अंबरनाथ में कांग्रेस के 12 नवनिर्वाचित पार्षद भाजपा में शामिल

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मुंबई। महाराष्ट्र के ठाणे जिले के अंबरनाथ शहर में एक बड़े राजनीतिक उलटफेर में नगर परिषद के 12 नवनिर्वाचित कांग्रेस पार्षदों ने गुरुवार को औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। इससे कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है और नगर निकाय का राजनीतिक संतुलन पूरी तरह बदल गया है।

यह कार्यक्रम भाजपा के नवी मुंबई क्षेत्रीय कार्यालय में खास तौर पर आयोजित किया गया था, जिसमें राज्य मंत्री गणेश नाइक, संजीव नाइक और दीपेश म्हात्रे शामिल हुए। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने इसकी अध्यक्षता की।
भाजपा में शामिल होने वाले पार्षदों में प्रदीप नाना पाटिल, दर्शना उमेश पाटिल, अर्चना चरण पाटिल, हर्षदा पंकज पाटिल, तेजस्विनी मिलिंद पाटिल, विपुल प्रदीप पाटिल, मनीष म्हात्रे, धनलक्ष्मी जयशंकर, संजीवनी राहुल देवडे, दिनेश गायकवाड़, किरण बद्रीनाथ राठौड़ और कबीर नरेश गायकवाड़ शामिल हैं।

नगरपालिका चुनावों के कुछ ही हफ़्तों बाद उनके दल-बदल से 59 सदस्यीय नगर निकाय में कांग्रेस की मौजूदगी लगभग खत्म हो गई है और स्थानीय स्तर पर पार्टी के संगठनात्मक नियंत्रण और अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राजनीतिक उथल-पुथल बुधवार देर रात शुरू हुई जब कांग्रेस ने चुनाव के बाद भाजपा के साथ गठबंधन का समर्थन करके पार्टी अनुशासन का उल्लंघन करने के लिए सभी 12 पार्षदों को निलंबित कर दिया।

महाराष्ट्र कांग्रेस के उपाध्यक्ष गणेश पाटिल ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के निर्देश पर कार्रवाई करते हुए अंबरनाथ ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप पाटिल को भी निलंबित कर दिया और पूरी ब्लॉक कार्यकारी समिति को भंग कर दिया। यह विवाद अंबरनाथ विकास अघाड़ी के गठन पर केंद्रित है, जो स्थानीय भाजपा नेताओं द्वारा कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) के साथ मिलकर महायुति सहयोगी शिवसेना को दरकिनार करने के लिए चुनाव के बाद बनाया गया गठबंधन है।

शिवसेना 20 दिसंबर को हुए नगरपालिका चुनावों में 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। उसके बाद भाजपा ने 14, कांग्रेस ने 12 और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने चार सीटों पर जीत हासिल की, जबकि दो निर्दलीय भी चुने गए। गठबंधन ने 32 पार्षदों के समर्थन का दावा किया, जो 30 के बहुमत के आंकड़े को पार कर गया। इसी के दम पर भाजपा पार्षद तेजस्वी करंजुले पाटिल ने शिवसेना उम्मीदवार को हराकर नगर परिषद अध्यक्ष चुनाव में बाज़ी मारी।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दखल दिया, और सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि कांग्रेस या मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के साथ कोई भी गठबंधन पूरी तरह से अस्वीकार्य है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे गठबंधन संगठनात्मक अनुशासन का गंभीर उल्लंघन हैं और पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व द्वारा इन्हें मंज़ूरी नहीं दी गयी थी। इन घटनाक्रमों पर गठबंधन सहयोगियों और विपक्ष से कड़ी प्रतिक्रियाएं आई हैं। शिवसेना के नेताओं ने भाजपा पर गठबंधन धर्म का उल्लंघन करने और कांग्रेस-मुक्त राजनीति के विचार को कमजोर करने का आरोप लगाया।

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) सांसद संजय राउत ने भाजपा पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि पार्टी विचारधारा की परवाह किए बिना सत्ता हथियाने के लिए किसी के भी साथ गठबंधन करने को तैयार है। इस बीच, कांग्रेस नेताओं ने भाजपा पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाय है। पार्टी ने कहा कि जहां कांग्रेस ने अपने पार्षदों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई की, वहीं भाजपा ने उन स्थानीय नेताओं के खिलाफ सार्वजनिक रूप से कोई कार्रवाई नहीं की जिन्होंने गठबंधन शुरू किया था।

स्थानीय भाजपा नेताओं ने इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि यह पिछले शिवसेना के नेतृत्व वाले प्रशासन के तहत कथित भ्रष्टाचार और कुशासन को खत्म करने के लिए जरूरी था। उन्होंने जोर दिया कि गठबंधन विकास और स्वच्छ शासन के हित में बनाया गया था।