तृणमूल कांग्रेस के 15 वर्ष के शासन का अंत
कोलकाता। भारतीय जनता पार्टी के जुझारू नेता शुभेन्दु अधिकारी ने शनिवार को यहां पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। राज्य में पहली बार भाजपा की सरकार के गठन के साथ राजनीति का एक नया अध्याय शुरु हुआ है और तृणमूल कांग्रेस के 15 वर्ष के शासन का अंत हो गया है।
छप्पन वर्षीय अधिकारी को राज्यपाल आरएन रवि ने ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड मैदान में आयोजित भव्य समारोह में विशाल जन समूह के समक्ष पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। उनके साथ दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, खुदीराम टुडू और निसिथ प्रमाणिक को भी मंत्री पद की शपथ दिलाई गई।
शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह समेत कई केंद्रीय मंत्री, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और भाजपा तथा उसके नेतृत्ववाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के शासन वाले विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे। निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लगातार दो चुनावों में शिकस्त देने वाले अधिकारी को शुक्रवार को भाजपा विधायक दल की बैठक में सर्वसम्मति से नेता चुना गया था।
उन्नीस सौ पचास के दशक में गठित जनसंघ के संस्थापक डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की राजनीतिक विरासत और विचारधारा की वाहक भाजपा पश्चिम बंगाल में 20।6 से पहले राजनीतिक हाशिए पर थी। वर्ष 2016 के विधान सभा चुनाव में उसने पहली बार तीन सीटों के साथ अपना खाता खोला था और 2021 के चुनाव में पार्टी ने 77 सीटें जीत कर मुख्य विपक्षी दल का दर्जा प्राप्त किया। राज्य में भाजपा के उदय के साथ वर्षों से सत्ता में रहे कांग्रेस और वामपंथी दल हाशिए पर चले गए।
शपथ ग्रहण समारोह के मंच पर कविवर रवींद्र नाथ टैगोर का चित्र लगा हुआ था जिनकी आज जयंती मनाई जा रही है। प्रधानमंत्री ने मंच पर पहुंचते ही उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। उनके बाद धिकारी ने भी साहित्य के नोबेल से सम्मानित गुरुदेव को श्रद्धांजलि दी।
प्रधानमंत्री ने मंच से राज्य की जनता को दंडवंत प्रणाम किया। उन्होंने मंच पर ही पश्चिम बंगाल में भाजपा के सबसे पुराने कार्यकर्ताओं में से एक माखनलाल सरकार का शॉल ओढ़ा कर अभिनंदन किया और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया। अधिकारी ने शुक्रवार को भाजपा विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद पश्चिम बंगाल के पुर्निर्माण का संकल्प लेते हुए कहा था कि भाजपा सरकार राज्य की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करेगी।
उल्लेखनीय है कि बंगाल एक समय देश का अग्रणी औद्योगिक राज्य था लेकिन राजनीतिक माहौल के चलते धीरे धीरे पिछड़ता गया। इस बार विधान सभा चुनाव में यह भी एक प्रमुख मुद्दा था। इसके अलावा राज्य में घुसपैठिए, हिंसा, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा को भी भाजपा नेताओं ने ममता सरकार के विरुद्ध प्रमुख मुद्दा बनाया था।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चले विवाद के बीच हुए इस चुनाव में मतदाताओं की ऐतिहासिक भागीदारी रही और 92.93 प्रतिशत मतदान हुआ। यह आजादी के बाद एक रिकार्ड है। तृणमूल ने एसआईआर को एक बड़ा मुद्दा बनाया था और आरोप लगाया था कि जानबूझ कर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। चुनाव को स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से कराने तथा मतदाताओं को हिंसा तथा भय मुक्त वोट का वातावरण उपलब्ध कराने के लिए चुनाव आयोग ने सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए थे।
इस चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर से भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी से 15,000 से अधिक वोटों से पराजित हुईं। पिछले 2021 के चुनाव में अधिकारी ने उन्हें नंदीग्राम सीट पर हराया था। अधिकारी इस बार नंदीग्राम से भी चुनाव जीते हैं।



