नई दिल्ली। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने स्वदेश लौटने का इरादा जाहिर करते हुए कहा है कि वह इसके लिए कोई भी कीमत चुकाने को तैयार हैं।
हसीना ने बुधवार को यहां विदेशी मीडिया के संवाददाताओं को वर्जुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि वह स्वदेश लौटेंगी, चाहे उन्हें वहां जेल में डाल दिया जाये या मौत के घाट उतार जाए। हसीना उनकी सरकार के खिलाफ बांग्लादेश में 2024 में हुए हिंसक आंदोलन के बाद से निर्वासन में भारत में रह रही हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से पहली बार मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि वह इस वर्ष दिसंबर महीने में बांग्लादेश लौटना चाहती हैं, जो उनके देश का विजय का महीना है लेकिन तिथि की घोषणा सही समय आने पर करेंगी।
उन्होंने कहा कि मैं हमेशा यहां नहीं रह सकती और मुझे एक दिन अपने लोगों के पास लौटना होगा। मैं लौटना चाहती हूं क्योंकि लोग सुरक्षा और विकास के हकदार हैं। साथ ही वे लोकतंत्र के हकदार हैं। यहां सवाल है बंगलादेश को सही रास्ते पर लाने का। विकास, शांति और धर्मनिरपेक्षता के रास्ते पर लाने का।
उन्होंने बांग्लादेश की वर्तमान सरकार से मांग की कि आवामी लीग पर लगा प्रतिबंध हटाया जाए, राजनीतिक कैदियों को रिहा किया जाए और देश में अभिव्यक्ति की आजादी बहाल की जाए। उन्होंने कहा कि वह जानती हैं कि जब वह स्वदेश लौटेंगी तो सरकार उन्हें गिरफ्तार करेगी या उन्हें रोकना चाहेगी, लेकिन वह डर के कारण अपने लोगों के लिए अपना फैसला नहीं बदलेंगी। पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि 1983 के बाद उन्हें सात बार गिरफ्तार किया गया और 19 बार उनकी हत्या करने की कोशिश की गई।
हसीना ने कहा कि 2024 का छात्र आंदोलन शांतिपूर्ण नहीं था। उस दौरान संगठित समूह ने सत्ता बदलने का छात्रों का इस्तेमाल किया। जेलों से सभी आतंकवादियों और अपराधियों को रिहा किया गया तथा टेलीविजन संस्थानों और अखबारों पर हमले कराए गए। उन्होंने कहा कि आवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ता की हत्याएं और गिरफ्तारी की गई और ये स्थिति आज भी जारी है। पत्रकारों, शिक्षाविदों, जजों और आम लोगोंं पर इस समय भी वहां जुल्म ढाये जा रहे हैं। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के सत्ता में आने के बाद भी वहां स्थिति नहीं बदली है।



