पतंजलि के घी और औषधियों पर उठे सवालों पर बोले रामदेव, मिलावट के आरोप खारिज

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आयुर्वेद से जुड़े 1954 के कानून में संशोधन की मांग

नई दिल्ली। योग गुरु और पतंजलि समूह के प्रमुख स्वामी रामदेव ने पतंजलि के घी और आयुर्वेदिक औषधियों में मिलावट तथा गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों को खारिज किया है। बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने पतंजलि के गाय के घी को पूरी तरह शुद्ध बताते हुए कहा कि खाद्य पदार्थों में मिलावट सामाजिक, धार्मिक और कानूनी दृष्टि से गंभीर अपराध है। इसके लिए कठोर दंड का प्रावधान होना चाहिए।

रामदेव ने इस दौरान आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की प्रतिबद्धता जताई। साथ ही केंद्र सरकार और आयुष मंत्रालय से औषधि एवं चमत्कारिक उपचार (आक्षेपणीय विज्ञापन) अधिनियम, 1954 में संशोधन करने की मांग की। उन्होंने कहा कि मौजूदा कानून में बदलाव की जरूरत है, ताकि आयुर्वेद के विकास और प्रचार-प्रसार में अनावश्यक बाधाएं नहीं आएं।

बृजभूषण शरण सिंह से विवाद खत्म होने का दावा

पतंजलि के घी की शुद्धता को लेकर भाजपा नेता एवं पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बयान से पैदा हुए विवाद पर रामदेव ने कहा कि अब मामला सुलझ गया है। उनके अनुसार, बुधवार को बृजभूषण शरण सिंह से मुलाकात हुई, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया कि उनका बयान सुनी-सुनाई बातों पर आधारित था।

रामदेव ने कहा कि इस बातचीत के बाद गलतफहमी दूर हो गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह इस विवाद को आगे नहीं बढ़ाना चाहते और बृजभूषण शरण सिंह के प्रति आभार जताया।

आयुर्वेद को वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ वैश्विक पहचान दिलाने पर जोर

स्वामी रामदेव ने आयुर्वेद को भारतीय ऋषि-मुनियों की स्थापित चिकित्सा परंपरा बताते हुए कहा कि इसे आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान और चिकित्सकीय साक्ष्यों के साथ आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। उनका कहना था कि आयुर्वेद को विश्व स्तर पर एक प्रमुख चिकित्सा पद्धति के रूप में स्थापित करना पतंजलि का लक्ष्य है।

उन्होंने दावा किया कि पतंजलि ने योग और आयुर्वेद के माध्यम से लीवर, फेफड़ों, घुटनों और मस्तिष्क से जुड़ी कई गंभीर समस्याओं के उपचार में सकारात्मक परिणाम हासिल किए हैं। रामदेव ने मधुमेह सहित विभिन्न बीमारियों के उपचार को लेकर भी पतंजलि के प्रयासों का उल्लेख किया।

इस अवसर पर उन्होंने दिव्य प्रकाशन की पुस्तक ‘हॉलिस्टिक हेल्थ: लॉ एंड फैक्ट्स’ का भी जिक्र किया। उनके और आचार्य बालकृष्ण के सहयोग से संकलित इस पुस्तक में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों से जुड़े अध्ययनों और तथ्यों को प्रस्तुत किया गया है।

हालांकि, इन चिकित्सकीय दावों को लेकर स्वतंत्र वैज्ञानिक प्रमाणों और प्रत्येक बीमारी के लिए उपलब्ध उपचार संबंधी साक्ष्यों का अलग-अलग मूल्यांकन आवश्यक है।

बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर निशाना, पतंजलि के कारोबार को लेकर कही यह बात

संवाददाता सम्मेलन में रामदेव ने बहुराष्ट्रीय दवा और दैनिक उपयोग के उत्पाद बनाने वाली कंपनियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पतंजलि के उत्पादों को लेकर बार-बार सवाल खड़े किए जाते हैं, जबकि विदेशी ब्रांडों की उतनी पड़ताल नहीं होती।

रामदेव ने कहा कि कुछ लोग पतंजलि समूह के कारोबार में गिरावट आने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन उनके मंसूबे सफल नहीं होंगे। उन्होंने दावा किया कि पतंजलि वर्तमान में करीब पांच लाख लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रहा है और भविष्य में इस संख्या में पांच लाख और रोजगार जोड़ने का लक्ष्य है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि पतंजलि की किसी भी दवा पर कभी प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। हालांकि, यह उनका अपना बयान है और इसकी पुष्टि के लिए संबंधित नियामकीय रिकॉर्ड का स्वतंत्र सत्यापन आवश्यक है।

देशी घी की कीमत और उत्पादन प्रक्रिया का समझाया गणित

पतंजलि के घी की कीमत और उत्पादन प्रक्रिया पर चर्चा करते हुए रामदेव ने डेयरी कारोबार का अर्थशास्त्र समझाया। उन्होंने कहा कि दूध से मक्खन निकालने के बाद बचे हिस्से से स्किम्ड मिल्क, दही, मट्ठा, पनीर और दूध पाउडर जैसे उत्पाद तैयार किए जाते हैं। उनके मुताबिक, इन सह-उत्पादों से दूध की कुल लागत का बड़ा हिस्सा निकल आता है।

रामदेव ने दावा किया कि इसके बावजूद पतंजलि का गाय का घी प्रमुख प्रतिस्पर्धी ब्रांडों की तुलना में महंगा है। उन्होंने भारत में गोवंश के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

उनके अनुसार, भारत में लगभग 19 करोड़ गोवंश हैं, जिनमें करीब 15 करोड़ देसी नस्ल के हैं। उन्होंने कहा कि पतंजलि देशी गोवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए भी काम कर रहा है।

आयुर्वेद से जुड़े कानून में बदलाव की मांग

रामदेव ने औषधि एवं चमत्कारिक उपचार (आक्षेपणीय विज्ञापन) अधिनियम, 1954 को लेकर कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने इसे आयुर्वेद के विकास में बाधक बताते हुए प्रधानमंत्री और आयुष मंत्रालय से कानून में शीघ्र संशोधन करने की अपील की।

उनका कहना था कि आयुर्वेद के उपचारों और दावों का मूल्यांकन वैज्ञानिक आधार पर होना चाहिए। पतंजलि प्रमुख ने कहा कि आयुर्वेद को लेकर किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए उसके शोध, प्रयोग और चिकित्सकीय साक्ष्यों को ध्यान में रखना जरूरी है।