हालांकि किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन राजनीतिक जानकारों ने इस टिप्पणी का मतलब सौगत रॉय की ओर सीधा इशारा समझा। अपने हमले को और तेज़ करते हुए रॉय ने लिखा कि यह वही सांसद है जिसने कुछ समय पहले ही दमदम में एक सांस्कृतिक मंच पर मुंबई की एक उम्रदराज़ अभिनेत्री के साथ धोती-कुर्ता पहनकर सबके सामने डांस किया था। यह वही सांसद है जिसने नारदा मामले में पांच लाख रुपए की रिश्वत ली थी और पिघली हुई आवाज़ में कहा था, इतना सारा पैसा?

शेखर रॉय ने पार्टी को चुनावों में मिली हार को भ्रष्टाचार, जबरन वसूली, महिलाओं के खिलाफ अपराध, उद्योग, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और रोज़गार के क्षेत्रों में विफलता और बड़े पैमाने पर भाई-भतीजावाद को लेकर जनता में फैले व्यापक गुस्से से भी जोड़ा। पार्टी नेतृत्व पर निशाना साधते हुए उन्होंने लिखा कि अब, अस्तित्व के संकट का सामना कर रही यह बैंडिट क्वीन अपनी पुरानी पार्टी के नेता से बेताबी से गुहार लगा रही है, जबकि उनका नासमझ भतीजा अरण्यदेव और उनके घर का नौकर—जिसके पिता विदेशी और गैर-आस्तिक थे और मां एक भारतीय नौकरानी थी, दिल्ली या कहीं और राजनीतिक पुनर्वास की तलाश में रात-रात भर जाग रहे हैं।

अपनी पोस्ट के आखिर में शेखर रॉय ने मध्यकालीन कवि चंडीदास की मशहूर पंक्ति का ज़िक्र किया कि सबसे ऊपर इंसानियत है; उससे बड़ा कुछ भी नहीं है। इस पोस्ट ने पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही तृणमूल में मची उथल-पुथल को और बढ़ा दिया है। अब सबकी नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सौगत रॉय या तृणमूल नेतृत्व, पूर्व राज्यसभा सांसद द्वारा लगाए गए आरोपों और की गई टिप्पणियों पर कोई प्रतिक्रिया देती है या नहीं।