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‘भारत माता की जय’ बोलने पर छात्र को 4 घंटे फर्श पर बैठने की सजा

गुना। मध्यप्रदेश के गुना के निजी स्कूल के दो शिक्षकों पर किशोर न्याय अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। शिक्षकों पर आरोप है कि उन्होंने सातवीं कक्षा के एक छात्र को फर्श पर चार घंटे बैठने की सजा सुनाई, छात्र की गलती थी कि उसने स्कूल की प्रार्थना के बाद ‘भारत माता की जय’ का नारा लगाया था।

छुट्टी के बाद छात्र के अभिभावक स्कूल पहुंचे और प्रबंधन के रवैये पर नाराजगी जाहिर की। अभिभावकों और स्थानीय रहवासियों के विरोध प्रदर्शन के बाद गुना कोतवाली में स्कूल के शिक्षक जस्टिन एवं जास्मिना खातून के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया। हालांकि इस मामले में अब तक किसी की भी गिरफ्तारी नहीं की गई। स्कूल प्रबंधन ने भी घटना को लेकर पालक संघ से लिखित में माफी मांगी है।

कोतवाली पुलिस सूत्रों के अनुसार शहर के क्राइस्ट स्कूल की 7वीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्र शिवांश जैन के पिता रोहित जैन ने पुलिस को दिए शिकायती आवेदन में बताया है कि क्राइस्ट स्कूल की 7वीं कक्षा में पढ़ने वाले उनके बेटे शिवांश ने कल घर आकर बताया कि वह राष्ट्रगान के बाद भारत माता की जय कह रहा था।

तभी एक शिक्षक ने उसकी कॉलर पकड़कर कतार से बाहर निकाल लिया और क्लास टीचर के पास लेकर पहुंचा। क्लास टीचर ने भी बच्चे को फटकार लगाई और उसे जमीन पर बैठने की सजा दी। रोहित ने बताया कि सजा मिलने पर उनका बेटा शिवांश करीब 4 घंटे तक फर्श ही बैठा रहा।

घटनाक्रम की जानकारी मिलने पर शहर के तमाम अभिभावक स्कूल पहुंचे, प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की और परिसर में ही भारत माता की जयकारे लगा दिए। शुरुआत में प्रबंधन अपने रवैये पर अड़ा रहा और मामले को जबरिया तूल देने का आरोप लगाना शुरु कर दिया।

बाद में लोगों का आक्रोश देखकर क्राइस्ट स्कूल के प्राचार्य को एक पत्र जारी करना पड़ा, जिसमें उन्होंने भारत माता की जय बोलने से रोकने वाले शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई करने और भविष्य में ऐसी घटना नहीं होने देने का आश्वासन दिया।

इसी दौरान गुना के पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह सलूजा अपने समर्थकों के साथ क्राइस्ट स्कूल पहुंच गए। सलूजा का आरोप था कि क्राइस्ट स्कूल पहले भी इस तरह की घटनाएं करता आया है, लेकिन तब उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती थी।

पुष्कर में देव प्रबोधिनी एकादशी से पंचतीर्थ स्नान का आगाज

अजमेर। राजस्थान में अजमेर के निकटवर्ती तीर्थराज पुष्कर में आज देव प्रबोधिनी एकादशी से पंचतीर्थ स्नान का आगाज हो गया।

तीर्थों के तीर्थ पुष्कर गुरुराज के पवित्र सरोवर पर बीती रात से ही एकादशी के स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटना शुरू हो गई और अलसुबह से पवित्र सरोवर में श्रद्धालुओं ने आस्था से डुबकी लगाई। सरोवर के विभिन्न घाटों पर श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी ब्रह्म मुहूर्त में लगाई और यह क्रम दिनभर चलने के साथ आठ नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा के महास्नान तक चलेगा।

इन पांच दिनों में लाखों श्रद्धालु सरोवर में डुबकी लगाएंगे और जगतपिता ब्रह्मा जी के मंदिर पहुंचकर उनका आशीर्वाद लेंगे। ब्रह्मा मंदिर पर भी श्रद्धालुओं की लंबी कतार देखी जा सकती है। पुष्कर सरोवर मेला क्षेत्र पर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं। सरोवर पर गोताखोरों की तैनाती की गई है। पुलिस मित्र,सिविल डिफेंस टीम, सादा वर्दी में जवान सभी लोग अपनी ड्यूटी को अंजाम दे रहे हैं।

एकादशी से शुरू हुआ पुष्कर का धार्मिक मेले के पहले दिन आज देवस्थान विभाग की देखरेख में आध्यात्मिक पदयात्रा भी निकाली गई जिसमें प्रमुख संत महंतों, धर्मानुरागियों आदि ने शिरकत कर हिंदुत्व की अलख जगाई।

पदयात्रा में गाजे बाजे के साथ झांकियां एवं श्रंगाररत ऊंट आकर्षण का केंद्र रहे और भारत की सतरंगी छटा देखने में आई। आध्यात्मिक पदयात्रा सुबह साढ़े आठ बजे अजमेर बस स्टैंड स्थित गायत्री शक्तिपीठ से प्रारंभ हुई जो गुरुद्वारा, हाईब्रिज, ब्रह्म चौक होते हुए मेला मैदान पहुंची। रास्ते भर इस आध्यात्मिक पदयात्रा का पुष्प वर्षा से स्वागत किया गया।

चेन्नई : रेफ्रिजरेटर में धमाके से परिवार के तीन लोगों की मौत

चेन्नई। तमिलनाडु में राजधानी चेन्नई के उपनगरीय इलाके उरपक्ककम में शुक्रवार सुबह तड़के रेफ्रिजरेटर में शॉर्ट-सर्किट से हुए धमाके के बाद दम घुटन से एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गईजबकि दो अन्यों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

पुलिस सूत्रों ने कहा कि रेफ्रिजरेटर का कंप्रेसर तड़के चार बजे फट गया जिसमें गहरी नींद में सोए गिरिजा(63), उसकी बहन राधा(55) और चचेरा भाई राजकुमार (48) की दम घुटने से मौत हो गई। धमाके के बाद घर में धुआं फैल गया और सांस न ले पाने के कारण तीनों की मौत हो गई।

राजकुमार की पत्नी भार्गवी और छह वर्ष की बेटी को क्रोमपेट सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उनकी हालत नाजुक बतायी जा रही है। यह परिवार दो दिन पहले ही दुबई से अपने एक रिश्तेदार को पुष्पांजलि देने आया था जिसकी मृत्यु एक वर्ष पूर्व हुई थी। गुडुवनचेरी पुलिस, मराईमलाई नगर दमकल सेवा एवं बचावकर्मी मौके पर पहुंच और शवों को चेंगलपट्टू सरकारी अस्पताल भेज दिया।

आरएसएस को रैली निकालने की मद्रास हाईकोर्ट से मिली मंजूरी

चेन्नई। मद्रास उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को एक आदेश में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को छह नवंबर को रैली निकालने की अनुमति दे दी। न्यायमूर्ति इलांथिरैयान ने तमिलनाडु पुलिस को निर्देश दिया है कि वह आरएसएस को छह नवंबर को रैली निकालने की अनुमति दे।

न्यायालय ने इससे पहले राज्य सरकार को अनुमति प्रदान करने का निर्देश दिया था लेकिन स्टालिन सरकार ने इसके लिए मंजूरी नहीं दी, जिसके खिलाफ आरएसएस ने राज्य सरकार पर न्यायालय की अवमानना की याचिका दायर की थी।

इससे पहले तमिलनाडु पुलिस ने उच्च न्यायालय के सामने कोयंबटूर कार विस्फोट, राज्य में मानसून और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा था कि आरएसएस को 47 जगहों पर रैलियां करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था और सुनवाई को शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दिया था।

अमृतसर में शिवसेना नेता सुधीर सूरी की गोली मारकर हत्या

अमृतसर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पंजाब दौरे से ठीक एक दिन पहले शुक्रवार को अमृतसर में वरिष्ठ शिवसेना नेता सुधीर सूरी की गोली मारकर हत्या कर दी गई।

पुलिस आयुक्त अरूणपाल सिंह ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि घटना उस समय हुई, जब सूरी अपने सुरक्षाकर्मियों के साथ गोपाल मंदिर के बाहर धरने पर बैठे थे। धरने में ही एक पगड़ीधारी युवक भी बैठा हुआ था, जिसने मौका मिलते ही उन पर गोलियां चला दी। मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने पीछा कर उसे काबू कर पहले पीटा और बाद में पुलिस के हवाले कर दिया।

सूरी को पिछले कई सालों से खालिस्तानी आतंकियों और उनके गुर्गों की तरफ से हत्या की धमकियां मिलती रही हैं। इसे देखते हुए सरकार ने पंजाब पुलिस के दर्जनभर सुरक्षाकर्मी उनकी सुरक्षा में तैनात कर रखे थे। अब पिछले कुछ दिनों से फिर हिंदू नेता सुधीर सूरी को जान से मारने की धमकियां मिल रही थी।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल पंजाब आ रहे हैं। वह डेरा ब्यास में पहुंचेंगे और डेरे के प्रमुख बाबा गुरिंदर सिंह से मुलाकात करेंगे। पीएम के दौरे से ठीक एक दिन पहले हिंदू नेता की हत्या से सुरक्षा एजेंसियां सकते में हैं। जानकार इसे खालिस्तानी एंगल से भी जोड़कर देख रहे हैं। प्रधानमंत्री के दौरे के लेकर सुरक्षा एजेंसियां एवं पुलिस अलर्ट हैं।

देव उठनी ग्यारस के अबूझ सावे पर शादी विवाह की रही धूम

अजमेर। राजस्थान में अजमेर शहर और गांव में आज देव उठनी ग्यारस के अबूझ सावे पर शादी विवाह की धूम रही। हर गली मोहल्ले में आज बैंड की धुन सुनाई दी और पकवानों की खुशबू से विवाह स्थल महक उठे। कई गली मोहल्लों और मुख्य सड़कों पर बारातों के कारण जाम की स्थिति भी बनी।

शुक्रवार को 117 दिन के बाद बाद भगवान विष्णु योगनिंद्रा से जाग गए हैं। देव उठनी एकादश पर में छोटी दीपावली मनाई गई और पटाखे छूटें। इसी के साथ अगले दो माह और मांगलिक आयोजन भी होंगे।

विवाह मुर्हूत ज्यादा नहीं होने के कारण शहर के मैरिज गार्डन, होटल, विवाह समारोह स्थल आदि बुक हो चुके हैं। इसके तहत सुबह मंदिरों में महाआरती के आयोजन हुए और भगवान को विशेष भोग लगाए गए।

इस बार देवउठनी एकादशी शुक्रवार को आई है। यह माता लक्ष्मी का प्रिय दिन माना जाता है। इस संयोग के कारण विष्णु और महालक्ष्मी का पूजन भी हुआ। देव दीपावली के साथ ही शहर में वैवाहिक समारोह का सिलसिला भी शुरू हो गया।

एलन मस्क ने शुरू की टि्वटर की सफाई, कई कर्मचारियों की छंटनी

लॉस एंजेल्स। माइक्रो ब्लॉगिंग साइट टि्वटर के नए मालिक एलन मस्क ने दुनिया भर में कर्मचारियों की छंटनी का काम शुक्रवार को शुरू कर दिया।

बीबीसी की रिपोर्ट में बताया गया कि दुनिया भर में टि्वटर के लिए काम करने वाले लोगों में से कुछ ने बताया कि उनके कंपनी लैपटॉप से उनको स्वत: ही लॉग आउट कर दिया गया है। सभी कर्मचारी शुक्रवार को प्रशांत समयानुसार सुबह 9 बजे तक ट्विटर पर आपकी भूमिका विषय के साथ एक ईमेल प्राप्त करने के लिए तैयार हैं।

क्रिसमस के सात महीने पहले कंपनी के कर्मचारियों की एक भावनात्मक फीड हैशटैग वन टीम टि्वटर पर ट्रेंड कर रही है कि उन्होंने अपनी नौकरी खो दी है।

इस पूरे मामले पर लोग आश्चर्य व्यक्त कर रहे हैं कि आखिर हो क्या रहा है तो कुछ खामोश हैं, कुछ उस समय क्षेत्र की सीमा में नहीं आने के कारण अभी कुछ भी पता नहीं होने की बात कह रहे हैं।

ब्रिटेन में ट्विटर के वरिष्ठ सामुदायिक प्रबंधक सिमोन बैलमेन ने कहा कि उन्हें कंपनी से निकाल दिया गया है उनके लैपटॉप से वह लॉगआउट कर दिए गए हैं। हर किसी को ईमेल भेजा गया है कि नौकरी से लोगों को हटाया जाएगा। इसके एक घंटे बाद ही कर्मचारियों का लैपटॉप से लॉगआउट करना शुरू हो गया और उनकी जीमेल और स्लैक पर भी पहुंच खत्म कर दी गई।

उन्होंने कहा कि मैं कई ऐसे प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा था जिसमें लॉस एंजेल्स के हिसाब से काम करना हाेता है इसलिए जब यह छटनी शुरू की गई उस समय भी मैं काम पर था। उसने कहा कि इस तरह की छंटनी से प्रतिभा का पलायन होगा जिसे पूरे का पूरा तकनीक उद्योग ही नया आकार लेगा।

बीबीसी ने बताया कि एक आंतरिक ईमेल में, सोशल मीडिया कंपनी ने कहा था कि कटौती ट्विटर को सही रास्ते पर लाने का एक प्रयास है। फर्म ने कहा कि उसके कार्यालय अस्थायी रूप से बंद रहेंगे और बैज एक्सेस को निलंबित कर दिया जाएगा।

पिछले हफ्ते 44 अरब डॉलर के सौदे में फर्म को खरीदने के बाद अरबपति मस्क ट्विटर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी होंगे। ट्विटर ने ईमेल में कहा कि हम शुक्रवार को अपने वैश्विक कार्यबल को कम करने की कठिन प्रक्रिया से गुजरेंगे।

कंपनी ने कहा कि हम मानते हैं कि यह कई व्यक्तियों को प्रभावित करेगा जिन्होंने ट्विटर पर बहुमूल्य योगदान दिया है, लेकिन कंपनी की सफलता को आगे बढ़ाने के लिए दुर्भाग्य से यह कार्रवाई आवश्यक है। कंपनी ने कहा किे प्रत्येक कर्मचारी के साथ-साथ ट्विटर सिस्टम और ग्राहक डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करने के लिए कार्यालय की पहुंच तुरंत सीमित हो जाएगी।

ट्विटर के अनुसार प्रभावित नहीं होने वाले श्रमिकों को उनकी कंपनी के ईमेल के माध्यम से सूचित किया जाएगा। इस बीच प्रभावित होने वालों को उनके व्यक्तिगत एकाउंट्स के माध्यम से अगले चरणों के बारे में बताया जाएगा।

ट्विटर ने कहा कि हमारे वितरित कार्यबल की प्रकृति और प्रभावित व्यक्तियों को जल्द से जल्द सूचित करने की हमारी इच्छा को देखते हुए, इस प्रक्रिया के लिए संचार ईमेल के माध्यम से होगा।

वक्फ बोर्ड अनियमितता मामले में अमानतुल्ला खान और अन्य को नोटिस

नई दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो के आरोपपत्र पर संज्ञान लेते हुए आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्ला खान और अन्य को दिल्ली वक्फ बोर्ड की अनियमितताओं के मामले में 23 नवंबर को पेश होने के लिए शुक्रवार को नोटिस जारी किया।

सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एमके नागपाल ने इस मामले का संज्ञान लेने के बाद कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश के लिए सजा) और अन्य धाराओं के तहत दंडनीय आपराधिक साजिश के अपराध के लिए 11 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार हैं।

अदालत ने कहा कि इस मामले में चार्जशीट किए गए उपरोक्त सभी आरोपी लोगों के खिलाफ इस अदालत द्वारा कथित अपराधों का संज्ञान लिया जाता है और उन सभी को अगली तारीख के लिए तलब करने का निर्देश दिया जाता है। मामले की जांच के दौरान उनमें से किसी को भी जांच अधिकारी (आईओ) की ओर से गिरफ्तार नहीं किया गया है। इसलिए, 23 नवंबर को पेश होने के लिए उनके समन को जाने दें।

इस मामले में सीबीआई ने खान पर दिल्ली वक्फ बोर्ड में प्रावधानों के उल्लंघन और अध्यक्ष पद का दुरुपयोग कर अवैध नियुक्तियां करने का आरोप लगाया है। सीबीआई ने आरोप लगाया कि खान ने आलम को सीईओ के पद पर नियुक्त किया जो गलत या अवैध नियुक्ति थी। आप नेता पर भ्रष्टाचार विरोधी शाखा (एसीबी) ने वक्फ बोर्ड में अनियमितताओं का भी आरोप लगाया गया है।

सीबीआई ने आरोप लगाया है कि इस मामले में खान, आलम और अन्य नौ आरोपी लोगों के बीच रची गई आपराधिक साजिश को आगे बढ़ाने के लिए नियुक्तियां की गई हैं, जिन्हें दिल्ली वक्फ अधिनियम, 1995 और नियमों और नियमों में निहित प्रावधानों के खिलाफ विभिन्न पदों पर नियुक्त किया गया।

आरोप है कि नियुक्तियां मनमाने ढंग से की गई थी और कानून की उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना तथा उपरोक्त नियुक्त अभियुक्तों के लिए निर्धारित पारिश्रमिक भी उच्च स्तर पर था।

सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारी पेंशन योजना-2014 को वैध ठहराया

नई दिल्ली। सुप्रीमकोर्ट ने शुक्रवार को कर्मचारी पेंशन (संशोधन) योजना-2014 को उसके कुछ प्रावधानों को छोड़कर वैध ठहराया।

शीर्ष अदालत ने कर्मचारी पेंशन (संशोधन) योजना-2014 के उन प्रावधान को रद्द कर दिया, जिनमें अधिकतम पेंशन योग्य वेतन (मूल वेतन और महंगाई भत्ता मिलाकर) की सीमा 15,000 रुपए रखी गई थी। संशोधन से पहले अधिकतम पेंशन योग्य वेतन 6,500 रुपए प्रति माह थी।

मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने कर्मचारी पेंशन (संशोधन) योजना 2014 को बरकरार रखने का फैसला सुनाया।

पीठ ने कहा जिन कर्मचारियों ने जानकारी या स्पष्टता के अभाव में पेंशन योजना में शामिल होने का विकल्प नहीं अपनाया है, उन्हें छह महीने के भीतर जरूरी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

शीर्ष अदालत ने कहा कि केरल हाईकोर्ट, राजस्थान हाईकोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा पारित फैसलों में इस मुद्दे पर स्पष्टता का अभाव के कारण जो पात्र कर्मचारी अंतिम तारीख तक योजना में शामिल नहीं हो सके, उन्हें एक अतिरिक्त मौका दिया जाना चाहिए।

शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के केरल उच्च न्यायालय, दिल्ली उच्च न्यायालय और राजस्थान उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर अपना फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने छह दिनों की सुनवाई के बाद 11 अगस्त को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

केरल उच्च न्यायालय ने 2018 में कर्मचारी पेंशन (संशोधन) योजना 2014 को रद्द कर दिया था। उच्च न्यायालय ने इस योजना का लाभ उठाने के लिए 15,000 रुपए प्रति माह की बेसिक वेतन योग्यता की सीमा हटाते हुए 15,000 रुपए प्रति माह की बेसिक वेतन सीमा से अधिक के अनुपात (15,000 रुपए से अधिक वेतन स्थिति में) में पेंशन भुगतान करने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने वेतन की अधिकतम सीमा और उसमें शामिल होने की तय तारीख को भी रद्द कर दिया था।

ईपीएफओ ने तीनों उच्च न्यायालयों के फैसलों को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी। शीर्ष अदालत ने ईपीएफओ की अपील 2019 में खारिज कर दी थी। इसके बाद ईपीएफओ और केंद्र सरकार ने इस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की थी ‌

उच्चतम न्यायालय की दो सदस्यीय पीठ ने पुनर्विचार की याचिका स्वीकार करते हुए इस मामले को तीन न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष भेजने का फैसला दिया था।

ईपीएफओ और केंद्र की याचिका में दलील दी गई थी कि पेंशन और प्रोविडेंट कोष अलग-अलग हैं। प्रोविडेंट कोष की सदस्यता खुद पेंशन कोष में तब्दील नहीं होगी। यह भी तर्क दिया गया था कि पेंशन की योजना कम उम्र के कर्मचारियों के लिए है। इसकी सीमा बढ़ाई जाती है यानी अधिक बेसिक वेतन वालों को वेतन के अनुपात में पेंशन की अनुमति दी जाती है तो इससे वित्तीय बोझ बढ़ेगा और आर्थिक असंतुलन पैदा होगा।

दूसरी ओर, पेंशनभोगियों की ओर से अदालत के समक्ष तर्क दिया गया था कि पेंशन का भुगतान ब्याज की राशि से किया जाता है और मूल कोष से इसका कोई लेना देना नहीं है।

सिरोही नगर परिषद में भाजपा बोर्ड में अव्यवस्था के जिम्मेदार विधायक तो अब कौन?

सिरोही नगर परिषद आयुक्त कक्ष।

कहाँ तो तय था चराग़ाँ हर एक घर के लिये
कहाँ चराग़ मयस्सर नहीं शहर के लिये
सबगुरु न्यूज-सिरोही। उक्त< पंक्तियां दुष्यंत कुमार की हैं। सालों पहले लिखी हुई हैं लेकिन, राजनीतिक हलकों में आज भी लागू होती है।
सिरोही मामले में इसके जिक्र इसलिए जरूरी था कि नगर परिषद चुनाव से पहले भी कांग्रेस ने और स्थानीय विधायक ने पिछले भाजपा बोर्ड में सिरोही नगर परिषद व्याप्त अव्यवस्था को दुरुस्त करने के चुनावी वादे किए थे। लेकिन वर्तमान में हालात उससे भी बदतर हो चुके हैं जो भाजपा शासन में थे। उस समय पार्षदों के इतना मान था कि इनकी सुनवाई हुआ करती थी, अब तो कांग्रेस बोर्ड में पार्षद और जनता दोनों ही भटक रहे हैं। कथित आबूरोड कांग्रेस के प्रभाव में लगाये अधिकारी ने पार्षद, सामान्य सिरोहीवासियों को फुटबाल बना दिया है।

आम आदमी इतना सक्षम नहीं है कि अपनी हर छोटी छोटी फरियाद लेकर सर्किट हाउस या शिवगंज दरबार में जा सके। यूँ विपक्ष में थे तो संयम लोढ़ा सरजावाव दरवाजे और नगर परिषद में जन सुनवाई किये थे। लेकिन, उनके विधायक बनते ही सिरोही में रामराज आने के कारण सार्वजनिक जन सुनवाई 4 साल में नहीं की। जबकि हकीकत ये है कि सिरोही के अधिकारी ये मान चुके हैं कि उन्हें सिर्फ विधायक संयम लोढ़ा को खुश करना फिर जनता जाए भाड़ में।

जब सिरोही नगर पालिका में भाजपा का बोर्ड था तो यहां की अधिकांश अव्यवस्था के लिये अपने भाषणों में सिरोही के वर्तमान विधायक तत्कालीन भाजपा विधायक को भी जिम्मेदार मानते थे। तो यक्ष प्रश्न ये है कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के अनुसार वर्तमान अव्यवस्थाओं के लिये विधायक के अलावा किसी और को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है या नहीं?

सिरोही नगर परिषद में कांग्रेस के बोर्ड को इस महीने तीसरा साल होने में अभी कुछ दिन बाकी है। यहाँ व्याप्त अव्यस्थाओं के लिए सालगिरह के दिन का इंतजार करना भी अब सिरोही के आम आदमी के लिए घोर नाइंसाफी होगी। तीसरे साल में कितने दावे पूरे हुए और कितने जुमले साबित हुए ये जानना भी जरूरी है।

-कलेक्टर से मिला चार्ज तो कलेक्टर से बढ़कर खटके
नगर परिषद में ये चर्चा आम है कि सिरोही नगर परिषद में आबुरोड कांग्रेस के नेताओ की सिफारिश से लगे सचिव को कलेक्टर के माध्यम से कार्य संचालन के लिए कार्यवाहक आयुक्त पदभार तो मिल गया है। लेकिन, कलेक्टर के माध्यम से मिले इस चार्ज ने आयुक्त के खटके कलेक्टर के बराबर कर दिये हैं।
आम आदमी हो, पार्षद हो या खुद नगर परिषद का कर्मचारी कोई भी बिना साहब की मर्जी के उनके ब्लैक फ़िल्म वाले शीशे के पीछे की दुनिया में घुस नहीं सकता। इस पर भी फरियादी को बाहर खड़ा कार्मिक गेट पर रोकेगा। कागज साहब के पास ले जाएगा। साहब की इच्छा होगी तो वो उस फरियादी को अंदर बुलवाएँगे नहीं तो बाहर के बाहर ही टरका देंगे। इस मामले में ये सिरोही के जिला कलेक्टरों से एक कदम आगे हैं क्योंकि वो कम से कम फरियादी को अंदर तो बुलवाते हैं।
-एक को साधो, जनता को भुला दो
पार्षदों, नगर परिषद कार्मिकों और आम सिरोही वासी के पिछले 3 महीने के अनुभव को माने तो सिरोही नगर परिषद के कार्यवाहक आयुक्त इस नीति पर चल रहे हैं कि यहाँ रहने के लिए सिर्फ विधायक को साध लो तो जनता को फुटबाल बना दो तो भी चल जाएगा। उसकी परिणीति भी सामने दिख रही है।
विधायक संयम लोढ़ा द्वारा सिरोही में लाये गए प्रोजेक्ट के अलावा शेष सभी रूटीन कामों को रोक दिया है।  और जो काम हो भी रहे हैं वो पिक एंड चूस की नीति पर। शुक्रवार को ऐसे ही रूटीन काम वाले कई शाहरवासी नगर पालिका को नरक पालिका बोलते हुए कोसते हुए भी दिखे। भूमि शाखा में बैठे फरियादियों ने तो आयुक्त की कार्यप्रणाली की पोल खोल दी। यहां पर कुछ लोग ऐसे बैठे थे जिनके भवन निर्माण का सपने को अटकाया हुआ था कुछ लोग ऐसे थे जिनके प्रशासन शहरों के संग अभियान के बनकर तैयार पड़े पट्टे कार्यवाहक आयुक्त ने हस्ताक्षर के लिए अटकाए हुए थे।
– हक के पट्टों को भी रोका
प्रशासन शहरों के संग अभियान के दौरान अतिक्रमण नियमन के पट्टे अटकाए तो एक बार फिर भी ये मान लिया जाए कि उसमें कुछ अनियमितता हो सकती है। लेकिन, पिछले आयुक्त के कार्यकाल में कृषि भूमि के आवासीय कनवर्जन का शुल्क जमा होने और पट्टे बनकर तैयार होने के बाद भी दर्जनों पट्टे सिर्फ हस्ताक्षर के लिए अटकाए हुए हैं।

जबकि उन पट्टों पर तहसीलदार के द्वारा भूमि आवेदक की खातेदारी की होने और जीईएन रिपोर्ट के बाद शुल्क भी जमा करवाया जा चुका है। पट्टा तैयार करके उसपर मोहर भी लगा दी गई है। बस आयुक्त बदल जाने से उस पर हस्ताक्षर नहीं हो पाए।
–  तो पूर्व  आयुक्त कर रहे थे अव्यवस्थित काम!
वर्तमान आयुक्त ने खातेदारी कृषि भूमि के पट्टे जिस कारण से अटकाए हैं उसकी जवाबदारी नगर परिषद आयुक्त और सिरोही तहसीलदार की है, लेकिन फरवरी से इसके लिए भटकाया आम आदमी को जा रहा है।

प्रशासन शहरों के संग अभियान अशोक गहलोत सरकार का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। सिरोही विधायक उन्ही मुख्यमंत्री के सलाहकार हैं। इनकी ही विधानसभा में प्रशासन शहरों के संग अभियान में तहसीलदार और नगर परिषद आयुक्त किस बेतरतीबी से काम कर रहे हैं इसकी पोल सिरोही के वर्तमान आयुक्त अनिल झिंगोनिया ने खोली।
झिंगोनिया ने जिस दलील पर कृषि भूमि के पट्टों पर हस्ताक्षर नहीं किये उसके पीछे वजह ये बताई जा रही है कि तहसीलदार ने सम्बंधित कृषि भूमि की जमाबंदी आवेदक के नाम होने की तस्दीक तो की, लेकिन इसे नगर परिषद के नाम नहीं चढ़ाई। जबकि उसके बाद की सारी प्रक्रिया हो गई, पट्टे बनकर भी तैयार हो गए।

खुद वर्तमान आयुक्त यहां अपने कमरे के कांच पर काली फ़िल्म चढ़ाकर 18-18 घण्टे काम करने का प्रदर्शन करते दिखते हैं लेकिन, तीन महीनों में ये भी ये आठ महीने पुराने आवेदनों के ये काम नहीं करवा पाए। जबकि प्रशासन शहरों के संग अभियान में 15 दिवस में ये काम होने थे।
प्रशासन शहरों के संग अभियान में सभी विभाग एक ही स्थान पर होने चाहिए थे और सारे काम एक ही शिविर में होने थे इसके बावजूद फरवरी के आवेदनों पर काम नहीं होना सिरोही सभापति और विधायक के इस शिविर पर नजर नहीं होने की ओर इशारा कर रहा है। अभी भी शिविर जारी हैं वर्तमान आयुक्त द्वारा इस तरह के सारे आवेदनों की जमाबंदी नगर परिषद के नाम नहीं करवाई गई।
कांग्रेस के पार्षद खुद यहाँ द्वितीय दर्जे के व्यवहार के कारण बेबस हैं और भाजपा पार्षदों के व्यवहार तो फ़ोटो और वीडियो के रूप में पिछले तीन दिनों से सोशल मीडिया में भाजपा में ही निंदा का विषय बना हुआ है। आयुक्त कक्ष में पार्षदों के हल्ला मचाने के बाद भी विधायक और सभापति इस ओर आंख मूंदे रहते हैं। वर्तमान आयुक्त की उक्त दलील को मानें तो इससे पहले सिरोही नगर परिषद में प्रशासन शहरों के संग अभियान में कृषि भूमि के पट्टे नगर परिषद के नाम कृषि भूमि के नामान्तरण के बिना चढ़े हैं तो वो अवैध हैं।
कुल मिलाकर कथित रूप से सिरोही से आबूरोड होते हुए शिवंगज और शिवंगज से आबूरोड होते हुए सिरोही नगर परिषद आयुक्त कक्ष तक पहुंचने वाले आदेश निर्देशों से स्थानीय पार्षदों और कांग्रेस को दरकिनार किये जाने से सिरोही के लोगों को आयुक्त और तहसीलदार ने नगर परिषद और तहसील के बीच में फुटबॉल बना दिया है।