तेहरान। यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के तट पर स्थित रणनीतिक रूप से बेहद अहम मोखा (Mokha) बंदरगाह शहर पर कब्जा कर लिया है। सैन्य सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, हूतियों ने यहां मौजूद सऊदी समर्थित सरकारी बलों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। यह घटनाक्रम लाल सागर में समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर रहा है।
बाब-अल-मंदेब के बेहद करीब पहुंचे हूती
मोखा पर कब्जे के बाद हूती लड़ाके बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से करीब 75 से 80 किलोमीटर की दूरी पर रह गए हैं। यह जलडमरूमध्य लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ता है और एशिया तथा यूरोप के बीच समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मोखा पर नियंत्रण हूतियों को यमन के पश्चिमी तट पर अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद करता है। इससे उन्हें बाब-अल-मंदेब के आसपास सैन्य दबाव बढ़ाने की रणनीतिक क्षमता मिल सकती है।
सऊदी समर्थित बलों को बड़ा झटका
मोखा लंबे समय से सऊदी समर्थित यमनी सरकारी बलों के लिए पश्चिमी तट पर एक महत्वपूर्ण ठिकाना रहा है। हूती हमले के बाद सरकारी बलों ने पीछे हटकर फिर से संगठित होने की कोशिश शुरू की है। यमनी अधिकारियों ने घटनाक्रम को क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर बताया है।
इस कब्जे को हूतियों की हालिया सैन्य बढ़त की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक माना जा रहा है। इससे यमन में लंबे समय से जारी संघर्ष के फिर व्यापक रूप लेने की आशंका भी बढ़ गई है।
अंतरराष्ट्रीय जहाजों को लेकर हूतियों का दावा
हूतियों की ओर से कहा गया है कि उनका अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना बनाने का इरादा नहीं है। हालांकि, समूह ने सऊदी अरब से जुड़े जहाजों को निशाना बनाने की धमकी दोहराई है। ऐसे में लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
बाब-अल-मंदेब वैश्विक व्यापार का महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इसके आसपास किसी भी तरह का सैन्य तनाव बढ़ने से जहाजों को वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ सकता है, जिससे परिवहन लागत और यात्रा का समय बढ़ने की आशंका रहती है।
तेल और वैश्विक व्यापार पर भी असर का खतरा
मोखा पर कब्जे का घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब क्षेत्र में पहले से ही ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री मार्गों को लेकर तनाव बना हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार, हूतियों की बढ़त से बाब-अल-मंदेब पर दबाव बढ़ सकता है और इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति तथा समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है।
यमन के पश्चिमी तट पर हूतियों की बढ़ती पकड़ अब केवल स्थानीय संघर्ष का मुद्दा नहीं रह गई है। बाब-अल-मंदेब की रणनीतिक स्थिति को देखते हुए इसका असर सऊदी अरब, लाल सागर से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों और व्यापक वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।



