विजयदशमी पर अजमेर में विहिप का शस्त्र पूजन, धर्म और समाज की रक्षा का लिया संकल्प

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अजमेर। विजयदशमी के अवसर पर विश्व हिंदू परिषद अजमेर महानगर और प्रखंड-2 की ओर से पुष्कर रोड स्थित शास्त्री कॉलोनी की नाथ जी की बगीची, सोमनाथ धाम आश्रम में शस्त्र पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। आश्रम के महंत गोवर्धन नाथ महाराज के सान्निध्य में हुए आयोजन में संत-महात्माओं, विहिप पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने पारंपरिक विधि-विधान से शस्त्र पूजन किया। इस दौरान धर्म, राष्ट्र और समाज की रक्षा के प्रति सजग रहने का संकल्प व्यक्त किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत ओंकार मंत्र और विजय मंत्र के उच्चारण से हुई। इसके बाद सोलह भुजा वाली मां नवदुर्गा की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर पूजा-अर्चना की गई। शस्त्र पूजन के दौरान श्रद्धा के साथ राष्ट्रभाव का भी वातावरण नजर आया। विहिप प्रखंड-2 अध्यक्ष संदीप बंसल ने बताया कि विजयदशमी भारतीय परंपरा में शक्ति, साहस और धर्म की विजय का पर्व माना जाता है। शस्त्र पूजन इसी परंपरा से जुड़ा आयोजन है, जिसमें शक्ति के साधनों का पूजन करते हुए उनके उपयोग को धर्म, न्याय और समाज की सुरक्षा से जोड़ा जाता है।

शस्त्र शक्ति के साथ संयम भी जरूरी

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विहिप के प्रांत सह मंत्री एवं सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश किशन गुर्जर ने शस्त्र धारण करने के साथ जिम्मेदारी और आत्मसंयम को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि शस्त्र केवल शक्ति प्रदर्शन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इनके साथ बड़ी जिम्मेदारी जुड़ी होती है। धैर्य, संयम और आत्मनियंत्रण रखने वाला व्यक्ति ही शक्ति का उचित उपयोग कर सकता है।

उन्होंने भगवान श्रीराम के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि वनवास के दौरान श्रीराम ने राजपाट और सुख-सुविधाओं का त्याग किया, लेकिन अपने कर्तव्य और धर्म की रक्षा के लिए धनुष-बाण का त्याग नहीं किया। उनके अनुसार यह प्रसंग कर्तव्य, मर्यादा और धर्म की रक्षा के महत्व को रेखांकित करता है।

गुर्जर ने कहा कि शास्त्र व्यक्ति को धर्म और कर्तव्य का मार्ग दिखाते हैं, जबकि शस्त्र आवश्यकता पड़ने पर धर्म, राष्ट्र, समाज और परिवार की रक्षा का माध्यम बनते हैं। इसलिए शक्ति के साथ विवेक और मर्यादा का होना भी उतना ही जरूरी है।

मां दुर्गा की आराधना से जुड़ी शस्त्र पूजन परंपरा

आश्रम के महंत गोवर्धन नाथ महाराज ने शस्त्र पूजन की धार्मिक और आध्यात्मिक परंपरा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब असुरों के अत्याचार बढ़े तो देवताओं ने अपनी शक्तियां और अस्त्र-शस्त्र मां दुर्गा को समर्पित किए। मां दुर्गा ने इन्हीं दिव्य अस्त्रों के माध्यम से असुरों का संहार कर धर्म की स्थापना की।

उन्होंने कहा कि विजयदशमी का संदेश केवल उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अन्याय और अधर्म के विरुद्ध खड़े होने तथा सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने समाज में संस्कार, धर्मबोध और अपने दायित्वों के प्रति जागरूकता को मजबूत करने का आह्वान किया।

महिलाओं की आत्मरक्षा पर भी जोर

विहिप विभाग मंत्री लेखराज सिंह राठौड़ ने परिवार और समाज की सुरक्षा के लिए जागरूकता को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की शक्ति तभी उपयोगी है, जब उसके साथ योग्यता, विवेक और जिम्मेदारी जुड़ी हो। अनुशासित व्यक्ति शक्ति का इस्तेमाल समाज और राष्ट्र की सुरक्षा के लिए करता है, जबकि विवेक के अभाव में वही शक्ति गलत दिशा में जा सकती है।

राठौड़ ने कहा कि महिलाओं और बालिकाओं को आत्मरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए विश्व हिंदू परिषद की दुर्गावाहिनी के माध्यम से समय-समय पर प्रशिक्षण एवं शिविर आयोजित किए जाते हैं। उन्होंने आत्मरक्षा के साथ आत्मविश्वास और अनुशासन को भी समाज की मजबूती का आधार बताया।कार्यक्रम में विहिप प्रांत सत्संग प्रमुख अलका गौड़ ने भी संबोधित किया और विजयदशमी के पर्व की शुभकामनाएं दीं।

कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने लिया हिस्सा

कार्यक्रम में समाजसेवी तुलसी सोनी, विहिप अजमेर महानगर मंत्री कैलाश सिंह भाटी, बजरंग दल संयोजक चेतन सैनी, समरसता सहसंयोजक सोहनलाल बारूपाल, विहिप प्रखंड-2 अध्यक्ष संदीप बंसल, प्रखंड समरसता संयोजक राज सोनकर, बजरंग दल संयोजक सचिन मधुकर, सहसंयोजक रवि सोनकर सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और मातृशक्ति मौजूद रही।

आयोजन के समापन पर श्रद्धालुओं और कार्यकर्ताओं को प्रसाद वितरित किया गया। महानगर मंत्री कैलाश सिंह भाटी और प्रखंड-2 अध्यक्ष संदीप बंसल ने अतिथियों, संत-महात्माओं, पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।