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ओडिशा में पॉक्सो अदालत के न्यायाधीश ने की खुदकशी

भुवनेश्वर। यौन अपराध बाल संरक्षण (पॉक्सो) अदालत के न्यायाधीश सुभाष कुमार बिहारी शुक्रवार को कटक के सीडीए स्थित अपने सरकारी आवास में मृत पाए गए। वह 49 वर्ष के थे। उनके परिवार में पत्नी औ दो पुत्रियां हैं। न्यायाधीश बिहारी की मौत के कारण का अभी पता नहीं चल पाया है।

सूत्रों के मुताबिक न्यायाधीश बिहारी को एक निजी अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। कटक के सहायक पुलिस आयुक्त तापस प्रधान ने कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के दृष्टिकोण से आत्महत्या का संकेत मिलता है। आगे की जांच में सच्चाई सामने आएगी।

सूत्रों के मताबिक न्यायाधीश बिहारी बुधवार से छुट्टी पर थे और शुक्रवार को उन्हें अदालत जाना था, हालांकि उन्होंने एक दिन और छुट्टी बढ़ाने की मांग की थी।

‘टिक टाॅक स्टार’ बनने का जुनून महिला सिपाही को पड़ा भारी, लाइन अटैच

अमरोहा। उत्तर प्रदेश के अमरोहा में एक महिला पुलिसकर्मी को वर्दी पहन कर सोशल मीडिया पर ‘टिक टाक स्टार’ बनने का जुनून सवार होना महंगा साबित हुआ जब आला अधिकारियों को इसकी भनक लगने पर उसे लाइन हाजिर कर दिया गया।

सूत्रों ने शनिवार को बताया कि जिले की महिला पुलिसकर्मी वर्षा राठी को इस मामले में लाइन हाजिर कर जांच शुरु कर दी गई है। अमरोहा कोतवाली में तैनात महिला सिपाही वर्षा राठी के सोशल मीडिया पर लाखों फोलोअर हैं। राठी ने अब तक सोशल मीडिया प्लेटफार्म इंस्टाग्राम पर टिक टॉक वीडियो बनाकर 245 पोस्ट अपलोड कर चुकी हैं। उनके इंस्टाग्राम पर 1.32 लाख से अधिक फालोअर्स हैं।

मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आने पर महिला सिपाही को लाइन हाजिर कर जांच बैठा दी है। बताया जा रहा है कि वर्षा राठी सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियां बटोर रही है। फालोअर्स की दिनोंदिन बढ़ती संख्या के कारण राठी की लोकप्रियता चर्चाओं में है।

अधिकारियों की मानें तो इसका असर अन्य महिला सिपाहियों पर भी पड़ रहा है। इस कारण आमतौर पर ड्यूटी के दौरान मोबाइल फोन पर व्यस्त रहने की वजह से आम जनमानस में महिला सिपाहियों को ‘मोबाइल फौज’ के नाम से पुकारा जाने लगा है।

डबल इंजन वाली सरकार ने कर्नाटक को फायदा पहुंचाया : मोदी

मेंगलुरु। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डबल इंजन वाली सरकार से कर्नाटक को होने वाले लाभों का जिक्र करते हुए शुक्रवार को कहा कि जिन 3,800 करोड़ रुपए की प्रस्तावित परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया उनसे राज्य में जीवनयापन और रोजगार में आसानी होगी।

मोदी ने परियोजनाओं के उद्घाटन के बाद समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि साथ ही ‘एक जिला और एक उत्पाद’ योजना क्षेत्र के मछुआरों, कारीगरों और किसानों के उत्पादों के लिए बाजारों की उपलब्धता की सुविधा प्रदान करेगी। ण्पिछले आठ वर्षों में प्राथमिकता के आधार पर बुनियादी ढांचे के विकास पर टिप्पणी करते हुए उन्होंनेण् कहा कि यह कर्नाटक है जिसने इससे अत्यधिक लाभ उठाया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कर्नाटक सागरमाला योजना के सबसे बड़े लाभार्थियों में से एक है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गत आठ वर्षों में 70 हजार की राजमार्ग परियोजनाएं जोड़ी गई हैं और एक लाख करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं। कर्नाटक में परियोजनाओं के लिए रेल बजट पिछले आठ वर्षों में चार गुना बढ़ा है।

पिछले आठ वर्षों के घटनाक्रम का अवलोकन करते हुए मोदी ने कहा कि देश में गरीबों के लिए तीन करोड़ से अधिक घर बनाए गए हैं, और कर्नाटक में गरीबों के लिए आठ लाख से अधिक पक्के घरों की मंजूरी दी गई है। उन्होंने कहाइ कि हजारों मध्यम वर्गीय परिवारों को भी उनके घर बनाने के लिए करोड़ों रुपए की मदद दी गई है।

उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत देश में छह करोड़ से अधिक घरों को केवल तीन वर्षों में पाइप से पानी की सुविधा से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि पहली बार कर्नाटक के 30 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों तक पाइप से पानी पहुंचा है।

मोदी ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत देश के करीब चार करोड़ गरीब लोगों को अस्पताल में भर्ती होने के दौरान मुफ्त इलाज मिला है। इससे करीब 50 हजार करोड़ रुपए गरीबों के लिए खर्च किए गए। कर्नाटक के 30 लाख से ज्यादा मरीजों को आयुष्मान भारत का लाभ भी मिला है।

उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि जिन लोगों को उनकी कमजोर वित्तीय स्थिति के कारण भुला दिया गया था, उनकी उपेक्षा न हो। उन्होंने कहा कि छोटे किसानों, छोटे व्यापारियों, मछुआरों, रेहड़ी-पटरी वालों और ऐसे करोड़ों लोगों को पहली बार देश के विकास का लाभ मिलना शुरू हुआ है। वे भारत के विकास की मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज डिजिटल भुगतान ऐतिहासिक स्तर पर है और भीम-यूपीआई जैसे हमारे नवाचार दुनिया का ध्यान खींच रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज देश के लोग मजबूत कनेक्टिविटी के साथ तेज और सस्ता इंटरनेट चाहते हैं।

उन्होंने रेखांकित किया कि आज करीब छह लाख किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर बिछाकर ग्राम पंचायतों को जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि 5जी की सुविधा इस क्षेत्र में एक नई क्रांति लाने जा रही है। मुझे खुशी है कि कर्नाटक की डबल इंजन सरकार भी लोगों की जरूरतों और आकांक्षाओं को तेजी से पूरा करने के लिए काम कर रही है।

मोदी ने अपने संबोधन का समापन कर्नाटक के करावली क्षेत्र का जिक्र करते हुए किया। उन्होंने कहा कि देशभक्ति की, राष्ट्रीय संकल्प की इस ऊर्जा से मैं हमेशा प्रेरित महसूस करता हूं। मेंगलुरु में दिखाई देने वाली यह ऊर्जा ऐसे ही विकास के पथ को रोशन करती रहे, इसी कामना के साथ, आप सभी को इन विकास परियोजनाओं के लिए बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं।

बंदरगाह नीत विकास की दिशा में देश की ओर से किए गए प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए मोदी ने जोर देकर कहा कि यह विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मंत्र है। ऐसे प्रयासों के फलस्वरूप भारत के बंदरगाहों की क्षमता मात्र आठ वर्षों में लगभग दोगुनी हो गई है।

कुछ दिन पहले सामने आए जीडीपी के आंकड़ों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना काल में भारत द्वारा बनाई गई नीतियों और लिए गए फैसलों ने भारत के विकास में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि पिछले साल, इतने सारे वैश्विक व्यवधानों के बावजूद, भारत का निर्यात कुल 670 अरब डॉलर का था यानी 50 लाख करोड़ रुपए। हर चुनौती को पार करते हुए भारत ने 418 अरब डॉलर के व्यापारिक निर्यात का नया रिकॉर्ड बनाया यानी 31 लाख करोड़ रुपए।

मोदी ने कहा कि देश के विकास इंजन से जुड़ा हर क्षेत्र आज पूरी क्षमता से चल रहा है। सेवा क्षेत्र भी तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि पीएलआई योजनाओं का असर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर साफ तौर पर देखा जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने आजादी का अमृत महोत्सव के समारोहों पर प्रकाश डाला और भारत की मिट्टी को गुलामी के चंगुल से बचाने में रानी अब्बक्का और रानी चेन्नाभैरा देवी के संघर्षों को याद किया। उन्होंने कहा कि आज ये बहादुर महिलाएं भारत को निर्यात के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए एक बड़ी प्रेरणा हैं।

इस अवसर पर कर्नाटक के राज्यपाल थावर चंद गहलोत, मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई, केंद्रीय संसदीय मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी, केंद्रीय बंदरगाह मंत्री सर्वानंद सोनोवाल, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा और अन्य लोग भी उपस्थित थे।

गहलोत को प्रदेश में कानून व्यवस्था ठीक करने का देना चाहिए भरोसा : सतीश पूनियां

जयपुर। राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डा सतीश पूनियां ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कानून व्यवस्था पर दिए बयान पर पलटवार करते हुए कहा है कि उन्हें प्रदेश में कानून व्यवस्था बहाल एवं ठीक करने का भरोसा देना चाहिए लेकिन विपक्ष को आरोपित करना हास्यास्पद हैं।

डा पूनियां ने आज बयान जारी कर कहा कि इस समय सोचने वाली और विवश करने वाली बात है वो राजस्थान की कानून व्यवस्था है। शांतिपूर्ण प्रदेश जो हर लिहाज से लोगों को आकर्षित करता है, लेकिन अब राजस्थान को गृहण लगा है, नजर लगी है कानून व्यवस्था को, आठ लाख मुकदमे अपने आप में इसकी बानगी कहते हैं।

उन्होंने कहा कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो ने इसे पुख्ता करते हुए जिस तरीके से महिला अपराधों का आंकड़ा बताया है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। वर्षभर में 6337 दुष्कर्म के मामले, जिसका अनुपात प्रतिदिन 17 दुष्कर्म के मामले, लेकिन इससे ज्यादा दुभाग्यपूर्ण है कि राजस्थान के गृहमंत्री और मुख्यमंत्री का वह शर्मनाक बयान जिसमें उन्होंने कहा है कि 56 प्रतिशत मामले झूठे हैं। आंकड़ों पर मत जाइए लेकिन क्या उस घटना को झुठलाएंगे कि एम्बुलेंस के बाहर भूख से बिलखती महिला रोटी मांगती है और उसकी अस्मत लूट ली जाती है।

डा पूनियां ने कहा कि थाने में बलात्कार की रिपोर्ट दर्ज कराने जाने वाली किसी पीड़ित महिला के साथ फिर से थाने में बलात्कार होता है, क्या इसको झुठला देंगे, लगता है कि हकीकत पर जाएंगे तो यह राजस्थान के लिए दुभाग्यापूर्ण है कि मुख्यमंत्री का आज का बयान उस पर विपक्ष को आरोपित करना और ज्यादा हास्यास्पद है, ऐसा लगता है कि कांग्रेस पार्टी के भीतर अन्तरद्वंद एवं अंतर्कलह और स्वयं की कुर्सी जाने की असुरक्षा ने उनको विचलित कर दिया।

उन्होंने कहा कि इसलिए बेहतर होता कि कानून व्यवस्था को बहाल करने का भरोसा देते, इस बात का भरोसा देते कि कानून व्यवस्था को ठीक की जाएगी, लेकिन विपक्ष को आरोपित करना, ये तो लगता है और भी ज्यादा गंभीर है। उन्होंने कहा कि उनको महिला अपराधों पर, महिलाओं की सुरक्षा ना कर पाने पर एक भी दिन कुर्सी पर रहने का अधिकार नहीं है, राजस्थान की शुचिता के लिए, राजनीति के लिए यह उचित होगा कि वो अपने पद से त्यागपत्र दे दें कि महिलाओं और बच्चियों को सुरक्षा देने में पूरी तरह से नाकाम रहे।

आंकड़ों का गलत विश्लेषण कर राजस्थान को बदनाम करने का किया जा रहा है प्रयास : गहलोत

आंकड़ों का गलत विश्लेषण कर राजस्थान को बदनाम करने का किया जा रहा है प्रयास : गहलोत

जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) 2021 की क्राइम इन इंडिया रिपोर्ट के बाद राजस्थान को बदनाम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। गहलोत ने शुक्रवार रात अपने बयान में यह बात कही।

उन्होंने कहा कि सामान्य वर्ष 2019 एवं 2021 के बीच आंकड़ों की तुलना करना उचित होगा, क्योंकि वर्ष 2020 में लॉकडाउन रहा। राजस्थान में एफआईआर के अनिवार्य पंजीकरण की नीति के बावजूद वर्ष 2021 में वर्ष 2019 की तुलना में करीब पांच प्रतिशत अपराध कम दर्ज हुए हैं, जबकि मध्यप्रदेश, हरियाणा, गुजरात, उत्तराखंड समेत 17 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में अपराध अधिक दर्ज हुए हैं।

उन्होंने कहा कि गुजरात में अपराधों में करीब 69 प्रतिशत, हरियाणा में 24 प्रतिशत एवं मध्यप्रदेश में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। हत्या, महिलाओं के विरूद्ध अपराध एवं अपहरण में उत्तर प्रदेश देश में सबसे आगे है। सबसे अधिक कस्टोडियल डेथ्स गुजरात में हुई हैं। नाबालिगों से बलात्कार यानी पॉक्सो एक्ट के मामले में मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर है जबकि राजस्थान 12वें स्थान पर है।

गहलोत ने कहा कि अनिवार्य पंजीकरण नीति का ही परिणाम है कि वर्ष 2017-18 में 33 प्रतिशत एफआईआर कोर्ट के माध्यम से सीआरपीसी 156 (3) के तहत इस्तगासे द्वारा दर्ज होती थीं परन्तु अब यह संख्या सिर्फ 13 प्रतिशत रह गई है। इनमें भी अधिकांश सीधे कोर्ट में जाने वाले मुकदमों की शिकायतें ही होती हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का नतीजा है कि वर्ष 2017-18 में बलात्कार के मामलों में अनुसंधान समय 274 दिन था, जो अब केवल 68 दिन रह गया है। पॉक्सो के मामलों में अनुसंधान का औसत समय वर्ष 2018 में 232 दिन था जो अब 66 दिन रह गया है। राजस्थान में पुलिस द्वारा हर अपराध के विरूद्ध प्रभावी कार्रवाई की जा रही है एवं सरकार पूरी तरह पीड़ित पक्ष के साथ खड़ी रहती है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 में एससी-एसटी एक्ट के करीब 51 प्रतिशत मामले अदालत के माध्यम से सीआरपीसी 156(3) से दर्ज होते थे। अब यह महज 10 प्रतिशत रह गया है। यह एफआईआर के अनिवार्य पंजीकरण नीति की सफलता है।

गहलोत ने कहा कि यह चिंता का विषय है कि कुछ लोगों ने हमारी सरकार की एफआईआर के अनिवार्य पंजीकरण की नीति का दुरूपयोग किया है एवं झूठी एफआईआर भी दर्ज करवाईं। इसी का नतीजा है कि प्रदेश में वर्ष 2019 में महिला अपराधों की 45.28 प्रतिशत, वर्ष 2020 में 44.77 प्रतिशत एवं वर्ष 2021 में 45.26 प्रतिशत एफआईआर जांच में झूठी निकली। झूठी एफआईआर करवाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है एवं आगे भी की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गत जनवरी में अलवर में नाबालिग विमंदित बालिका से गैंगरेप का मामला बताकर पूरे देश के मीडिया ने राजस्थान को बदनाम करने का प्रयास किया परन्तु उस मामले की जांच में सामने आया है कि यह एक सड़क दुर्घटना का मामला था। यह मामला सीबीआई को भी जांच के लिए भेजा था, लेकिन सीबीआई ने इस मामले की जांच तक अपने पास नहीं ली।

हमारी सरकार की राय है कि चाहे कुछ झूठी एफआईआर भी क्यों नहीं हो रही हों परन्तु अनिवार्य पंजीकरण की नीति से पीड़ितों एवं फरियादियों को एक संबल मिला है। वे बिना किसी भय के थाने में अपनी शिकायत देकर न्याय के लिए आगे आ रहे हैं।

गहलोत ने कहा कि बलात्कार के प्रकरणों में राजस्थान में सजा का प्रतिशत करीब 48 प्रतिशत है जबकि राष्ट्रीय स्तर पर ये मात्र 28.6 प्रतिशत है। महिला अत्याचार के प्रकरणों में राजस्थान में सजा का प्रतिशत 45.2 प्रतिशत है जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 26.5 प्रतिशत है। महिला अत्याचार के प्रकरणों की पेंडिंग प्रतिशत 9.6 प्रतिशत है जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 31.7 प्रतिशत है। आईपीसी के प्रकरणों में राजस्थान में लंबित प्रतिशत करीब 10 प्रतिशत है जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 35.1 प्रतिशत है।

अशोक गहलोत ने बाबा रामदेव मंदिर में किए दर्शन

जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जैसलमेर जिले में स्थित प्रसिद्ध रामदेवरा तीर्थ पहुंचकर लोकदेवता बाबा रामदेव की समाधि के दर्शन किए।

गहलोत ने पुष्पहार, पगड़ी पहनाकर तथा समाधि पर चादर चढ़ाकर पंचमेवा का भोग लगाया और प्रदेश के सर्वांगीण विकास और खुशहाली के लिए मंगलकामना की। उन्होंने परिसर में डाली बाई के मंदिर में भी दर्शन एवं पूजा-अर्चना की।

मुख्यमंत्री ने पूजा के बाद मंदिर परिसर में बाबा की कचहरी में बाबा रामदेव समाधि समिति के प्रतिनिधियों एवं बाबा रामदेव के वंशजों के साथ बैठकर चर्चा की। कचहरी में गादीपति राव भौमसिंह तंवर एवं अन्य प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को साफा पहनाकर, शॉल ओढ़ाकर एवं बाबा रामदेव की तस्वीर भेंट कर स्वागत किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने मंदिर में दर्शनों के लिए आए देशभर केे हजारों श्रद्धालुओं से भी मिले और उनसे मुलाकात की।

इस अवसर पर अल्पसंख्यक मामलात, वक्फ एवं उपनिवेशन मंत्री शाले मोहम्मद, जैसलमेर विधायक रूपाराम धनदे, बीसूका उपाध्यक्ष उम्मेद सिंह तंवर, रामदेवरा ग्राम पंचायत सरपंच समन्दर सिंह तंवर, राजस्थान युवा बोर्ड सदस्य नितेश पुष्करणा, संभागीय आयुक्त कैलाश चंद मीना, कलक्टर टीना डाबी, पुलिस अधीक्षक भंवर सिंह नाथावत, उपखण्ड अधिकारी एवं मेला मजिस्ट्रेट राजेश विश्नोई एवं अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी मौजूद थे।

चित्तौड़गढ़ : प्रेमिका की हत्या कर शव जलाने का खुलासा, दो अरेस्ट

चित्तौड़गढ़। राजस्थान में चित्तौड़गढ़ जिले के बेंगू थाना क्षेत्र में दो माह पूर्व एक अज्ञात महिला का अधजला शव मिलने के मामले का पुलिस ने आज खुलासा कर मृतका के प्रेमी एवं उसके सहयोगी को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया।

पुलिस अधीक्षक राजन दुष्यंत ने बताया कि गत छह जुलाई को ग्रामीणों की सुचना पर जोगणियां माता के जंगल मे एक 25-30 वर्षीय महिला की जला हुआ शव बरामद किया जिसकी पहचान नहीं हो सकी।

बेंगू थाने पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई इसी दौरान पता चला कि मध्यप्रदेश के सावेर निवासी रेखा जो कि विगत तीन सालों से मनोज सिंह निवासी सामगीमाना के साथ प्रेमिका बन कर मध्यप्रदेश के ही आगर निवासी लोकेश सिंह गुर्जर के मकान मे कमरा किराये पर लेकर रह रही थी।

लोकेश सिंह गुर्जर के मकान पर पहुंच कर मालुमात की गई तो पता चला कि चार जुलाई को मनोज सिंह कमरे से रेखा को शाहाजपुर मे कमरा किराये पर लेने की बात बता कर अपने साथ लेकर गया था। उसके बाद रेखा को किसी ने भी नहीं देखा। इस पर संदिग्ध आरोपी मनोज सिंह एवं साथी राजेन्द्र प्रसाद बैरागी की तलाश कर डिटेन कर पूछताछ की गई।

पुलिस पूछताछ मे आरोपियों ने बताया कि रेखा आए दिन बच्चे पैदा करने एंव मकान दिलाने की बात को लडाई झगडा करती रहती थी। आए दिन के लडाई झगडा से परेशान होने से रेखा को जोगणीया माताजी की तरफ घुमने की कह अपनी कार मे ड्राईवर के साथ आए ओर रात में जोगणीया माताजी के जंगल में ले जाकर चाकू मार घायल करके पट्रोल डाल कर आग लगा कर मार दिया। मामले मे प्रेमी मनोज सिंह एवं ड्राईवर राजेन्द्र प्रसाद बैरागी को गिरफ्तार किया गया।

देश में ईडी, सीबीआई चला रही है शासन : अशोक गहलोत

जैसलमेर। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर सरकारी संस्थाओं का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि देश में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) एवं आयकर विभाग शासन चला रहे हैं।

गहलोत ने जैसलमेर जिले के भणियाना कस्बे में कई विकास कार्याे के शिलान्यास एवं उद्घाटन मौके पर आयोजित एक आम सभा को संबोधित करते हुए आज यह बात कही। उन्होंने कहा कि इन तीनो केंद्रीय संस्थाओं के माध्यम से देश में सरकारें गिराने का काम किया जा रहा है।

पहले भी देश में महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश आदि राज्यों में सरकारे गिराई जा चुकी हैं। यह तो अच्छा हुआ कि राजस्थान में इनकी दाल नहीं गली, नहीं तो इन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी थी।

उन्होंने कहा कि देश में हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं। माहौल बहुत डरावना हैं। देश में सद्भावना, विश्वास एवं प्यार की जरुरत हैं लेकिन केंद्र सरकार इस पर कोई ध्यान नहीं दे रही हैं। उन्होंने कहा कि पिछले चार महीनों से लगातार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अनुरोध किया जा रहा हैं कि वह आम जनता को संबोधित करते हुए शान्ति एवं भाईचारा बनाने की अपील करे लेकिन इसमें भी उनको कई दिक्कतें आ रही हैं।

गहलोत ने कहा कि श्री मोदी ने पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी) को राष्ट्रीय परियोजना बनाने की अपील की थी, हम कई बार अनुरोध कर चुके हैं क्योंकि इससे 13 जिलों की पानी की समस्या समाप्त हो जाती हैं लेकिन अभी तक उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान में सांसद भाजपा के हैं लेकिन वे भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पास इसको लेकर नहीं गए।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस शासन से पहले उन्होंने बाड़मेर की पचपदरा रिफाईनरी का शिलान्यास किया था, उस समय यह 40 हजार करोड़ का प्रोजेक्ट था लेकिन सरकार बदलने के बाद इसे ठंडे बस्ते में डाल देने से इसकी लागत बढ़ गई।

गहलोत ने कहा कि राजस्थान सरकार ने प्रदेश की महिलाओं को हाईटेक करने के लिए 1.35 करोड़ महिलाओं को स्मार्ट फोने देने की घोषणा की हुई है और इसमें तीन साल का इंटरनेट मुफ्त मिलेगा। इस स्मार्ट फोन से महिलाएं काफी हाईटैक होगी एवं काफी बदलाव आयेगा। राजस्थान में लड़कों की अपेक्षा ज्यादा लड़कियां पढ़ रही हैं। आज प्रदेश में सरपंच, प्रधान, प्रमुख, चैयरमेन आदि के पदो पर महिलाएं अधिक सुशोभित देखी जा सकती हैं।

प्रदेश मे सड़कों के संबंध में चर्चा करते हुए गहलोत ने कहा कि देश में राजस्थान सड़कों की गुणवत्ता के बारे में गुजरात से भी आगे हैं और देश में इसका पहला स्थान हैं लेकिन राज्य में कुछ सड़कों पर खड्डे आदि होने की शिकायतें मिली थी।

करौली : नाबालिग छात्रा से रेप के दोषी अध्यापक को 20 वर्ष का कारावास

करौली। राजस्थान में करौली की पॉक्सो अदालत ने आज एक नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के आरोपी अध्यापक को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा एवं एक लाख रुपए के जुर्माने से दंडित किया।

विशिष्ठ लोक अभियोजक महेन्द्र कुमार मुदगल ने बताया कि पीड़िता की मां ने टोडाभीम थाने में इसी वर्ष चार जनवरी को मामला दर्ज कराते बताया की नाबालिग एक निजी स्कूल में पढ़ती है। 4 जनवरी को 10 बजे स्कूल पढ़ने गई।

छुट्टी के समय जब वह बालिका को लेने स्कूल गई तो स्कूल का दरवाजा बंद था। स्कूल के कमरे के अंदर से रोने की आवाज आ रही थी। दरवाजा खोला तो बालिका के कपड़े खुले हुए थे और 28 वर्षीय आरोपी धनराज निवासी मोनापुरा टोडाभीम भाग गया।

पुलिस ने जांच में आरोपी धनराज के खिलाफ पॉक्सो एक्ट में मामला दर्ज कर छह जनवरी को उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने मामले में आठ फरवरी को पॉक्सो कोर्ट में चालान पेश किया। सुनवाई के दौरान 7 गवाह और 15 दस्तावेज पेश किए गए। पॉक्सो कोर्ट विशिष्ट न्यायाधीश अलका बंसल ने आरोपी को दोषी मानते हुए 20 वर्ष कठोर कारावास की सजा और एक लाख रुपए जुर्माना लगाया है।

तीस्ता सीतलवाड़ को अंतरिम जमानत, शनिवार तक रिहा करें : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने 2002 के गुजरात दंगों के मामलों में लोगों को फंसाने के लिए कथित सबूत बनाने और जालसाजी के आरोप में 25 जून को गिरफ्तार सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ की अंतरिम जमानत याचिका को शुक्रवार को मंजूरी दे दी।

मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित और न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने याचिकाकर्ता के महिला होने और जांच एजेंसी द्वारा उन्हें गिरफ्तारी के बाद सात दिनों तक हिरासत में पूछताछ के तथ्य पर गौर करते हुए जमानत की अर्जी मंजूर की।

पीठ ने अंतरिम जमानत देते हुए कहा कि अपीलकर्ता महिला 25 जून से हिरासत में है। उनके खिलाफ आरोप 2002 से 2012 के दौरान के हैं। जांच एजेंसी को सात दिनों की हिरासत में पूछताछ का फायदा हुआ।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू के अनुरोध पर पीठ ने स्पष्ट किया कि सीतलवाड़ को दी गई जमानत का इस्तेमाल अन्य आरोपियों को इसी तरह की राहत पाने के लिए नहीं किया जा सकता है। पीठ ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को शनिवार तक निचली अदालत में पेश किया जाए और निचली अदालत द्वारा निर्धारित शर्तों पर रिहा किया जाए।

शीर्ष न्यायालय ने गुरुवार को उनकी जमानत याचिका पर उच्च न्यायालय द्वारा दी गई छह सप्ताह की लंबी तारीख पर सवाल किया था। उच्च न्यायालय ने गुजरात सरकार को उसकी याचिका पर तीन अगस्त को नोटिस जारी किया था और मामले की सुनवाई 19 सितंबर को तय की थी। याचिकाकर्ता ने इसे शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी।

शीर्ष न्यायालय ने 24 जून 2022 को 2002 के गुजरात दंगों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री) और अन्य को अदालत द्वारा गठित एसआईटी की ओर से दी गई ‘क्लीन चिट’ को बरकरार रखा था।