अजमेर के पंचशील नगर में श्रद्धा और उल्लास के साथ होलिका दहन

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अजमेर। पंचशील नगर क्षेत्र में होली पर्व की पूर्व संध्या पर परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ होलिका दहन का मुख्य आयोजन डीमार्ट चौराहे पर हुआ। सेक्टर दो में ज्ञान मार्ग पर तथा पंचशीलेश्वर महादेव मन्दिर के पास भी होलिका दहन धूमधाम से किया गया। कार्यक्रम में स्थानीय नागरिकों, महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरे क्षेत्र में त्योहार जैसा माहौल नजर आया और ढोल-नगाड़ों की थाप पर लोग झूमते दिखे।

शाम होते ही विधि-विधान से पूजा-अर्चना का क्रम शुरू हुआ। पंडित द्वारा मंत्रोच्चार के साथ होलिका पूजन कराया गया, जिसके बाद शुभ मुहूर्त में करीब सवा आठ बजे अग्नि प्रज्वलित की गई। श्रद्धालुओं ने अग्नि की परिक्रमा कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। कई महिलाओं ने पारंपरिक गीत गाकर माहौल को भक्तिमय बना दिया।

कार्यक्रम स्थल को रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से सजाया गया था। बच्चों में खासा उत्साह देखा गया, वे एक-दूसरे को होली की शुभकामनाएं देते नजर आए। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी सामाजिक एकता और भाईचारे के संदेश के साथ होलिका दहन किया गया।

इस अवसर पर क्षेत्र के गणमान्य नागरिक भी मौजूद रहे। सभी ने एक-दूसरे को गले मिलकर होली की अग्रिम बधाई दी और आपसी प्रेम व सौहार्द बनाए रखने का संकल्प लिया। इसी तरह सेक्टर 2 उद्यान के पास वाले मैदान में भी होलिका दहन किया गया।

होलिका दहन का संबंध पौराणिक कथा से जुड़ा है। कथा के अनुसार असुर राजा हिरण्यकश्यप ने स्वयं को भगवान मानने का आदेश दिया, लेकिन उसका पुत्र भक्त प्रहलाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान था, को प्रहलाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठने को कहा। किंतु ईश्वर की कृपा से प्रहलाद सुरक्षित रहे और होलिका अग्नि में भस्म हो गई। यही कारण है कि होलिका दहन बुराई पर अच्छाई और अहंकार पर भक्ति की विजय का प्रतीक माना जाता है।