नई दिल्ली। ‘तहलका’ पत्रिका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल ने बॉम्बे उच्च न्यायालय की गोवा पीठ द्वारा उन्हें 10 वर्ष के कारावास की सजा और दोषसिद्धि के फैसले के खिलाफ गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। तेजपाल को वर्ष 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में दोषी ठहराया गया था।
उच्च न्यायालय की गोवा पीठ ने गत 6 अगस्त को गोवा सरकार की अपील पर निचली अदालत के मई 2021 के उस फैसले को पलट दिया था, जिसमें तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया था। उच्च न्यायालय ने उन्हें दोषी ठहराते हुए 10 साल की जेल की सजा के साथ-साथ 10 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना भी लगाया था। तेजपाल को सितंबर के पहले सप्ताह में आत्मसमर्पण करना है, इसलिए इस याचिका पर शुक्रवार को त्वरित सुनवाई के लिए उल्लेख किए जाने की संभावना है।
दूसरी ओर, गोवा सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। राज्य सरकार का तर्क है कि 10 वर्ष की सजा अपराध की गंभीरता की तुलना में कम है और इसे बढ़ाकर आजीवन कारावास किया जाना चाहिए। हालांकि, राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह उच्च न्यायालय द्वारा दी गई दोषसिद्धि के फैसले से पूरी तरह सहमत है और केवल सजा की अवधि बढ़ाने की मांग कर रही है।
यह पूरा मामला एक महिला पत्रकार द्वारा लगाए गए आरोपों से संबंधित है। वह उस समय तेजपाल की कनिष्ठ सहयोगी थीं। उन्होंने आरोप लगाया था कि 7 और 8 नवंबर 2013 को गोवा के एक होटल में आयोजित आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान लिफ्ट के भीतर तेजपाल ने उनका यौन उत्पीड़न किया था।
शिकायत के आधार पर गोवा पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर तेजपाल को 30 नवंबर 2013 को गिरफ्तार कर लिया था। बाद में जुलाई 2014 में उन्हें जमानत मिल गई थी।
सितंबर 2017 में उन पर औपचारिक रूप से आरोप तय किए गए, जिसके बाद लगभग चार वर्षों तक मुकदमा चला। मई 2021 में सत्र अदालत ने साक्ष्यों के अभाव, जांच की कमियों और सीसीटीवी फुटेज जैसे महत्वपूर्ण साक्ष्यों की अनुपलब्धता का हवाला देते हुए उन्हें बरी कर दिया था। हालांकि, इसके बाद गोवा सरकार की अपील पर उच्च न्यायालय ने सत्र अदालत के फैसले को निरस्त करते हुए तेजपाल को दोषी करार दे दिया।



