नई दिल्ली। इंटरनेट सेवा का उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं के लिए शिकायत दर्ज कराना और उसके समाधान से असंतुष्ट होने पर अपील करना अब पहले से आसान होगा। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने शिकायत निवारण व्यवस्था को अधिक सुलभ और जवाबदेह बनाने के लिए ‘दूरसंचार उपभोक्ता शिकायत निवारण (चौथा संशोधन) विनियम, 2026’ को अंतिम रूप दे दिया है। नए प्रावधानों के तहत पात्र इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को अपने मोबाइल ऐप में शिकायत दर्ज करने, सेवा संबंधी अनुरोध भेजने और अपील करने की सुविधा उपलब्ध करानी होगी।
ट्राई के नए नियमों में शिकायत के निस्तारण से असंतुष्ट उपभोक्ता के लिए अपील दायर करने की समय-सीमा 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दी गई है। अब उपभोक्ता कंपनी के ऐप के अलावा उसकी वेबसाइट और वेब पोर्टल के माध्यम से भी अपील कर सकेंगे। ईमेल, डाक, व्यक्तिगत रूप से और कस्टमर केयर नंबर के जरिए उपलब्ध मौजूदा विकल्प भी बने रहेंगे।
10 हजार से अधिक ग्राहकों वाले इंटरनेट प्रदाता दायरे में
संशोधित नियमों का दायरा तय करने के लिए अब सालाना टर्नओवर के बजाय ग्राहकों की संख्या को आधार बनाया गया है। ये प्रावधान उन इंटरनेट सेवा प्रदाताओं पर लागू होंगे जिनके पिछले वित्त वर्ष के अंतिम दिन 10 हजार से अधिक सब्सक्राइबर होंगे। पहले लागू पांच करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक कारोबार की वैकल्पिक शर्त को हटा दिया गया है। इससे पात्रता का आधार अधिक स्पष्ट हो गया है और ग्राहक संख्या के आधार पर सेवा प्रदाताओं की जवाबदेही तय होगी।
शिकायत केंद्रों पर चौबीसों घंटे मिलेगी सहायता
ट्राई ने शिकायत केंद्रों की उपलब्धता को लेकर भी बदलाव किया है। अब सेवा प्रदाताओं को सप्ताह के सातों दिन 24 घंटे शिकायत केंद्र की सहायता उपलब्ध करानी होगी। यह सहायता मानव प्रतिनिधियों, स्वचालित प्रणालियों, एआई एजेंट या अन्य तकनीकी माध्यमों के जरिए दी जा सकेगी। हालांकि, मानव सहायता प्रतिदिन कम से कम 16 घंटे उपलब्ध रखना अनिवार्य होगा। तकनीक आधारित सेवाओं पर भी उचित मानवीय निगरानी रखनी होगी।
अपील का निपटारा 15 दिन में करना होगा
नए प्रावधानों के अनुसार, सेवा प्रदाता के अपीलीय प्राधिकरण में प्रबंधन स्तर के नियमित कर्मचारी शामिल होंगे और उनके पास कम से कम पांच वर्ष का अनुभव होना चाहिए। अपीलीय प्राधिकरण को अपील की जांच कर उचित कार्रवाई करनी होगी और प्राप्ति के 15 दिन के भीतर अंतिम निर्णय उपभोक्ता को बताना होगा। अपील के निस्तारण के लिए पहले लागू सलाहकार समिति वाली प्रक्रिया को समाप्त कर दिया गया है।
दिव्यांग उपभोक्ताओं के लिए विशेष व्यवस्था
संशोधन में दिव्यांग उपभोक्ताओं की सुविधा पर भी जोर दिया गया है। सेवा प्रदाताओं को अपने शिकायत या उपभोक्ता सहायता केंद्रों में ऐसी समर्पित डेस्क अथवा हेल्पलाइन की व्यवस्था करनी होगी, जहां दिव्यांग व्यक्ति अपनी शिकायत दर्ज करा सकें। इसके साथ ही मोबाइल ऐप, वेबसाइट और वेब पोर्टल को सरकार के निर्धारित सुगम्यता मानकों के अनुरूप बनाना होगा।
शिकायत के समाधान पर उपभोक्ता से लिया जाएगा फीडबैक
नए नियमों के तहत शिकायत या अपील का निपटारा होने के बाद सेवा प्रदाता को ऑनलाइन फीडबैक सर्वे कराना होगा। इसमें उपभोक्ता पांच अंकों के पैमाने पर अपनी संतुष्टि दर्ज कर सकेंगे। सर्वे के नतीजे कंपनी को हर तिमाही अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करने होंगे। शिकायतों, अपीलों और फीडबैक सर्वे की रिपोर्ट कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अथवा निदेशक मंडल के सामने भी रखनी होगी।
इसके अलावा प्रत्येक सेवा प्रदाता को उपभोक्ता शिकायत निवारण व्यवस्था की निगरानी के लिए एक समिति गठित करनी होगी। इसमें कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ संबंधित लाइसेंस सेवा क्षेत्र के राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में ट्राई के यहां पंजीकृत उपभोक्ता संगठनों का कम से कम एक-एक प्रतिनिधि शामिल होगा, जहां कंपनी के 10 हजार से अधिक ग्राहक हैं। समिति को साल में कम से कम एक बार व्यवस्था की समीक्षा करनी होगी।
ट्राई ने नियामकीय निगरानी और अनुपालन को मजबूत करने के लिए ऑडिट, निरीक्षण, तिमाही रिपोर्ट तथा उपभोक्ता फीडबैक के आधार पर शिकायत निवारण प्रणाली की समीक्षा का प्रावधान भी किया है। नियमों का उल्लंघन कर शिकायत या अपील का निस्तारण करने तथा तिमाही प्रदर्शन रिपोर्ट जमा नहीं करने या देरी करने पर वित्तीय दंड लगाया जा सकेगा। इन बदलावों का उद्देश्य इंटरनेट उपभोक्ताओं को शिकायत दर्ज कराने के अधिक विकल्प देना, अपील की प्रक्रिया तेज करना और सेवा प्रदाताओं की जवाबदेही बढ़ाना है।



