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चौकाने वाले आंकडे : त्रिपुरा में 8 महीने में 2968 युवतियां लापता

अगरतला। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने विधानसभा में मानसून सत्र के दौरान कहा कि इस वर्ष जनवरी और फरवरी के बीच कम उम्र की 263 किशोरियों सहित कम से कम 2968 युवतियाें के लापता के मामले दर्ज हैं।

साहा ने कांग्रेस विधायक सुदीप रॉयबर्मन और खोवाई के माकपा विधायक निर्मल बिस्वास के एक सवाल के जवाब में कहा कि कुल लापता लोगों में से पुलिस ने आठ महीने में 2524 महिलाओं को बरामद किया, जिनमें 242 नाबालिग शामिल हैं, और शेष किशोरियों का पता लगाया जा रहा है। पुलिस ने बताया कि लापता युवतियों के परिवारों ने थाने में अपहरण की शिकायत दर्ज कराई थी।

बहरहाल, त्रिपुरा पुलिस को राज्य भर में मॉब लिंचिंग की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। यहां के लोगों का कहना है कि राज्य में चोरों और डकैती के अलावा नशीले पदार्थों, नशीली दवाओं का एक गिरोह है जो युवतियों का अपना शिकार बना रहे हैं। अपने जवाब में उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने लापता होने और अपहरण की घटनाओं के सिलसिले में 254 आरोपियों को गिरफ्तार भी किया है।

अजमेर में सीएमएचओ केके सोनी ने फिर संभाला पदभार

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अजमेर। राजस्थान उच्च न्यायालय आदेश के बाद अजमेर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी पद पर डॉ. केके सोनी ने आज एक बार फिर पदभार ग्रहण कर लिया।

डॉ. सोनी ने पदभार ग्रहण करे बाद मीडिया से कहा कि मकसद पूर्ववत जिले में चिकित्सा से जुड़ी फ्लैगशिप योजना को धरातल पर रहना है। साथ ही वैक्सीनेशन कैंपेन को भी प्रभावी तरीके से चलाने का भरोसा दिलाया।

उल्लेखनीय है कि डॉ. सोनी का अजमेर सीएमएचओ पद पर रहते केकड़ी स्थानांतरण कर दिया गया था जिसे उन्होंने रिट याचिका के जरिए उच्च न्यायालय में चुनौती दी। न्यायाधीश इंद्रजीत सिंह ने याचिका का निस्तारण करते हुए उन्हें पुनः उसी स्थान पर पद स्थापित किए जाने के निर्देश दिए जहां से उनका स्थानांतरण किया गया। उच्च न्यायालय आदेश की रोशनी में डॉ सोनी ने आज सुबह सीएमएचओ अजमेर का पदभार ग्रहण कर लिया।

जयपुर में हैडकांस्टेबल पांच हजार रुपए रिश्वत लेते अरेस्ट

जयपुर। राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने राजधानी जयपुर के ज्योतिनगर थाने के हैड कांस्टेबल राजवीर सिंह को आज एक मामले में पांच हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।

ब्यूरो के महानिदेशक भगवान लाल सोनी ने बताया कि एसीबी की जयपुर ग्रामीण इकाई को परिवादी ने शिकायत दी कि एक वर्ष पहले उसने प्रेम विवाह किया है और पति-पत्नी बालिग हैं। फिर भी पुलिस उनको परेशान कर रही है। उसके विरुद्ध दर्ज परिवाद में मदद करने की एवज में हैडकांस्टेबल पांच हजार रुपए की रिश्वत मांग रहे हैं।

इस पर ब्यूरो टीम ने सत्यापन के बाद हैड कांस्टेबल को परिवादी से पांच हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। एसीबी के अतिरिक्त महानिदेशक दिनेश एमएन के निर्देशन में आरोपी के निवास एवं अन्य ठिकानों की तलाशी की जा रही है। एसीबी द्वारा मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर अग्रिम अनुसंधान किया जाएगा।

योगी आदित्यनाथ ने किया अयोध्या में लता मंगेशकर चौक का लोकार्पण

अयोध्या। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय पर्यटन मंत्री जी किशन रेड्डी ने स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर के जन्मदिन पर उनकी स्मृति में अयोध्या में निर्मित चौक का बुधवार को लोकार्पण किया।

याेगी और रेड्डी ने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक दिन में 11 बजे नवनिर्मित लता मंगेशकर चौक पर पहुंच कर विशालकाय वीणा कर लोकार्पण किया। योगी और रेड्डी सुबह 10:30 बजे लखनऊ से अयोध्या स्थित राम कथा पार्क पहुंचे। यहां से उन्होंने लता मंगेशकर चौक पर पहुंच कर इसका लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने विशालकाय वीणा बनाने वाले मूर्तिशिल्पी राम सुतार से मुलाकात की।

गौरतलब है कि दिवंगत लता मंगेशकर की याद में यहां निर्मित चाैक पर रामसुतार की बनाई विशाल वीणा को स्थापित किया गया है। चौक के लोकार्पण के बाद मुख्यमंत्री योगी और केन्द्रीय मंत्री रेड्डी राम कथा पार्क के लिए रवाना हो गए। राम कथा पार्क में लता मंगेशकर के जन्मोत्सव पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का वीडियो संदेश दिखाया गया। इस अवसर पर लता मंगेशकर की याद में सांस्कृतिक कार्यक्रम और उनकी जीवनी पर आधारित प्रदर्शनी भी आयोजित की गई।

शील धाभाई ने फिर नगर निगम जयपुर ग्रेटर के महापौर का पद संभाला

जयपुर। राजस्थान में नगर निगम जयपुर ग्रेटर की महापौर सौम्या गुर्जर को बर्खास्त कर देने के बाद शील धाभाई ने आज यहां फिर कार्यवाहक महापौर का पद संभाल लिया।

धाभाई ने कार्यवाहक महापौर का पद संभालने के बाद कहा कि वह जयपुर शहर की साफ-सफाई व्यवस्था को सुचारु रुप से चलाने का प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि रोशनी का पर्व दीपावली को लेकर शहर में उत्साह हैं और इस मौके निगम की तरफ से साफ सफाई आदि का ध्यान रखते हुए लोगों की खुशियों को दुगना कर सके, ऐसा प्रयास किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि चार जून 2021 को तत्कालीन निगम आयुक्त यज्ञमित्र सिंह देव के साथ मारपीट एवं बदसलूकी के आरोप के मामले में छह जून को गुर्जर को निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद गुर्जर के विरुद्ध प्राथमिक जांच में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर इस मामले की न्यायिक जांच कराई गई जिसकी गत 10 अगस्त को जारी रिपोर्ट में गुर्जर को दोषी पाया गया था।

गुर्जर को निलंबित करने के बाद राज्य सरकार ने शील धाभाई को कार्यवाहक महापौर नियुक्त कर दिया था। इस मामले को लेकर गुर्जर ने अदालत की शरण ली और मामला उच्चतम न्यायालय तक पहुंचा और गत फरवरी में न्यायालय ने उनके निलंबन आदेश को स्टे कर देने से उन्होंने फिर जयपुर ग्रेटर नगर निगम की महापौर का पद संभाल लिया था।

हाल में उच्चत्तम न्यायालय ने राज्य सरकार को इस मामले में कार्यवाही करने के लिए स्वतंत्र करते हुए याचिका का निस्तारण कर देने के बाद राज्य सरकार ने मंगलवार को गुर्जर को महापौर पद से बर्खास्त कर दिया। गौरतलब है कि धाभाई इससे पहले पिछले वर्ष सात जून से गत एक फरवरी तक कार्यवाहक महापौर रही। इससे पहले भी वह जयपुर नगर निगम की महापौर निर्मला वर्मा के निधन के बाद वर्ष 2001 में महापौर बनी।

लखीमपुर खीरी में बस और डीसीएम की टक्कर में 10 मरे, कई घायल

लखीमपुर खीरी। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में पीलीभीत बस्ती राजमार्ग पर बुधवार को सुबह शारदा पुल के पास एक बस और डीसीएम की आमने सामने की भीषण टक्कर में दस लोगों की मौत और दर्जन भर से अधिक लोग घायल हुए हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्य शुरु कर घायलों को उपचार एवं हर संभव सहायता उपलब्ध कराने को कहा है।

पुलिस के अनुसार लखीमपुर खीरी जिले में पीलीभीत बस्ती राजमार्ग पर शारदा नदी के पुल के पास सुबह करीब 8:30 बजे यह हादसा हुआ। इसमें थाना खीरी क्षेत्र के नकहा के निकट बस व विपरीत दिशा से आ रहे डीसीएम ट्रक की जबरदस्त टक्कर में बस के परखच्चे उड़ गए।

निजी बस ऑपरेटल रुद्र ट्रेवल्स की बस धौरहरा से लखनऊ जा रही थी। हादसे की सूचना मिलने पर तत्काल पुलिसबल को घटनास्थल पर भेजकर राहत एवं बचाव कार्य प्रारंभ कराया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बस में सवार छह यात्रियों की घटनास्थल पर ही मौत हाे गई।

दर्जन भर से अधिक घायलों को स्थानीय अस्पताल भेजा गया जहां चार अन्य यात्रियों की उपचार के दौरान मौत हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार बस में क्षमता से अधिक यात्री सवार थे। पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए। इस हादसे में हताहत हुए लोगों की शिनाख्त अभी नहीं हो पाई है।

लखनऊ से प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री योगी ने इस हादसे में हुई जनहानि पर गहरा दुःख प्रकट किया है। उन्होंने मृतकों की आत्मशांति की कामना करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।

मुख्यमंत्री योगी ने घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाकर जिला प्रशासन के अधिकारियों को उनके समुचित उपचार के निर्देश दिए हैं। साथ ही घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की भी कामना की है। उन्होंने जिलाधिकारी और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर जाकर राहत कार्य को युद्धस्तर पर कराने के निर्देश दिए हैं।

शारदीय नवरात्र : नौसर माता मंदिर में माता के 9 स्वरूपों के एक साथ दर्शन

नौसर माता मंदिर का वीडियो देखने के लिए यहां क्लीक करें

अजमेर। नवरात्र में माता मंदिरों में भक्तों का अपार समूह उमड रहा है। ऐसा ही नजारा करीब 1300 साल प्राचीन शक्तिपीठ श्रीनौसर माता मंदिर में शारदीय नवरात्र के दौरान नजर आ रहा है। यहां दूर-दूर से लोग नवरात्र में दर्शनों के लिए आते हैं। माता से भक्त मुरादें मांगते हैं और नौ स्वरूपों में माता अपने भक्तों का कल्याण करती हैं।

यह देश का एकमात्र मंदिर है जहां मां के नौ रूपों का दर्शन होता है। माता का आशीष पाने दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। माता के नौ स्वरूपों की प्रतिदिन आराधना की जाती है। नौसर माता कई समाज की कुलदेवी हैं। माता अपने नौ रूपों में नाग पहाड़ी के मुख पर विराजमान है। नवदुर्गा के इस मंदिर को स्थानीय लोग नौसर माता के नाम से जानते हैं।

प्राचीन मंदिर के बारे में पदम पुराण में उल्लेख मिलता है कि पुष्कर में सृष्टि यज्ञ की रक्षा के लिए जगत पिता ब्रह्मा ने नवदुर्गा का आह्वान किया था। दानवों से यज्ञ की रक्षा के लिए माता अपने नौ रूपों में नाग पहाड़ी के मुख पर प्रकट हुईं थीं, तब से माता अपने नौ रूपों में नाग पहाड़ी के मुख पर विराजित हैं।

यह भी मान्यता है कि मुगल काल में औरंगजेब ने इस मंदिर को भी नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया था। मंदिर को औरंगजेब की सेना ने तोड़ दिया, लेकिन माता के नौ स्वरूप वाली प्रतिमाओं को वह नुकसान नहीं पहुंचा पाया। बाद में मंदिर की पुनः स्थापना की गई। हालांकि, रखरखाव के अभाव में मंदिर जीर्ण-शीर्ण होता गया। करीब 130 साल बाद संत बुध करण महाराज ने मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया।

बताया जाता है कि पहाड़ी के आस-पास कोई जलाशय नहीं था। ऐसे में संत बुध करण के लिए मंदिर का जीर्णोद्धार करवाना आसान नहीं था। तब माता ने उन्हें स्वप्न में दर्शन दिए और कहा कि मंदिर के नीचे विशाल पत्थर है, जिसे हटाने पर पर्याप्त जल मिलेगा। वह कुंड आज भी मौजूद है। कहते हैं कि उस कुंड में कभी पानी नहीं सूखता।

माफिया अबु सलेम को फर्जी पासपोर्ट मामले में 3 साल की सज़ा

लखनऊ। कुख्यात माफिया अबु सलेम को केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने फर्जी पासपोर्ट मामले में मंगलवार को 3 साल के कारावास और 10 हजार रुपए के अर्थदंड की सज़ा सुनाई है।

विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट समृद्धि मिश्रा ने फर्जी पासपोर्ट मामले में अपने फैसले में अबू सलेम अब्दुल कय्यूम अंसारी और उसके साथी परवेज आलम को तीन वर्ष के कारावास और 10 हज़ार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।

अदालत ने परवेज आलम पर अबू सलेम एवं उसकी पत्नी समीरा जुमानी के लिए फर्जी पासपोर्ट बनवाने के आरोप में 35 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। अदालत ने कहा कि अभियुक्तों को दी गई सभी सजाएं साथ साथ चलेगी। यदि उनके द्वारा इस मामले में अतिरिक्त अवधि जेल में बिताई गई है तो उसे सजा में समायोजित किया जाएगा।

अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के समय अबू सलेम नवी मुंबई की तलोजा जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुआ। वहीं मोहम्मद परवेज आलम व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में हाजिर हुआ।

इस मामले में प्रश्नगत पासपोर्ट 6 जुलाई 1993 को बनवाया गया था। बीती 22 अगस्त एवं 21 जुलाई को भी विशेष अदालत के समक्ष अबू सलेम को पेश किया गया था। पहली पेशी पर आरोपी अबू सलेम ने जज के सामने अपना बयान दर्ज कराया था। सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक ने अदालत को बताया कि वर्ष 1993 में मुंबई बम ब्लास्ट मामले की जांच के दौरान अबू सलेम द्वारा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाने का मामला उजागर हुआ था।

इसमें आजमगढ़ निवासी मोहम्मद परवेज आलम ने अन्य लोगों के साथ मिलकर अबू सलेम व समीरा जुमानी के वास्तविक निवास व पहचान को छुपाकर पासपोर्ट बनवाया था। जिससे कि वे दोनों विभिन्न आपराधिक मामलों में खुद को बचाने के लिए देश के बाहर भाग सके।

सजा सुनाए जाने के बाद परवेज आलम की ओर से अंतरिम जमानत अर्जी पेश की गई। इसमें कहा गया कि उसे अदालत के निर्णय के विरुद्ध सत्र अदालत में अपील दाखिल करनी है। लिहाजा उसे अपील दायर करने की अवधि तक के लिए अंतरिम जमानत पर रिहा कर दिया जाए। अदालत ने परवेज आलम की अर्जी को स्वीकार करते हुए उसे 20-20 हजार रुपए के मुचलकों पर अंतरिम जमानत दे दी।

कांग्रेस ने दिया राजस्थान के तीन नेताओं को कारण बताओ नोटिस

जयपुर/नई दिल्ली। कांग्रेस की अनुशासन समिति ने राजस्थान में विधायक दल की बैठक को लेकर बगावती तेवर अपनाने वाले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत समर्थक तीन नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।

कांग्रेस के केंद्रीय पर्यवेक्षक वरिष्ठ नेता मलिकार्जुन खडगे और अजय माकन के जयपुर में रविवार को चले हाइड्रामा को लेकर पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को विस्तृत रिपोर्ट सौंपी जिसके बाद अनुशासन समिति ने गहलोत समर्थक तीन नेताओं आरटीडीसी के अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौर, विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक महेश जोशी तथा संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल को नोटिस दिया है।

पार्टी ने यह कदम दोनों पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट मिलने के बाद उठाया है। पर्यवेक्षकों ने कुछ नेताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की सिफारिश की थी जिसमें धारीवाल का नाम सबसे ऊपर था।

गौरतलब है कि कांग्रेस के दोनों पर्यवेक्षक सोमवार को दिल्ली पहुंच गए थे और उन्होंने शाम को श्रीमती गांधी से मुलाकात कर उन्हें सारी स्थिति से अवगत कराया लेकिन सोनिया गांधी ने उन्हें लिखित रूप में विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा जिसके बाद तीन नेताओं को नोटिस जारी किया गया है।

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया गैर कानूनी संगठन घोषित, 5 वर्ष तक प्रतिबंध

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) तथा उससे संबद्ध संगठनों को गैर कानूनी क्रियाकलापों में लिप्त पाए जाने पर गैर कानूनी संगठन घोषित किया है। मंत्रालय ने संगठन पर तत्काल तत्काल प्रभाव से 5 वर्ष तक के लिए प्रतिबंध लगा दिया है।

गृह मंत्रालय ने मंगलवार देर रात जारी अधिसूचना में कहा है कि पीएफआई युवाओं, छात्रों, महिलाओं इमामो, वकीलों और समाज के कमजोर वर्गों में पहुंच बढ़ाकर गुप्त एजेंडे के तहत एक वर्ग विशेष को कट्टर बना रहा है। संगठन का उद्देश्य लोकतंत्र की अवधारणा को कमजोर करना और संविधान के खिलाफ कार्य करना है।

गृह मंत्रालय ने कहा है कि पीएफआई को जांच में गैर कानूनी क्रियाकलापों में संलिप्त पाए जाने के बाद इस पर तथा इससे संबंधित संगठनों को तत्काल प्रभाव से 5 वर्ष के लिए प्रतिबंधित किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने पिछले सप्ताह पीएफआई के देश भर में 100 से भी अधिक ठिकानों पर छापेमारी कर उसके कई सदस्यों को गिरफ्तार किया था।