पश्चिम बंगाल पुलिस ने नेपाल बॉर्डर से जहांगीर खान को किया अरेस्ट

0

कोलकाता। पश्चिम बंगाल पुलिस के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने दक्षिण 24 परगना जिले के फाल्टा के चर्चित नेता जहांगीर खान ‘पुष्पा’ को नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस सूत्रों ने सोमवार को बताया कि जहांगीर कथित तौर पर देश छोड़ने की फिराक में था। उन्हें रविवार रात गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद से वह फरार चल रहा था और नेपाल के रास्ते विदेश भागने की योजना बना रहा था। कई सप्ताह तक निगरानी रखने के बाद विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने उसे सीमा के पास दबोच लिया।

विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान भी वह विवादों में आया था। उस पर बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) पर दबाव डालकर मृत व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने का आरोप लगा था। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य समेत कई नेताओं ने इस मुद्दे पर उसकी आलोचना की थी।

भाजपा नेता अभिजीत दास बॉबी ने आरोप लगाया कि जहांगीर खान पाकिस्तान भागने की कोशिश कर रहा था और उसके पूरे नेटवर्क की जांच की जानी चाहिये। उन्होंने कहा कि जहांगीर खान और उससे जुड़े कुछ लोगों के उग्रवादी गतिविधियों से संबंध हो सकते हैं। दक्षिण 24 परगना में पहले भी कश्मीर के एक आतंकवादी की गिरफ्तारी हो चुकी है। मामले की गहन जांच होनी चाहिए क्योंकि इसमें और लोग भी शामिल हो सकते हैं।

इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और किसी जांच एजेंसी ने अब तक मामले में आतंकवादी संबंधों की बात नहीं कही है। फाल्टा विधानसभा क्षेत्र के चुनाव प्रचार के दौरान जहांगीर खान बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया था। उस पर इलाके में भय और दबाव का माहौल बनाने के आरोप लगे थे।

बढ़ती शिकायतों के बीच चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व अधिकारी और एनकाउंटर विशेषज्ञ अजय पाल शर्मा को विशेष पर्यवेक्षक के रूप में तैनात किया था। शर्मा ने इलाके के दौरे के दौरान सार्वजनिक रूप से जहांगीर खान को चुनाव प्रक्रिया में दखल नहीं देने की चेतावनी दी थी।

आलोचनाओं के जवाब में जहांगीर खान ने खुद की तुलना फिल्मी किरदार पुष्पा से करते हुए कहा था कि वह पीछे हटने वाला नहीं है। फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में चुनाव के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के साथ छेड़छाड़ और टेप लगाने जैसे विवाद भी सामने आए थे।

बाद में चुनाव आयोग ने कुछ मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान का आदेश दिया था। दबाव बढ़ने के बाद जहांगीर खान ने मतदान से दो दिन पहले चुनावी मुकाबले से खुद को अलग कर लिया था और सार्वजनिक जीवन से गायब हो गया था। बाद में उसने अदालत का भी रुख किया था।

जहांगीर की गिरफ्तारी के साथ ही उसके ठिकाने को लेकर चल रही अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि उन्होंने उसके देश छोड़कर भागने की कथित योजना को नाकाम कर दिया है।