महाराजा दाहिरसेन स्मारक पर ‘विराट हिन्दू सम्मेलन’ का ऐतिहासिक शंखनाद

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अजमेर। महाराजा दाहिरसेन स्मारक दाहिरसेन बस्ती धर्मो रक्षति रक्षितः के जयघोष और सनातन संस्कृति के गौरवशाली इतिहास को पुनर्जीवित करते हुए रविवार को दाहिरसेन बस्ती स्थित महाराजा दाहिरसेन स्मारक एक ऐतिहासिक घटना का साक्षी बना।

यहां आयोजित ‘विराट हिन्दू सम्मेलन’ में जनसैलाब उमड़ पड़ा, जिसने पूरे क्षेत्र को भगवामय कर दिया। अभूतपूर्व कलश यात्रा और जनसमूह आयोजन का शुभारंभ भव्य और दिव्य कलश यात्रा से हुआ। पसन्द नगर से आरंभ हुई यात्रा जब सिद्धेश्वर महादेव मन्दिर पहुंची, तो वहां से मुख्य कलश यात्रा का संगम एक अलौकिक दृश्य प्रस्तुत कर रहा था। मातृशक्ति का नेतृत्व 201 महिलाएं सिर पर कलश धारण किए हुए भारतीय संस्कृति की गरिमा को प्रदर्शित कर रही थीं।

हजारों की संख्या में महिला-पुरुष हाथों में भगवा ध्वज थामे, विभिन्न मार्गों से होते हुए जब महाराजा दाहिरसेन स्मारक पहुंचे तो पूरा वातावरण जयकारों से गूंज उठा। सम्मेलन का विधिवत शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विद्वान ब्राह्मणों द्वारा ‘स्वास्ति वाचन’ और अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मंच का संचालन डॉ. दीपिका शर्मा ने अत्यंत ओजस्वी पूर्ण ढंग से किया।

धर्म ही व्यक्तित्व का निर्माण करता है

अंतर्राष्ट्रीय आध्यात्मिक एवं प्रेरक वक्ता गौरव व्यास ने अपने संबोधन में धर्म के मर्म को समझाया। उन्होंने कहा कि मानव जीवन के चार पुरुषार्थों में ‘धर्म’ ही सर्वप्रथम है। जो धर्म को प्राथमिकता देता है, वह अर्थ और काम से होते हुए मोक्ष को प्राप्त करता है। धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का निर्माण है। हमें जाति-पांति के भेदों को मिटाकर, एक होकर धर्म की रक्षा करनी होगी, क्योंकि जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है।

नारी शक्ति और सनातन संस्कृति

विशिष्ट अतिथि डॉ. सुधा मित्तल ने महिलाओं को समाज की रीढ़ बताया, उन्होंने शिक्षा और आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए कहा कि सशक्त नारी ही सशक्त राष्ट्र की नींव है।मुख्य वक्ता और विभागीय प्रचारक शिवराज ने हिन्दू धर्म और सनातन संस्कृति की वैज्ञानिकता और महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मां भारती तथा सनातन धर्म के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले हमारे आदर्श होने चाहिए। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को अपनी जड़ों से जुड़े रहने का आह्वान किया।

तरुणी वक्ता मेधा अरोड़ा ने अपनी ओजस्वी वाणी तथा कविता पाठ में बताया कि मातृशक्ति ही सन्तान में संस्कारों का पोषण करके उसे धर्म की राह पर चला सकती है। इस ऐतिहासिक सम्मेलन में क्षेत्र के नागरिकों ने भारी संख्या में उपस्थिति दर्ज कराई तथा हिन्दू एकता का परिचय दिया। सम्मेलन के संयोजक महावीर सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया तथा पालक शक्ति सिंह ने सभी का आभार जताया।